दूसरे स्कूल के नाम पर परीक्षा! डोंगरगढ़ में UDISE कोड का खेल, किसने किया खिलवाड़?

VINAY VERMA | Jun 01, 2026, 13:16 IST
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डोंगरगढ़ आदर्श पब्लिक स्कूल पर बिना मान्यता संचालन और दूसरे स्कूल का UDISE कोड इस्तेमाल कर बोर्ड परीक्षा में पंजीयन का गंभीर आरोप लगा है। मामले में अंकसूचियों में गड़बड़ी और दस्तावेजों की कमी की भी शिकायत सामने आई है।

News in Short:

  • डोंगरगढ़ के आदर्श पब्लिक स्कूल पर सवाल
  • दूसरे स्कूल का UDISE कोड इस्तेमाल का आरोप
  • बिना मान्यता स्कूल का हो रहा संचालन
  • 5वीं बोर्ड परीक्षा में हुई बड़ी गड़बड़ी

News in Detail:

राजनांदगांव जिले के डोंगरगढ़ में शिक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर विवाद सामने आया है। मामला ग्राम ढारा के आदर्श पब्लिक स्कूल से जुड़ा है। आरोप इतने गंभीर हैं कि अब पूरे शिक्षा विभाग की निगरानी व्यवस्था कटघरे में खड़ी दिखाई दे रही है। सवाल सिर्फ एक स्कूल का नहीं है। सवाल यह है कि यदि आरोप सही हैं तो आखिर सरकारी रिकॉर्ड और परीक्षा प्रणाली में इतनी बड़ी सेंध कैसे लग गई? दावा किया जा रहा है कि अब प्रदेश के हर जिलों में फर्जी स्कूलों की जांच की जाएगी।

UDISE कोड का कथित खेल

शिकायत के अनुसार आदर्श पब्लिक स्कूल पिछले दो वर्षों से बिना वैधानिक अनुमति के संचालित हो रहा है। आरोप है कि स्कूल के पास खुद का वैध UDISE कोड या मान्यता संबंधी आवश्यक दस्तावेज नहीं थे। इसके बावजूद पांचवीं बोर्ड परीक्षा में विद्यार्थियों का पंजीयन कराया गया।

सबसे गंभीर आरोप यह है कि इसके लिए ग्राम ढारा के सरस्वती शिशु मंदिर का UDISE कोड 22090612802 इस्तेमाल किया गया। इसी कोड के माध्यम से छात्रों को परीक्षा में बैठाने की प्रक्रिया पूरी की गई। यदि यह आरोप सही साबित होता है तो यह सिर्फ नियम उल्लंघन नहीं बल्कि शैक्षणिक रिकॉर्ड में गंभीर अनियमितता मानी जाएगी।

सरस्वती शिशु मंदिर ने झाड़ा पल्ला

मामले के सामने आने के बाद सरस्वती शिशु मंदिर प्रबंधन ने खुद को इससे अलग बताया है। प्रबंधन का कहना है कि उन्हें इस पूरे घटनाक्रम की कोई जानकारी नहीं थी। न उन्होंने किसी प्रकार की अनुमति दी और न ही किसी तरह का सहयोग किया।
यही दावा पूरे मामले को और ज्यादा गंभीर बना रहा है। यदि संबंधित संस्था को जानकारी नहीं थी तो फिर उसके नाम और कोड का उपयोग किस आधार पर किया गया। यह सवाल अब जांच का सबसे महत्वपूर्ण बिंदु बन गया है।

बिना मान्यता परीक्षा तक पहुंच कैसे?

मामले में सबसे बड़ा सवाल शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर उठ रहा है। यदि किसी स्कूल के पास वैध मान्यता नहीं थी तो फिर बोर्ड परीक्षा की प्रक्रिया तक उसकी पहुंच कैसे बनी। छात्रों का पंजीयन किस स्तर पर स्वीकृत हुआ। दस्तावेजों का सत्यापन किसने किया।

आम तौर पर परीक्षा पंजीयन प्रक्रिया में कई स्तरों पर जांच होती है। इसके बावजूद यदि कथित तौर पर दूसरे संस्थान के कोड पर परीक्षा प्रक्रिया पूरी हो गई तो यह केवल स्कूल की नहीं बल्कि निगरानी तंत्र की भी बड़ी विफलता मानी जाएगी।

अंकसूचियों में भी गड़बड़ी के आरोप

विवाद केवल UDISE Code तक सीमित नहीं है। शिकायत में विद्यार्थियों को जारी अंकसूचियों पर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि कई अंकसूचियों में आवश्यक जानकारियां ही मौजूद नहीं हैं।

