छत्तीसगढ़ में प्रॉपर्टी गिफ्ट करना पड़ेगा महंगा? जानें नया नियम

Umeshwari Baghel | Jun 20, 2026, 14:33 IST
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छत्तीसगढ़ में प्रॉपर्टी ट्रांसफर का नया नियम
छत्तीसगढ़ में प्रॉपर्टी ट्रांसफर का नया नियम

छत्तीसगढ़ में प्रॉपर्टी गिफ्ट और ट्रांसफर पर अब पूरा शुल्क लागू होगा। गिफ्ट डीड को भी सेल डीड की तरह माना जाएगा, जिसमें स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन फीस देनी होगी। रिश्तेदारों के बीच ट्रांसफर पर कुछ राहत मिल सकती है, लेकिन कानूनी प्रक्रिया जरूरी है।

समझें क्या है पूरा मामला

Raipur। छत्तीसगढ़ में प्रॉपर्टी गिफ्ट और ट्रांसफर को लेकर अब नियम और स्पष्ट हो गए हैं। लोगों में यह धारणा थी कि गिफ्ट डीड के जरिए संपत्ति ट्रांसफर करने पर कोई बड़ा शुल्क नहीं लगता, लेकिन यह पूरी तरह गलत है। गिफ्ट डीड को भी कानूनी रूप से एक पूर्ण रजिस्टर्ड ट्रांसफर दस्तावेज माना जाता है, जिस पर स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन फीस अनिवार्य रूप से लागू होती है।

गिफ्ट डीड पर भी लागू होगी स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन फीस

रायपुर के चार्टर्ड अकाउंटेंट चेतन तारवानी के अनुसार, प्रॉपर्टी ट्रांसफर के सभी माध्यम जैसे सेल डीड, गिफ्ट डीड, हक त्याग विलेख और बंटवारा विलेख पर अलग-अलग नियम लागू होते हैं। लेकिन गिफ्ट डीड कई मामलों में सेल डीड की तरह ही मानी जाती है।

इसी वजह से गिफ्ट डीड पर भी कई परिस्थितियों में करीब 6 प्रतिशत स्टांप ड्यूटी और 4 प्रतिशत रजिस्ट्रेशन शुल्क देना पड़ सकता है। इससे यह साफ होता है कि गिफ्ट के नाम पर होने वाला ट्रांसफर पूरी तरह शुल्क मुक्त नहीं होता।

रिश्तेदारों के बीच ट्रांसफर पर मिलती है राहत

स्टांप एक्ट के तहत कुछ नजदीकी रिश्तेदारों को गिफ्ट देने पर राहत का प्रावधान है। इनमें माता-पिता, पति-पत्नी, पुत्र, पुत्री, पोता-पोती, नाती-नातिन और सगे भाई-बहन शामिल हैं।

इन मामलों में स्टांप ड्यूटी काफी कम हो सकती है और कुछ स्थितियों में यह लगभग 1.5 प्रतिशत तक रह जाती है, जबकि रजिस्ट्रेशन शुल्क भी सीमित हो सकता है। इससे पारिवारिक संपत्ति हस्तांतरण अपेक्षाकृत आसान हो जाता है।

महिला को गिफ्ट देने पर भी लागू होंगे सामान्य नियम

यह धारणा भी गलत है कि महिलाओं को प्रॉपर्टी गिफ्ट करने पर हमेशा विशेष छूट मिलती है। नियमों के अनुसार छूट केवल रिश्ते की कानूनी परिभाषा पर निर्भर करती है, न कि लिंग पर।

यदि गिफ्ट नजदीकी रिश्तेदार को दिया जाता है तो राहत मिल सकती है, लेकिन यदि यह संबंध कानूनी दायरे से बाहर है तो पूरी स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन फीस लागू होती है।

इनकम टैक्स नियम और गिफ्ट पर असर

इनकम टैक्स नियमों के अनुसार गिफ्ट देने वाले व्यक्ति पर सामान्यतः कोई टैक्स नहीं लगता। लेकिन गिफ्ट प्राप्त करने वाले व्यक्ति पर स्थिति अलग हो सकती है।

अगर आपको किसी ऐसे व्यक्ति से प्रॉपर्टी या गिफ्ट मिलता है जो आपका नजदीकी रिश्तेदार नहीं है, और उसकी कीमत 50 हजार रुपए से ज्यादा है, तो उसे आपकी कमाई (Income) माना जाएगा और उस पर टैक्स देना होगा। वहीं दूसरी ओर, अगर आप अपने नजदीकी रिश्तेदारों के बीच कोई भी प्रॉपर्टी या गिफ्ट लेते-देते हैं, तो उस पर 1 रुपए का भी टैक्स नहीं लगता वह पूरी तरह टैक्स फ्री होता है।

