नियद नेल्ला नार योजना बनी मिसाल, 400 गांव फिर हुए आबाद... अब होती है विकास की बात
The Sootr | Dec 24, 2025, 13:07 IST
Impact Feature
बस्तर में 'नियद नेल्ला नार' योजना से आ रहा है बड़ा बदलाव। नक्सल प्रभावित इलाकों में सड़क, बिजली और स्कूल जैसी सुविधाएं पहुँच रही हैं। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की इस पहल की पूरी जानकारी यहां देखें।
बस्तर का नाम आते ही कभी डर, हिंसा और उपेक्षा की तस्वीर आंखों के सामने आ जाती थी। ऐसे गांव, जहां सरकारी योजनाएं कागजों तक सिमटकर रह जाती थीं। जहां सड़क, बिजली, स्कूल और अस्पताल जैसी बुनियादी सुविधाएं भी सपना लगती थीं, लेकिन अब यही बस्तर धीरे-धीरे नई पहचान गढ़ रहा है। इस बदलाव की सबसे बड़ी वजह बनी है नियद नेल्ला नार योजना, जिसने बस्तर के इतिहास में अब तक का सबसे बड़ा प्रशासनिक और विकासात्मक परिवर्तन दर्ज कराया है।
स्थानीय गोंडी और हलबी बोली में “नियद नेल्ला नार” का अर्थ होता है...आपका अच्छा गांव। इस नाम के पीछे सरकार की वही सोच छिपी है, जिसमें बस्तर के सबसे दूर-दराज, नक्सल प्रभावित और वर्षों से उपेक्षित इलाकों को भरोसेमंद शासन और विकास की मुख्यधारा से जोड़ना लक्ष्य है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार ने इस योजना को केवल कागजी पहल नहीं रहने दिया, बल्कि इसे जमीन पर उतारकर लोगों के जीवन से जोड़ा है।
नियद नेल्ला नार योजना की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें सुरक्षा और विकास को एक साथ आगे बढ़ाया गया है। पहले जहां विकास कार्यों के नाम पर केवल घोषणाएं होती थीं, अब वहां सुरक्षा कैंपों के आसपास प्रशासन की स्थायी मौजूदगी दिखाई देती है। शुरुआत में यह मॉडल 5 किलोमीटर के दायरे तक सीमित था, जिसे अब बढ़ाकर 10 किलोमीटर कर दिया गया है। इसके तहत अब 69 फॉरवर्ड कैंपों के आसपास बसे 397 गांवों तक सरकारी सेवाएं सीधे पहुंच रही हैं। यह विस्तार बस्तर के इतिहास में सबसे बड़े सरकारी आउटरीच के रूप में देखा जा रहा है।
इस योजना के तहत 9 विभागों की 18 सामुदायिक सेवाएं और 11 विभागों की 25 व्यक्ति-केंद्रित योजनाएं सीधे गांवों तक पहुंचाई जा रही हैं। इनमें स्वास्थ्य सेवाएं, स्कूल शिक्षा, आंगनबाड़ी, राशन वितरण, आयुष्मान कार्ड, आधार, जाति और निवास प्रमाण पत्र, पेंशन योजनाएं, उज्ज्वला योजना, प्रधानमंत्री आवास, रोजगार और किसान सहायता जैसी सुविधाएं शामिल हैं। जो काम पहले एक-दो दिन की पैदल यात्रा और कई दफ्तरों के चक्कर लगाने के बाद होता था, अब वही सेवाएं कैंपों और मोबाइल टीमों के जरिए गांव के पास ही मिल रही हैं। इससे लोगों का भरोसा शासन पर बढ़ा है और सरकारी व्यवस्था को लेकर वर्षों पुराना डर कम हुआ है।
![NIYAD YOJNA]()
छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री विष्णुदेव सायका कहना है कि पिछले दो वर्ष छत्तीसगढ़ के इतिहास में निर्णायक मोड़ साबित हुए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा 31 मार्च 2026 तक पूरे देश से नक्सलवाद का खात्मा करने के लक्ष्य की दिशा में छत्तीसगढ़ तेजी से आगे बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री के अनुसार, नक्सलवाद अब अंतिम सांसें गिन रहा है। बीते दो वर्षों में सुरक्षा बलों ने अभूतपूर्व सफलता हासिल की है। 500 से अधिक माओवादी मुठभेड़ों में न्यूट्रलाइज हुए, जबकि 4,000 से अधिक नक्सलियों ने आत्मसमर्पण या गिरफ्तारी दी है। यह आंकड़े साफ संकेत देते हैं कि बस्तर में हिंसा की जड़ें टूट रही हैं।
![NIYAD YOJNA]()
सरकार ने नक्सलियों के पुनर्वास के लिए नई नीति लागू की है। इसके तहत आत्मसमर्पण करने वालों के लिए 15,000 प्रधानमंत्री आवास, तीन वर्षों तक 10,000 रुपए मासिक सहायता, कौशल विकास प्रशिक्षण और रोजगार से जुड़ी योजनाएं शामिल हैं। मुख्यमंत्री का कहना है कि अब बस्तर में गोली की भाषा छोड़कर मुख्यधारा से जुड़ने का रास्ता खुला है। पंडुम कैफे जैसे नवाचार सामाजिक बदलाव के प्रतीक बन गए हैं, जहां पूर्व नक्सली सम्मान के साथ रोजगार पा रहे हैं।
नियद नेल्ला नार योजना के प्रभाव से 400 से अधिक गांव दोबारा आबाद हो चुके हैं। जहां कभी लोग डर के कारण घर छोड़ने को मजबूर थे, वहां अब जीवन लौट रहा है। इन इलाकों में सड़कें बन रही हैं, बिजली पहुंच रही है, पेयजल की व्यवस्था हो रही है, स्कूल और स्वास्थ्य केंद्र शुरू हो रहे हैं। कई गांवों में वर्षों बाद तिरंगा फहराया गया। चुनावों में लोग बिना डर के मतदान कर रहे हैं। राशन कार्ड से लेकर मोबाइल नेटवर्क तक की सुविधाएं अब आम होती जा रही हैं।
![NIYAD YOJNA]()
बस्तर अब केवल संघर्ष का क्षेत्र नहीं, बल्कि संभावनाओं का केंद्र बनता जा रहा है। कृषि, सिंचाई, वनोपज, पशुपालन और छोटे उद्योगों के क्षेत्र में नई संभावनाएं उभर रही हैं। नई औद्योगिक नीति 2024–30 में नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं। वनोपज आधारित वैल्यू एडिशन, प्रसंस्करण और ग्रामीण उद्यमिता को बढ़ावा दिया जा रहा है, ताकि स्थानीय युवाओं को गांव में ही रोजगार और स्थायी आय मिल सके।
![NIYAD YOJNA]()
पर्यटन को उद्योग का दर्जा मिलने से बस्तर की पहचान तेजी से बढ़ी है। कुटुमसर गुफा, झरने, अबूझमाड़ के जंगल और जनजातीय संस्कृति अब देश-विदेश के पर्यटकों को आकर्षित कर रहे हैं। होम-स्टे मॉडल से ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ रही है और स्थानीय संस्कृति को नया मंच मिल रहा है। यह बदलाव सुरक्षा बलों के त्याग, शहीद जवानों के बलिदान और जनता के विश्वास का परिणाम है।
नियद नेल्ला नार योजना के तहत डिजिटल कनेक्टिविटी पर विशेष जोर दिया गया है। योजना क्षेत्र में 700 से अधिक मोबाइल टावर लगाए या अपग्रेड किए गए हैं, जिनमें बड़ी संख्या में 4G टावर शामिल हैं। कुंडापल्ली और अबूझमाड़ जैसे इलाकों में आज़ादी के बाद पहली बार मोबाइल नेटवर्क पहुंचा है। इससे बैंकिंग, ऑनलाइन शिक्षा, टेलीमेडिसिन और सरकारी योजनाओं की जानकारी लोगों तक पहुंचने लगी है।
