चमत्कार के नाम पर डॉक्टर से 25 लाख की ठगी, हाईकोर्ट ने ठुकराई पंडित की याचिका

Harrison Masih | Jul 29, 2026, 16:47 IST
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पंडित नरेंद्र नयन शास्त्री की याचिका ख़ारिज
पंडित नरेंद्र नयन शास्त्री की याचिका ख़ारिज

रायपुर में MBBS डॉक्टर से 25 लाख की कथित ठगी के मामले में आरोपी पंडित को हाईकोर्ट से राहत नहीं मिली। कोर्ट ने एफआईआर रद्द करने की याचिका खारिज करते हुए कहा कि मामले की जांच जारी रहेगी।

समझें क्या है पूरा मामला

पंडित नरेंद्र नयन शास्त्री उर्फ नरेंद्र शर्मा को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट से राहत नहीं मिली। पंडित पर दैवीय और आध्यात्मिक शक्तियों के जरिए पारिवारिक समस्याएं दूर करने के नाम पर एक MBBS डॉक्टर से 25 लाख 10 हजार रुपए ठगी का आरोप है। हाईकोर्ट ने उसके खिलाफ दर्ज एफआईआर रद्द करने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी है। यह मामला रायपुर के खमहारडीह थाने में दर्ज एफआईआर से जुड़ा है।

चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच में इस याचिका की सुनवाई हुई। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि एफआईआर के आरोपों को प्रथम दृष्टया देखने पर संज्ञेय अपराध बनता है।

बेंच के मुताबिक ऐसी स्थिति में पुलिस की जांच में इस स्तर पर हस्तक्षेप करना उचित नहीं होगा। इसी आधार पर याचिका खारिज कर दी गई।

भाई की मौत के बाद हुई पहचान

गाजियाबाद निवासी डॉ. ऋषभ चौबे के छोटे भाई की 11 अगस्त 2024 को सड़क हादसे में मौत हो गई थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट से मौत का स्पष्ट कारण सामने नहीं आने के बाद डॉक्टर काफी परेशान थे।

इसी दौरान उनकी पहचान किसी अन्य व्यक्ति के जरिए पंडित नरेंद्र नयन शास्त्री से हुई। डॉक्टर का आरोप है कि शास्त्री ने खुद के पास दैवीय और अलौकिक शक्तियां होने का दावा किया।

अनुष्ठान के नाम पर होती रही मांग

शिकायत के मुताबिक शास्त्री ने अनुष्ठान के जरिए परिवार की समस्याएं दूर करने का भरोसा दिलाया। अक्टूबर 2024 से मई 2025 के बीच अनुष्ठान कराने के नाम पर पहली बार 51 हजार रुपए लिए गए।

इसके बाद आरोपी के कहने पर डॉक्टर ने रायपुर, नोएडा और इंदौर समेत विभिन्न शहरों की 30 से ज्यादा यात्राएं कीं। इस दौरान आरोपी के बताए बैंक खातों में ऑनलाइन और नकद मिलाकर कुल 25 लाख 10 हजार रुपए दिए जाने का आरोप है।

धमकी मिलने पर दर्ज कराई गई FIR

लंबे समय तक कोई परिणाम नहीं मिलने पर डॉक्टर ने रकम वापस करने या अनुष्ठान पूरा करने की मांग की। आरोप है कि इसके बाद आरोपी ने फोन उठाना बंद कर दिया।

बाद में उसने 51 हजार रुपए और देने की मांग की और राशि न देने पर परिवार के साथ अनिष्ट की धमकी दी। इसी शिकायत पर 4 जुलाई 2026 को खमहारडीह थाने में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4) के तहत अपराध दर्ज किया गया।

बचाव में कहा गया, स्वेच्छा से दिया था दान

एफआईआर निरस्त कराने हाईकोर्ट पहुंचे नरेंद्र नयन शास्त्री की तरफ से पैरवी करते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता टीके झा ने कहा कि डॉक्टर अपनी इच्छा से आध्यात्मिक मार्गदर्शन के लिए उनके पास आए थे।

अधिवक्ता के मुताबिक दी गई रकम स्वैच्छिक दान थी, जिसे धोखाधड़ी नहीं कहा जा सकता। उन्होंने यह भी दलील दी कि एक पढ़े-लिखे MBBS डॉक्टर का करीब 21 महीने तक बिना ठोस परिणाम के रकम देते रहना स्वाभाविक नहीं लगता। बचाव पक्ष ने एफआईआर दर्ज कराने में देरी और राजनीतिक प्रभाव के आरोप भी लगाए।

हाईकोर्ट बोला, जांच में सामने आएगी सच्चाई

डिवीजन बेंच ने कहा कि रकम स्वैच्छिक दान थी या झांसा देकर ली गई, एफआईआर में देरी क्यों हुई और आरोपों की वास्तविकता क्या है, इन सभी सवालों का परीक्षण जांच और ट्रायल के दौरान सबूतों के आधार पर ही होगा।

कोर्ट के मुताबिक इस स्तर पर इन सवालों का जवाब देना जल्दबाजी होगी।

हाईकोर्ट नहीं कर सकता मिनी ट्रायल

डिवीजन बेंच ने सुप्रीम कोर्ट के नीहारिका इंफ्रास्ट्रक्चर और प्रदीप कुमार केशरवानी मामलों के फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि एफआईआर के स्तर पर हाईकोर्ट सबूतों की विस्तृत जांच कर मिनी ट्रायल नहीं कर सकता।

कोर्ट ने कहा कि एफआईआर में लगाए गए आरोपों को उनके मूल रूप में देखने पर संज्ञेय अपराध के तत्व नजर आते हैं। इसलिए पुलिस को कानून के मुताबिक स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच करने का मौका दिया जाना जरूरी है। हाईकोर्ट ने एफआईआर रद्द करने की याचिका खारिज करते हुए जांच जारी रखने का रास्ता साफ कर दिया है।

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