₹150 का डस्टबिन ₹235 में! रायपुर निगम की 3 करोड़ 77 लाख की खरीद पर उठे सवाल
राजधानी रायपुर में नगर निगम द्वारा 1.60 लाख डस्टबिन की खरीद को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। निगम ने शहर की 70 वार्डों की बस्तियों में कचरा पृथक्करण को बढ़ावा देने के लिए करोड़ों रूपए खर्च कर डस्टबिन खरीदे हैं, लेकिन बाजार दर और खरीदी गई कीमत में अंतर सामने आने के बाद इस खरीद प्रक्रिया पर सवाल उठने लगे हैं।
जानकारी के अनुसार नगर निगम ने 12 लीटर क्षमता वाले 1.60 लाख डस्टबिन करीब 235.80 रूपए प्रति नग की दर से खरीदे हैं। इस खरीद पर कुल 3.77 करोड़ रूपए खर्च किए गए हैं। वहीं स्थानीय बाजार में इसी क्षमता के डस्टबिन 190 से 200 रूपए, और थोक कीमत लगभग 150 से 160 रूपए तक में उपलब्ध होने का दावा किया जा रहा है।
70 वार्डों की बस्तियों में बांटे जाएंगे डस्टबिन
नगर निगम की योजना के तहत शहर की बस्तियों में रहने वाले परिवारों को डस्टबिन वितरित किए जाएंगे, ताकि घरों से निकलने वाले गीले और सूखे कचरे का पृथक्करण किया जा सके। निगम का दावा है कि इससे स्वच्छता व्यवस्था मजबूत होगी और कचरा प्रबंधन में सुधार आएगा।
प्रत्येक वार्ड में बस्तियों की संख्या के अनुसार लगभग 2,000 से 2,500 डस्टबिन वितरित किए जाने हैं। डस्टबिन निगम के गोदामों में पहुंच चुके हैं और जल्द वितरण शुरू किया जाएगा।
बाजार भाव से ज्यादा कीमत पर खरीद का आरोप
खरीद प्रक्रिया पर सवाल तब उठे जब स्थानीय व्यापारियों ने दावा किया कि 12 लीटर क्षमता वाले समान गुणवत्ता के डस्टबिन खुदरा बाजार में 190 से 200 रूपए में आसानी से मिल जाते हैं। उनका कहना है कि यदि बड़ी मात्रा में थोक खरीद की जाए तो कीमत और कम हो सकती है।
व्यापारियों का तर्क है कि सामान्य तौर पर थोक खरीद में कीमत घटती है, लेकिन यहां बड़ी संख्या में खरीद के बावजूद दर बाजार मूल्य से अधिक दिखाई दे रही है।
थोक बाजार ने क्या कहा?
बंजारी रोड स्थित एक थोक विक्रेता ने बताया कि 12 लीटर क्षमता वाले डस्टबिन की थोक कीमत लगभग 150 से 160 रूपए तक हो सकती है। वहीं एक अन्य विक्रेता ने खुदरा मूल्य 210 रूपए बताया, लेकिन 200 रूपए में डस्टबिन उपलब्ध कराने की बात भी कही।
व्यापारियों का कहना है कि यदि लाखों की संख्या में ऑर्डर दिया जाए तो कीमत में और कमी संभव है।
जेम पोर्टल के जरिए हुई खरीद
नगर निगम ने यह खरीद सरकारी ई-मार्केटप्लेस (GeM Portal) के माध्यम से की है। निगम के अनुसार निविदा प्रक्रिया में 17 कंपनियों ने हिस्सा लिया था। तकनीकी परीक्षण के बाद चार कंपनियों को पात्र माना गया और उन्हें सप्लाई का कार्य सौंपा गया।
निगम ने अलग-अलग कंपनियों को डस्टबिन आपूर्ति के लिए आदेश जारी किए हैं। कुल 1.60 लाख डस्टबिन की खरीद पर लगभग 3.77 करोड़ रूपए खर्च किए गए हैं।
चार कंपनियों को मिला ऑर्डर
तकनीकी मूल्यांकन के बाद चार कंपनियों को आपूर्ति का कार्य दिया गया। इनमें विभिन्न कंपनियों को अलग-अलग संख्या में डस्टबिन सप्लाई करने के आदेश जारी किए गए हैं। निगम का कहना है कि पूरी प्रक्रिया निर्धारित नियमों और ऑनलाइन टेंडर प्रणाली के तहत की गई है।
निगम का पक्ष
नगर निगम (Raipur Municipal Corporation) के आयुक्त विश्वदीप मिश्रा ने खरीद प्रक्रिया का बचाव करते हुए कहा कि GeM पोर्टल पर नियमों के अनुसार ऑनलाइन बोली के आधार पर निविदा प्रक्रिया पूरी की गई है। तकनीकी परीक्षण के बाद सबसे उपयुक्त प्रस्तावों को चयनित किया गया।
उन्होंने कहा कि यदि किसी प्रकार की शिकायत या आपत्ति सामने आती है तो उसकी जांच कराई जाएगी। निगम के मुताबिक खरीद प्रक्रिया में किसी प्रकार का पक्षपात नहीं किया गया है और पूरी प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से संपन्न हुई है।
विपक्ष को मिला मुद्दा
बाजार कीमत और निगम की खरीदी दर में अंतर सामने आने के बाद यह मामला राजनीतिक रूप भी ले सकता है। विपक्षी दल इस खरीद की जांच की मांग उठा सकते हैं। दूसरी ओर निगम का दावा है कि पूरी खरीद प्रक्रिया नियमों के अनुरूप और GeM पोर्टल के माध्यम से हुई है।
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