![NIYAD YOJNA]()
कई गांवों में पहली बार घर-घर बिजली पहुंची है। अबूझमाड़ जैसे दूरस्थ क्षेत्रों में बस सेवाएं शुरू होने से आवागमन आसान हुआ है। बारहमासी सड़कों और पुल-पुलियों के निर्माण से सालभर संपर्क बना रहता है। लंबे समय से बंद पड़े हाट-बाजार फिर गुलजार हो रहे हैं। व्यापारिक गतिविधियां बढ़ी हैं और युवाओं को स्थानीय स्तर पर रोज़गार मिलने लगा है।
नक्सल प्रभावित इलाकों में अब 17 विभागों की 59 हितग्राही योजनाएं और 28 सामुदायिक सुविधाएं लागू की जा रही हैं। साथ ही विद्यार्थियों के लिए तकनीकी और प्रोफेशनल शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए ब्याजमुक्त ऋण का निर्णय लिया गया है। इससे युवाओं को आगे बढ़ने का अवसर मिल रहा है।
![NIYAD YOJNA]()
कई गांवों में विकास की तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है। कलेपाल में सड़क और बिजली के साथ बाजार फिर से सक्रिय हुआ है। कोलेंग में सड़क, बिजली और आंगनबाड़ी शुरू हो चुकी है। बोदली में उचित मूल्य दुकान और सड़क निर्माण ने जीवन आसान किया है। पूवर्ती जैसे गांव, जो कभी नक्सलियों का ठिकाना माने जाते थे, अब राशन दुकान, मोबाइल टावर और DTH जैसी सुविधाओं से जुड़ चुके हैं।
बीजापुर जिले के तर्रेम क्षेत्र की हुंगी को मिला पहला प्रधानमंत्री आवास पूरे गांव के लिए उम्मीद का प्रतीक बन गया है। पक्का घर केवल एक परिवार का सपना पूरा होना नहीं, बल्कि यह संदेश है कि सरकार अब सबसे दूर तक पहुंच रही है।
इस तरह नियद नेल्ला नार योजना ने यह साबित किया है कि संवेदनशील नीति, मजबूत क्रियान्वयन और जनकल्याण की नीयत मिलकर सबसे दुर्गम क्षेत्रों में भी बदलाव ला सकती है। 69 फॉरवर्ड कैंपों से 397 गांवों को जोड़ने वाला यह मॉडल अब योजना भर नहीं, बल्कि देश के सबसे प्रभावी और मानव-केंद्रित ग्रामीण प्रशासनिक मॉडलों में गिना जा रहा है।
RO-13257/8
स्थानीय गोंडी और हलबी बोली में “नियद नेल्ला नार” का अर्थ होता है...आपका अच्छा गांव। इस नाम के पीछे सरकार की वही सोच छिपी है, जिसमें बस्तर के सबसे दूर-दराज, नक्सल प्रभावित और वर्षों से उपेक्षित इलाकों को भरोसेमंद शासन और विकास की मुख्यधारा से जोड़ना लक्ष्य है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार ने इस योजना को केवल कागजी पहल नहीं रहने दिया, बल्कि इसे जमीन पर उतारकर लोगों के जीवन से जोड़ा है।
सुरक्षा के साथ विकास का मॉडल
chhattisgarh sarkar (3)
गांव-गांव तक पहुंची सरकार
NIYAD YOJNA
नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक जंग
NIYAD YOJNA
आत्मसमर्पण के बाद नई जिंदगी
फिर से आबाद हो रहे गांव
NIYAD YOJNA
भविष्य के विकास केंद्र बन रहा बस्तर
NIYAD YOJNA
