PM मोदी ने जिस रेलवे ट्रैक का शुभारंभ किया उसकी पटरी 20 दिन में ही धंसक गई
Kanak Durga Jha | Apr 26, 2025, 13:01 IST
railway track inaugurated by PM Modi collapsed within 20 days the sootr
नवा रायपुर-अभनपुर रेललाइन का निर्माण पूरा होने के बाद ट्रेन भी दौड़ने लगी है। बकतास (अभनपुर) अंडरब्रिज के पास दोनों तरफ बनाई गई बोल्डर पिचिंग बिना बारिश के धंसक गई।
नवा रायपुर-अभनपुर रेललाइन का निर्माण पूरा होने के बाद ट्रेन भी दौड़ने लगी है। बकतास (अभनपुर) अंडरब्रिज के पास दोनों तरफ बनाई गई बोल्डर पिचिंग बिना बारिश के धंसक गई। बोल्डर पिचिंग का काम अंतिम छोर और कार्नर में किया जाता है, ताकि मिट्टी का कटाव न हो।
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कॉर्नर से मिट्टी का कटाव होने से पटरी के धंसकने का खतरा बना रहता है। केंद्रीय रेलवे स्टेशन से अभनपुर तक जितनी जगह पर बोल्डर पिचिंग हुई, वह निर्धारित मापदंडों के विपरीत है। बोल्डर पिचिंग के दौरान पानी निकासी के लिए छोटे-छोटे पाइप डाले जाते हैं, ताकि बारिश का पानी बाहर आ सकें, लेकिन बोल्डर पिचिंग में पाइप नहीं डाला गया है।
30 मार्च को प्रधानमंत्री ने दिखाई थी हरी डांडी 30 मार्च को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इस रूट में ट्रेन का शुभारंभ किया था। इसके बाद प्रतिदिन ट्रेन दो फेरे ले रही है। इसके पहले नवा रायपुर से अभनपुर और अभनपुर से राजिम के बीच रेलवे ट्रैक की जांच 22 मार्च को रेलवे के सुरक्षा आयुक्त ने की थी। उन्होंने रायपुर स्टेशन से अभनपुर के बीच 110 किमी प्रति घंटे की स्पीड से आब्जर्वेशन कार से ट्रायल लिया।
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आयुक्त से हरी झंडी के बाद नई रेल लाइन पर सवारी और मालगाड़ियों का आना-जाना शुरू हुआ है। इसलिए हुआ कटाव बता दें कि रेलवे ने पूरा काम सुभाष अग्रवाल नाम के ठेकेदार को दिया था। ठेकेदार ने पटरी बिछाने के लिए जो फाउंडेशन तैयार किया था, उसका कंपेक्शन सही तरीके से नहीं किया गया। निरीक्षण करने वाले इंजीनियरों ने भी बड़ी लापरवाही की है।
नियम यह है कि 250 से पांच सौ एमएम की लेयर में रोलिंग ग्रेडिंग करने के बाद कंपेक्शन किया जाता है। रेलवे के इंजीनियरों द्वारा भार क्षमता का निरीक्षण किया जाता है। इसके बाद ही उसके बाद दूसरी लेयर में भी यही प्रक्रिया की जाती है। ऐसे यह प्रक्रिया ऊंचाई के अनुसार दोहराई जाती है, लेकिन ऐसी स्थिति तब बनती है, जब एक से दो लेयर में ही तीन से चार मीटर का बेस तैयार कर दिया गया है, जिससे बारिश में पटरी के बह जाने खतरा बना हुआ है।
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कॉर्नर से मिट्टी का कटाव होने से पटरी के धंसकने का खतरा बना रहता है। केंद्रीय रेलवे स्टेशन से अभनपुर तक जितनी जगह पर बोल्डर पिचिंग हुई, वह निर्धारित मापदंडों के विपरीत है। बोल्डर पिचिंग के दौरान पानी निकासी के लिए छोटे-छोटे पाइप डाले जाते हैं, ताकि बारिश का पानी बाहर आ सकें, लेकिन बोल्डर पिचिंग में पाइप नहीं डाला गया है।
पीएम मोदी ने किया था ट्रेन का शुभारंभ
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आयुक्त से हरी झंडी के बाद नई रेल लाइन पर सवारी और मालगाड़ियों का आना-जाना शुरू हुआ है। इसलिए हुआ कटाव बता दें कि रेलवे ने पूरा काम सुभाष अग्रवाल नाम के ठेकेदार को दिया था। ठेकेदार ने पटरी बिछाने के लिए जो फाउंडेशन तैयार किया था, उसका कंपेक्शन सही तरीके से नहीं किया गया। निरीक्षण करने वाले इंजीनियरों ने भी बड़ी लापरवाही की है।
नियम यह है कि 250 से पांच सौ एमएम की लेयर में रोलिंग ग्रेडिंग करने के बाद कंपेक्शन किया जाता है। रेलवे के इंजीनियरों द्वारा भार क्षमता का निरीक्षण किया जाता है। इसके बाद ही उसके बाद दूसरी लेयर में भी यही प्रक्रिया की जाती है। ऐसे यह प्रक्रिया ऊंचाई के अनुसार दोहराई जाती है, लेकिन ऐसी स्थिति तब बनती है, जब एक से दो लेयर में ही तीन से चार मीटर का बेस तैयार कर दिया गया है, जिससे बारिश में पटरी के बह जाने खतरा बना हुआ है।
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FAQ
- बकतास (अभनपुर) अंडरब्रिज के पास बोल्डर पिचिंग के धंसने का कारण क्या है?
बकतास अंडरब्रिज के पास बोल्डर पिचिंग बिना बारिश के इसलिए धंस गई क्योंकि निर्माण के दौरान निर्धारित मापदंडों का पालन नहीं किया गया, पानी निकासी के लिए पाइप नहीं डाले गए और फाउंडेशन का कंपेक्शन भी ठीक से नहीं किया गया। - नवा रायपुर-अभनपुर रेललाइन पर ट्रेन सेवा की शुरुआत कब हुई और किसने हरी झंडी दिखाई?
नवा रायपुर-अभनपुर रेललाइन पर ट्रेन सेवा की शुरुआत 30 मार्च को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने हरी झंडी दिखाकर की थी। - रेलवे लाइन के कमजोर फाउंडेशन के लिए जिम्मेदार कौन है और निरीक्षण में क्या लापरवाही हुई?
रेलवे लाइन के कमजोर फाउंडेशन के लिए ठेकेदार सुभाष अग्रवाल और निरीक्षण करने वाले इंजीनियर जिम्मेदार हैं, क्योंकि उन्होंने कंपेक्शन प्रक्रिया सही तरीके से नहीं की और आवश्यक लेयरिंग नियमों का पालन नहीं किया।
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