बताया गया है कि दस्तावेजों में PEN नंबर दर्ज नहीं हैं। APAAR ID का उल्लेख नहीं है। संस्था प्रमुख के हस्ताक्षर नहीं हैं। कई अंकसूचियों पर सील मोहर भी नहीं मिली। ऐसे दस्तावेजों की वैधता को लेकर अब सवाल खड़े हो रहे हैं।

बच्चों के भविष्य पर मंडराया खतरा

शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि बोर्ड परीक्षा से जुड़े दस्तावेजों में किसी भी प्रकार की त्रुटि बच्चों के भविष्य पर सीधा असर डाल सकती है। आगे की कक्षाओं में प्रवेश, छात्रवृत्ति, शैक्षणिक सत्यापन और अन्य प्रक्रियाओं में ऐसे रिकॉर्ड महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

यदि जांच में दस्तावेजी अनियमितता साबित होती है तो इसका खामियाजा उन विद्यार्थियों को भुगतना पड़ सकता है जिनकी इसमें कोई गलती नहीं है। यही वजह है कि मामला अब केवल प्रशासनिक नहीं बल्कि संवेदनशील शैक्षणिक मुद्दा बन चुका है।

मंत्री तक पहुंची शिकायत

कार्रवाई में देरी से नाराज सरस्वती शिशु मंदिर प्रबंधन ने शिकायत को जिले से बाहर पहुंचा दिया है। मामला अब जिले के प्रभारी मंत्री और स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव तक पहुंच चुका है।

प्राचार्य प्रकाश यादव ने निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि शिक्षा व्यवस्था में इस तरह की अनियमितताओं को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। दोषियों पर सख्त कार्रवाई जरूरी है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों।

शिक्षा विभाग हरकत में

जिला शिक्षा अधिकारी प्रवास सिंह बघेल ने शिकायत मिलने की पुष्टि की है। उन्होंने विकासखंड शिक्षा अधिकारी को पूरे मामले की जांच कर रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों के अनुसार जांच रिपोर्ट मिलने के बाद आगे की कार्रवाई तय होगी। फिलहाल विभागीय स्तर पर दस्तावेजों और आरोपों की पड़ताल की जा रही है।

सवालों के घेरे में निगरानी तंत्र

इस विवाद ने शिक्षा विभाग की ऑनलाइन सत्यापन प्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। UDISE कोड, मान्यता, परीक्षा पंजीयन और अंकसूची जैसे महत्वपूर्ण रिकॉर्ड डिजिटल प्रणाली से जुड़े होते हैं।

इसके बावजूद यदि कथित अनियमितता हुई है तो यह जानना जरूरी होगा कि चूक कहां हुई। क्या सिस्टम में खामी थी। क्या दस्तावेजों का सत्यापन नहीं हुआ। या फिर कहीं जिम्मेदार अधिकारियों ने लापरवाही बरती।

अब जांच रिपोर्ट का इंतजार

डोंगरगढ़ का यह मामला अब पूरे जिले में चर्चा का विषय बना हुआ है। अभिभावकों के बीच चिंता है। शिक्षा जगत में सवाल हैं। विभाग पर दबाव बढ़ रहा है। अब सभी की निगाहें जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं। यदि आरोप सही साबित होते हैं तो यह मामला प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था में बड़ी लापरवाही का उदाहरण बन सकता है। सबसे बड़ा सवाल अभी भी वही है—आखिर दो साल तक कथित गड़बड़ी विभाग की नजरों से कैसे बची रही?

FAQ

  1. UDISE कोड क्या होता है?
    UDISE (Unified District Information System for Education) स्कूलों की पहचान के लिए जारी किया जाने वाला विशिष्ट कोड होता है। इसके आधार पर स्कूलों का रिकॉर्ड और शैक्षणिक डेटा दर्ज किया जाता है।
  2. इस मामले में मुख्य आरोप क्या है?
    आरोप है कि आदर्श पब्लिक स्कूल ने पांचवीं बोर्ड परीक्षा में छात्रों का पंजीयन कराने के लिए दूसरे स्कूल, सरस्वती शिशु मंदिर के UDISE कोड का उपयोग किया।
  3. प्रशासन ने UDISE कोड मामले में क्या कार्रवाई की है?
    जिला शिक्षा अधिकारी ने मामले की जांच के निर्देश दिए हैं। विकासखंड शिक्षा अधिकारी से रिपोर्ट मांगी गई है। रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी।

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