रिश्तेदारों की व्यापक कानूनी परिभाषा

इनकम टैक्स कानून में रिश्तेदारों की परिभाषा काफी विस्तृत है। इसमें पति या पत्नी के भाई-बहन, माता-पिता के भाई-बहन, जीवनसाथी के रिश्तेदार और तीन पीढ़ी ऊपर-नीचे तक के परिवार के सदस्य शामिल होते हैं।

इस परिभाषा का उद्देश्य पारिवारिक संपत्ति हस्तांतरण को आसान और टैक्स फ्रेंडली बनाना है, बशर्ते प्रक्रिया कानूनी रूप से पूरी की गई हो।

गिफ्ट डीड और वसीयतनामा में फर्क

विशेषज्ञों के अनुसार गिफ्ट डीड एक स्थायी ट्रांसफर होता है, जिसे बाद में वापस लेना मुश्किल होता है। इसलिए इसे बहुत सोच-समझकर करना चाहिए।

यदि माता-पिता अपनी संपत्ति जीवनकाल तक अपने नियंत्रण में रखना चाहते हैं तो वसीयतनामा यानी विल बेहतर विकल्प माना जाता है। जबकि तुरंत और स्थायी ट्रांसफर के लिए गिफ्ट डीड का उपयोग किया जाता है।

IMP FACTS

छत्तीसगढ़ में गिफ्ट डीड से प्रॉपर्टी ट्रांसफर पूरी तरह फ्री नहीं है।

इस पर भी स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन फीस लग सकती है।

कई मामलों में यह सेल डीड जैसा माना जाता है।

केवल नजदीकी रिश्तेदारों को गिफ्ट देने पर कुछ राहत मिलती है।

गलत प्रक्रिया अपनाने पर आगे चलकर कानूनी विवाद हो सकता है।

क्या होता है गिफ्ट डीड

गिफ्ट डीड (Gift Deed) एक ऐसा कानूनी दस्तावेज होता है जिसके जरिए कोई व्यक्ति अपनी चल या अचल संपत्ति (जैसे जमीन, मकान या पैसे) किसी दूसरे व्यक्ति को बिना किसी आर्थिक लेन-देन यानी पूरी तरह मुफ्त में कानूनी तौर पर सौंपता है। इसे स्टांप पेपर पर लिखित रूप में तैयार किया जाता है और सब-रजिस्ट्रार ऑफिस में इसका रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य होता है, जिसके बाद संपत्ति पाने वाले को उसका मालिकाना हक मिल जाता है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि एक बार गिफ्ट डीड रजिस्टर्ड होने के बाद संपत्ति देने वाला व्यक्ति इसे न तो वापस ले सकता है और न ही निरस्त (कैंसल) कर सकता है, यानी यह एक स्थायी ट्रांसफर होता है।

निष्कर्ष

छत्तीसगढ़ में प्रॉपर्टी गिफ्ट और ट्रांसफर के नियम से यह साफ हैं कि कोई भी संपत्ति हस्तांतरण बिना शुल्क या कानूनी प्रक्रिया के पूरा नहीं होता। सही दस्तावेज और कानूनी सलाह के बिना किए गए ट्रांसफर भविष्य में विवाद और आर्थिक नुकसान का कारण बन सकते हैं।

FAQ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

  1. क्या गिफ्ट डीड से प्रॉपर्टी ट्रांसफर पर कोई शुल्क नहीं लगता?
    नहीं, यह धारणा गलत है। गिफ्ट डीड को भी कानूनी रूप से रजिस्टर्ड दस्तावेज माना जाता है। इस पर स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन फीस देना अनिवार्य होता है। कई मामलों में यह शुल्क सेल डीड के बराबर भी हो सकता है।
  2. क्या रिश्तेदारों को गिफ्ट देने पर कोई छूट मिलती है?
    हां, कुछ नजदीकी रिश्तेदारों जैसे माता-पिता, पति-पत्नी, पुत्र-पुत्री, भाई-बहन आदि को गिफ्ट देने पर स्टांप ड्यूटी में राहत मिलती है। हालांकि यह छूट पूरी तरह नियमों और रिश्ते की श्रेणी पर निर्भर करती है, हर केस में अलग स्थिति हो सकती है।
  3. क्या गिफ्ट डीड को बाद में बदला या वापस लिया जा सकता है?
    नहीं, एक बार गिफ्ट डीड रजिस्टर्ड हो जाने के बाद उसे वापस लेना या बदलना बहुत मुश्किल होता है। इसलिए इसे करने से पहले पूरी तरह सोच-समझकर और कानूनी सलाह लेकर ही प्रक्रिया अपनानी चाहिए, ताकि आगे चलकर किसी विवाद या परेशानी से बचा जा सके।

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