राजस्थान निकाय चुनाव: जयपुर पहुंचे भाजपा संगठन मंत्री बीएल संतोष, तैयारियों पर होगी चर्चा

Saurabh Mishra | Sept 04, 2026, 12:28 IST
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जयपुर पहुंचे राष्ट्रीय संगठन महामंंत्री BL संतोष
जयपुर पहुंचे राष्ट्रीय संगठन महामंंत्री BL संतोष

राजस्थान में नगर निकाय चुनाव से पहले टिकट बंटवारे को लेकर BJP में नाराजगी बढ़ी है। इस बीच, शुक्रवार को राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बीएल संतोष जयपुर पहुंचे हैं।

समझें क्या है पूरा मामला

  • राजस्थान निकाय चुनाव से पहले BJP में टिकटों पर बगावत।
  • जयपुर पहुंचे राष्ट्रीय संगठन महामंंत्री BL संतोष।
  • टिकट कटने से नाराज कार्यकर्ता, बागी बने सिरदर्द।
  • मुख्यमंत्री भजनलाल संग बैठक में बनेगी बगावत रोकने की रणनीति।
  • क्या नाराज नेताओं को मना पाएगी राजस्थान में भाजपा।
राजस्थान में नगर निकाय चुनाव में नाम वापसी का समय निकलने के बाद अब हर पार्टी नजर डैमेज कंट्रोल पर है। भाजपा का भी इसपर पूरा ध्यान है। समझाइश के बाद भी कई नगर निगमों में भाजपा के लिए बागी परेशानी खड़ी कर सकते हैं। कई स्थानों पर टिकट कटने से पुराने कार्यकर्ता भी नाराज हैं।

इस स्थिति को संभालने के लिए राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बीएल संतोष शुक्रवार को जयपुर पहुंचे। वे मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ के साथ भाजपा मुख्यालय में बैठक करेंगे।

भाजपा संगठन महामंत्री बीएल संतोष जयपुर पहुंचे

कहीं टिकट कटने से भाजपा के पुराने कार्यकर्ता नाराज हैं, तो कहीं प्रत्याशी चयन पर सवाल उठ रहे। कुछ जगह बगावत के सुर खुलकर सामने आने लगे हैं। जिनके सहारे बीजेपी शहरों की सत्ता जीतने निकली थी, वही टिकट अब पार्टी के लिए सिरदर्द बनते दिख रहे।

बीएल संतोष का जयपुर दौरा क्यों अहम

इस सियासी गांठ को सुलझाने के लिए राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बीएल संतोष जयपुर में मोर्चा संभाल रहे। उनका यह दौरा सिर्फ चुनावी तैयारियों की समीक्षा भर नहीं माना जा रहा।

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ और संगठन के बड़े नेताओं के साथ हो रही बैठकों में चुनावी रणनीति के साथ टिकट बंटवारे के बाद पैदा हुई नाराजगी पर भी चर्चा होने की उम्मीद है। बागियों और भीतरघात की आशंका जैसे मुद्दे भी इन बैठकों में अहम माने जा रहे।

सिर्फ मीटिंग नहीं, संगठन को एक लाइन पर लाने की कोशिश

भाजपा के राष्ट्रीय संगठन महामंत्री का चुनाव के बीच जयपुर पहुंचना इसलिए अहम है, क्योंकि अब बात सिर्फ प्रचार की नहीं रही। प्रदेश नेतृत्व से फीडबैक लिया जा रहा। चुनावी प्रभारियों से जमीनी हालात की जानकारी ली जा रही।

कहां बागी नुकसान पहुंचा सकता है, कहां कार्यकर्ता निष्क्रिय है और कहां प्रत्याशी को अपने ही संगठन से पूरा साथ नहीं मिल रहा, इन सवालों पर भी मंथन होना तय माना जा रहा। इस पूरी कवायद का सीधा संदेश है कि टिकट पर फैसला हो चुका है, अब संगठन को प्रत्याशी के पीछे खड़ा होना होगा।

चुनाव तैयारियों पर भी फीडबैक लेंगे संगठन महामंत्री

निकाय चुनाव में टिकट किसी एक नेता की जीत-हार का सवाल नहीं होता। किसी वार्ड में टिकट कटने से नाराज हुआ पुराना कार्यकर्ता अगर घर बैठ जाए और दूसरा बागी होकर मैदान में उतर जाए, तो नुकसान सिर्फ प्रत्याशी का नहीं बल्कि पूरी पार्टी के चुनावी गणित का हो सकता है।

टिकट मांगने वालों की कतार लंबी थी, जगह एक थी। सूची आने पर किसी की उम्मीद टूटी तो किसी का दावा खारिज हुआ। कई जगह चयन को लेकर सवाल भी उठे। यह नाराजगी अगर मतदान तक बनी रही तो पार्टी को विपक्ष से पहले अपने ही घर में मुकाबला करना पड़ सकता है।

क्या बागियों पर चलेगा संगठन का डंडा

निकाय चुनाव में बागी उम्मीदवार अक्सर बड़ी पार्टियों का गणित बिगाड़ देते हैं। विधानसभा चुनाव की तुलना में वार्ड का दायरा छोटा होता है और कई सीटों पर जीत-हार का अंतर भी कम रह सकता। ऐसे में पार्टी का अपना वोट बंटा तो नुकसान बड़ा हो सकता।

यही वजह है कि आने वाले दिनों में नाराज नेताओं को मनाने से लेकर अनुशासन का संदेश देने तक, दोनों रास्ते अपनाए जा सकते। बीजेपी के लिए असली सवाल यह नहीं कि टिकट किसे मिला, बल्कि यह है कि जिसे टिकट नहीं मिला, क्या वह भी पार्टी के लिए उतनी ही ताकत से मैदान में उतरेगा।

चुनावी पोस्टर पर प्रत्याशी का चेहरा होता है, लेकिन वार्ड में वोट निकालने का काम कार्यकर्ता ही करता है। अगर टिकट वितरण की नाराजगी बूथ तक पहुंच गई तो बीजेपी के लिए मुकाबला मुश्किल हो सकता है। वहीं अगर संगठन समय रहते नाराज खेमों को साथ ले आया तो यह संकट चुनाव से पहले ही खत्म हो सकता है। इसीलिए बीएल संतोष की जयपुर बैठकों पर सबकी नजर टिकी है।

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