लोगों की सुनें, सुनाएं नहीं, मुख्यमंत्री साय की दो टूक, आम आदमी के साथ शालीनता से पेश आएं अफसर
Arun Tiwari | May 01, 2026, 14:31 IST
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मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने अधिकारियों से आम जनता के साथ शालीनता और धैर्य से पेश आने को कहा है। उन्होंने कहा कि अफसरों को जनता की समस्याओं को गंभीरता से सुनकर हल करना चाहिए और उनका व्यवहार सम्मानजनक होना चाहिए।
Raipur : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रदेश की प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक संवेदनशील बनाने के लिए अधिकारियों को स्पष्ट और सख्त निर्देश दिए हैं।
उन्होंने दो टूक कहा कि आम जनता के साथ शालीनता, धैर्य और सम्मानजनक व्यवहार हर अधिकारी की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि लोगों की सुनें, लोगों को सुनाएं नहीं।
आम जनता के साथ अधिकारी शालीनता से पेश आएं। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि शासकीय अधिकारी ही शासन का चेहरा होते हैं। चाहे मुख्यालय हो या फील्ड स्तर।
अधिकारियों का आचरण सीधे तौर पर सरकार की छवि को प्रभावित करता है। ऐसे में उनका व्यवहार संयमित, संवेदनशील और सहयोगात्मक होना जरुरी है।
Vishnu Deo Sai उन्होंने अधिकारियों को आगाह करते हुए कहा कि जनता की समस्याओं को केवल औपचारिकता के रूप में नहीं, बल्कि गंभीरता से सुनना और उनके समाधान पर ध्यान केंद्रित करना होगा।
उन्होंने स्पष्ट किया कि संवाद तभी सार्थक होता है, जब उसमें संवेदना के साथ समस्याओं को हल करने की नीयत भी शामिल हो। मुख्यमंत्री ने कहा कि जब कोई आम नागरिक शासकीय कार्यालय पहुंचे
तो उसे यह महसूस होना चाहिए कि उसकी बात सुनी जा रही है और उसके साथ सम्मानपूर्वक व्यवहार किया जा रहा है। यही अनुभव जनता के मन में सरकार के प्रति विश्वास को मजबूत करता है।
मुख्यमंत्री ने सभी विभागों को निर्देशित किया कि वे जनसमस्याओं के निराकरण की प्रक्रिया को सरल, प्रभावी और भरोसेमंद बनाएं।
उन्होंने कहा कि योजनाओं की सफलता केवल आंकड़ों से नहीं आंकी जा सकती, बल्कि इसका असली पैमाना जनता का अनुभव होता है।
इसलिए अधिकारियों को फील्ड में सक्रिय रहकर लोगों से सीधे संवाद स्थापित करना चाहिए और उनकी वास्तविक जरूरतों के अनुरूप कार्य करना चाहिए।
सीएम ने पारदर्शिता और जवाबदेही को प्रशासन का मूल आधार बताते हुए कहा कि जनता का विश्वास सबसे बड़ी पूंजी है। इस विश्वास को बनाए रखने के लिए ईमानदारी के साथ-साथ व्यवहार में शालीनता और विनम्रता भी जरूरी है।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि सुशासन केवल नीतियों से नहीं, बल्कि व्यवहार से स्थापित होता है। यदि अधिकारी सहज, सरल और समाधान-केन्द्रित रवैया अपनाते हैं, तो प्रशासन स्वतः अधिक प्रभावी हो जाता है और शिकायतों में कमी आती है।
मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि विकसित छत्तीसगढ़ का सपना तभी साकार होगा, जब प्रशासन हर नागरिक के लिए सुलभ, संवेदनशील और सम्मानजनक बने।
उन्होंने अधिकारियों से अपेक्षा की कि वे इस भावना को अपने कार्य का मूल मंत्र बनाएं और हर व्यक्ति को यह भरोसा दिलाएं कि सरकार उसके साथ खड़ी है। इस दौरान मुख्यमंत्री साय ने कहा कि सुशासन तिहार के दौरान वे स्वयं विभिन्न क्षेत्रों में औचक निरीक्षण करेंगे।
