बच्चे कितना पढ़-समझ और गिन पा रहे, गणित और भाषा का होगा टेस्ट

Arun Tiwari | Jun 20, 2026, 17:28 IST
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छत्तीसगढ़ में चौथी के बच्चों का मूल्यांकन 2026
छत्तीसगढ़ में चौथी के बच्चों का मूल्यांकन 2026

छत्तीसगढ़ में प्राथमिक शिक्षा की गुणवत्ता और छात्रों की बुनियादी सीखने की क्षमता का आकलन करने के लिए विशेष डिजिटल अभियान चलाया जाएगा। इस दौरान कक्षा चौथी के करीब 3,000 विद्यार्थियों की गणितीय दक्षता और भाषा समझ का परीक्षण किया जाएगा।

छत्तीसगढ़ में प्राथमिक शिक्षा की गुणवत्ता और विद्यार्थियों की बुनियादी शिक्षा सीखने की क्षमता का मूल्यांकन करने के लिए 23 और 24 जून को विशेष आकलन अभियान चलाया जाएगा। इस दौरान कक्षा चौथी में पढ़ रहे विद्यार्थियों की गणितीय दक्षता और भाषा संबंधी समझ का परीक्षण किया जाएगा। आकलन का उद्देश्य यह जानना है कि बच्चे अपनी कक्षा के अनुरूप पढ़ने, समझने और गणना करने में कितने सक्षम हैं और राष्ट्रीय शिक्षा नीति के लक्ष्यों की दिशा में राज्य की प्रगति किस स्तर पर है।

250 स्कूलों का चयन:

इस मूल्यांकन के लिए राज्यभर के 250 स्कूलों का चयन किया गया है। इन स्कूलों से लगभग 3 हजार विद्यार्थियों का रैंडम चयन कर उनकी सीखने की क्षमता का परीक्षण किया जाएगा। इस बार आकलन की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और आधुनिक बनाने के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग किया जाएगा। पहले जहां इस प्रकार के सर्वेक्षण कागज और पेन के माध्यम से कराए जाते थे, वहीं अब टैबलेट आधारित डिजिटल प्रणाली से विद्यार्थियों का मूल्यांकन किया जाएगा।

राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) इस पूरी प्रक्रिया की तैयारी में जुटा हुआ है। अधिकारियों के अनुसार आकलन के नतीजों के आधार पर न केवल विद्यार्थियों की सीखने की स्थिति का विश्लेषण किया जाएगा, बल्कि राज्य की शैक्षणिक उपलब्धियों की रैंकिंग और भविष्य की शैक्षिक रणनीतियों को भी दिशा मिलेगी।

बुनियादी साक्षरता और संख्यात्मक ज्ञान पर रहेगा फोकस:

यह आकलन राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत निर्धारित बुनियादी साक्षरता एवं संख्यात्मक ज्ञान को ध्यान में रखकर किया जा रहा है। नीति के अनुसार प्रत्येक बच्चे को प्रारंभिक कक्षाओं में पढ़ने, लिखने और गणना करने की मूलभूत क्षमता विकसित करनी चाहिए। इसी उद्देश्य से कक्षा चौथी के विद्यार्थियों की भाषा और गणित संबंधी समझ का परीक्षण किया जाएगा।

मूल्यांकन में यह देखा जाएगा कि बच्चे शब्दों और वाक्यों को सही ढंग से पढ़ और समझ पा रहे हैं या नहीं। साथ ही उनकी गणितीय अवधारणाओं, संख्याओं की पहचान, जोड़-घटाव तथा तार्किक समझ का भी परीक्षण किया जाएगा। इससे यह स्पष्ट होगा कि विद्यार्थी अपनी कक्षा के स्तर के अनुरूप सीखने की क्षमता विकसित कर पाए हैं या नहीं।

इस प्रकार होगी परीक्षा:

आकलन के दौरान विद्यार्थियों को कई प्रकार की गतिविधियों और प्रश्नों से गुजरना होगा। बच्चों को अलग-अलग अक्षर और शब्द दिखाकर उनकी पहचान कराई जाएगी। उन्हें छोटे-छोटे शब्दों को तेजी से पढ़ने और सुनाने के लिए कहा जाएगा। इसके अलावा एक छोटी कहानी पढ़ने के लिए दी जाएगी, जिसमें वे प्रति मिनट लगभग 50 से 60 शब्द पढ़ सकें, इसका परीक्षण किया जाएगा।

गणित के हिस्से में विद्यार्थियों को 1 से 1000 तक की संख्याओं से संबंधित प्रश्न पूछे जाएंगे। बच्चों से संख्याओं की पहचान, बड़ी और छोटी संख्या का चयन, जोड़-घटाव की समझ तथा अन्य बुनियादी गणितीय अवधारणाओं से जुड़े सवाल किए जाएंगे। इससे उनकी संख्यात्मक क्षमता का आकलन किया जाएगा।

सीखने की खामियां पहचानने में मिलेगी मदद;

इस अध्ययन का एक प्रमुख उद्देश्य विद्यार्थियों के सीखने के स्तर का आकलन करने के साथ-साथ उन क्षेत्रों की पहचान करना भी है जहां उन्हें अतिरिक्त शैक्षणिक सहायता की आवश्यकता है। यदि किसी क्षेत्र या विद्यालय में बच्चों का प्रदर्शन अपेक्षित स्तर से कम पाया जाता है तो वहां विशेष शैक्षणिक हस्तक्षेप और सुधारात्मक कार्यक्रम चलाए जा सकेंगे।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार के आकलन से केवल परीक्षा परिणाम नहीं मिलते, बल्कि शिक्षा व्यवस्था की वास्तविक स्थिति का भी पता चलता है। इससे शिक्षकों, स्कूलों और नीति निर्माताओं को यह समझने में मदद मिलती है कि विद्यार्थियों की सीखने की प्रक्रिया को और बेहतर बनाने के लिए किन क्षेत्रों में काम करने की जरूरत है।

डिजिटल आकलन से बढ़ेगी पारदर्शिता:

वर्ष 2022 में इसी प्रकार का बेसलाइन आकलन ऑफलाइन माध्यम से किया गया था। इस बार डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए परीक्षण किए जाने से डेटा संग्रहण और विश्लेषण की प्रक्रिया अधिक तेज, सटीक और पारदर्शी होगी। साथ ही तकनीक के उपयोग से परिणामों की विश्वसनीयता भी बढ़ेगी।

शिक्षा विभाग को उम्मीद है कि इस आकलन से प्राप्त निष्कर्ष राज्य में प्राथमिक शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने और बच्चों को बेहतर सीखने का वातावरण उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। इसके आधार पर भविष्य में शिक्षा संबंधी योजनाओं और प्रशिक्षण कार्यक्रमों को भी नई दिशा दी जाएगी।

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