पर्यटन को उद्योग का दर्जा मिलने से बस्तर की पहचान तेजी से बढ़ी है। कुटुमसर गुफा, झरने, अबूझमाड़ के जंगल और जनजातीय संस्कृति अब देश-विदेश के पर्यटकों को आकर्षित कर रहे हैं। होम-स्टे मॉडल से ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ रही है और स्थानीय संस्कृति को नया मंच मिल रहा है। यह बदलाव सुरक्षा बलों के त्याग, शहीद जवानों के बलिदान और जनता के विश्वास का परिणाम है।
आजादी के बाद पहली बार नेटवर्क
NIYAD YOJNA
कई गांवों में पहली बार घर-घर बिजली पहुंची है। अबूझमाड़ जैसे दूरस्थ क्षेत्रों में बस सेवाएं शुरू होने से आवागमन आसान हुआ है। बारहमासी सड़कों और पुल-पुलियों के निर्माण से सालभर संपर्क बना रहता है। लंबे समय से बंद पड़े हाट-बाजार फिर गुलजार हो रहे हैं। व्यापारिक गतिविधियां बढ़ी हैं और युवाओं को स्थानीय स्तर पर रोज़गार मिलने लगा है।
योजनाओं का व्यापक विस्तार
NIYAD YOJNA
कई गांवों में विकास की तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है। कलेपाल में सड़क और बिजली के साथ बाजार फिर से सक्रिय हुआ है। कोलेंग में सड़क, बिजली और आंगनबाड़ी शुरू हो चुकी है। बोदली में उचित मूल्य दुकान और सड़क निर्माण ने जीवन आसान किया है। पूवर्ती जैसे गांव, जो कभी नक्सलियों का ठिकाना माने जाते थे, अब राशन दुकान, मोबाइल टावर और DTH जैसी सुविधाओं से जुड़ चुके हैं।
जमीनी असर की मिसाल
इस तरह नियद नेल्ला नार योजना ने यह साबित किया है कि संवेदनशील नीति, मजबूत क्रियान्वयन और जनकल्याण की नीयत मिलकर सबसे दुर्गम क्षेत्रों में भी बदलाव ला सकती है। 69 फॉरवर्ड कैंपों से 397 गांवों को जोड़ने वाला यह मॉडल अब योजना भर नहीं, बल्कि देश के सबसे प्रभावी और मानव-केंद्रित ग्रामीण प्रशासनिक मॉडलों में गिना जा रहा है।
RO-13257/8
mp-top-news: खबरें काम की... ब्राह्मणों ने कभी शासन नहीं किया, नरोत्तम मिश्रा बोले खामोशी को कमजोरी न समझें
By Sanjay Dhiman
झाबुआ संयुक्त कलेक्टर अक्षय सिंह की नौकरी खतरे में, फर्जी जाति प्रमाणपत्र में ऐसे घिरे
By Sanjay Gupta
बस्तर में बाढ़ का जायजा लेने पहुंचे CM साय, प्रभावित परिवारों से मिले, 10 हजार रुपए अतिरिक्त सहायता की घोषणा
By Arun Tiwari
Top News: खबरें काम की... नेपाल में पहाड़ टूटा, भूस्खलन और बाढ़ में 24 की मौत, डोनाल्ड ट्रंप का दावा- ईरान से जल्द खत्म होगी जंग
By Jitendra Shrivastava
Top News: खबरें काम की... नेपाल में पहाड़ टूटा, भूस्खलन और बाढ़ में 24 की मौत, डोनाल्ड ट्रंप का दावा- ईरान से जल्द खत्म होगी जंग
By Jitendra Shrivastava
Top News: खबरें काम की... नेपाल में पहाड़ टूटा, भूस्खलन और बाढ़ में 24 की मौत, डोनाल्ड ट्रंप का दावा- ईरान से जल्द खत्म होगी जंग
By Jitendra Shrivastava
मंत्रालय में बड़ा फेरबदल, 38 अनुभाग अधिकारियों की बदली जिम्मेदारी; वित्त-गृह समेत कई विभागों में नई तैनाती
By VINAY VERMA