इन निरीक्षणों में न केवल कार्यों की प्रगति, बल्कि अधिकारियों के व्यवहार और जनसंपर्क के तरीके का भी मूल्यांकन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि अधिकारियों की संवेदनशीलता, शालीनता और जवाबदेही को प्राथमिकता के साथ परखा जाएगा।
सुशासन तिहार 2026 का आयोजन 1 मई से 10 जून तक पूरे प्रदेश में किया जा रहा है। इस दौरान ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर समाधान शिविर लगाए जाएंगे, जहां पंचायत और वार्ड स्तर पर आम नागरिकों से आवेदन
लेकर उनकी समस्याओं का त्वरित निराकरण किया जाएगा। इस अभियान में जनप्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की गई है और स्वयं मुख्यमंत्री द्वारा लगातार निगरानी रखी जाएगी।
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उन्होंने दो टूक कहा कि आम जनता के साथ शालीनता, धैर्य और सम्मानजनक व्यवहार हर अधिकारी की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि लोगों की सुनें, लोगों को सुनाएं नहीं।
आम जनता के साथ अधिकारी शालीनता से पेश आएं। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि शासकीय अधिकारी ही शासन का चेहरा होते हैं। चाहे मुख्यालय हो या फील्ड स्तर।
अधिकारियों का आचरण सीधे तौर पर सरकार की छवि को प्रभावित करता है। ऐसे में उनका व्यवहार संयमित, संवेदनशील और सहयोगात्मक होना जरुरी है।
Vishnu Deo Sai उन्होंने अधिकारियों को आगाह करते हुए कहा कि जनता की समस्याओं को केवल औपचारिकता के रूप में नहीं, बल्कि गंभीरता से सुनना और उनके समाधान पर ध्यान केंद्रित करना होगा।
समस्या हल करने की नीयत हो
तो उसे यह महसूस होना चाहिए कि उसकी बात सुनी जा रही है और उसके साथ सम्मानपूर्वक व्यवहार किया जा रहा है। यही अनुभव जनता के मन में सरकार के प्रति विश्वास को मजबूत करता है।
मुख्यमंत्री ने सभी विभागों को निर्देशित किया कि वे जनसमस्याओं के निराकरण की प्रक्रिया को सरल, प्रभावी और भरोसेमंद बनाएं।
उन्होंने कहा कि योजनाओं की सफलता केवल आंकड़ों से नहीं आंकी जा सकती, बल्कि इसका असली पैमाना जनता का अनुभव होता है।
इसलिए अधिकारियों को फील्ड में सक्रिय रहकर लोगों से सीधे संवाद स्थापित करना चाहिए और उनकी वास्तविक जरूरतों के अनुरूप कार्य करना चाहिए।
जनता का विश्वास हासिल करें
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि सुशासन केवल नीतियों से नहीं, बल्कि व्यवहार से स्थापित होता है। यदि अधिकारी सहज, सरल और समाधान-केन्द्रित रवैया अपनाते हैं, तो प्रशासन स्वतः अधिक प्रभावी हो जाता है और शिकायतों में कमी आती है।
सुशासन कागज में नहीं जमीन पर हो
उन्होंने अधिकारियों से अपेक्षा की कि वे इस भावना को अपने कार्य का मूल मंत्र बनाएं और हर व्यक्ति को यह भरोसा दिलाएं कि सरकार उसके साथ खड़ी है। इस दौरान मुख्यमंत्री साय ने कहा कि सुशासन तिहार के दौरान वे स्वयं विभिन्न क्षेत्रों में औचक निरीक्षण करेंगे।
इन निरीक्षणों में न केवल कार्यों की प्रगति, बल्कि अधिकारियों के व्यवहार और जनसंपर्क के तरीके का भी मूल्यांकन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि अधिकारियों की संवेदनशीलता, शालीनता और जवाबदेही को प्राथमिकता के साथ परखा जाएगा।
1 मई से 10 जून तक सुशासन तिहार
लेकर उनकी समस्याओं का त्वरित निराकरण किया जाएगा। इस अभियान में जनप्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की गई है और स्वयं मुख्यमंत्री द्वारा लगातार निगरानी रखी जाएगी।
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