एनटीपीसी और अडानी पॉवर की मनमानी पर पर्यावरण विभाग मौन, गांव वालों से मांगे जा रहे सबूत

VINAY VERMA | May 22, 2026, 14:06 IST
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रायपुर के दोन्देकला में एनटीपीसी और अडानी पावर द्वारा अवैध फ्लाई ऐश डंपिंग से हवा-पानी प्रदूषित हो रहा है। प्रशासन की सुस्ती के कारण ग्रामीणों में बीमारियाँ और हादसे बढ़ रहे हैं।

NEWS IN SHORT

  • दोन्देकला में बंद खदानों में हो रही अवैध फ्लाई ऐश डंपिंग
  • एनटीपीसी सीपत और अडानी पॉवर रायखेड़ा से लाई जा रही राखड़
  • प्रदूषित पानी और हवा से ग्रामीणों में बढ़ रही बीमारियां
  • NH-130 पर उड़ती राखड़ से हादसों का खतरा बढ़ा
  • ग्रामीणों के विरोध के बाद भी प्रशासनिक कार्रवाई बेहद धीमी

NEWS IN DETAIL

राजधानी रायपुर अब धीरे-धीरे अवैध फ्लाई ऐश डंपिंग यार्ड में तब्दील होता जा रहा है। हैरानी की बात यह है कि देश की बड़ी कंपनियों NTPC और Adani Power से निकलने वाली औद्योगिक राखड़ खुलेआम राजधानी के आसपास डंप की जा रही है, लेकिन जिम्मेदार विभागों को इसकी भनक तक नहीं है। स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि रोजाना सैकड़ों टन फ्लाई ऐश रायपुर पहुंच रही है, फिर भी पर्यावरण विभाग कार्रवाई के बजाय शिकायतकर्ताओं से ही सबूत मांग रहा है। मजबूर ग्रामीण अब खुद पटवारी के साथ ट्रकों का पंचनामा तैयार कर रहे हैं ताकि प्रशासन को प्रमाण सौंपा जा सके।

दोन्देकला बना फ्लाई ऐश डंपिंग का केंद्र

रायपुर-बलौदाबाजार मुख्य मार्ग पर ग्राम पंचायत दोन्देकला स्थित हैं। मुख्य मार्ग पर होना ही इसके लिए खतरा साबित हो रहा है। आसानी से पहुंच होने के कारण यहां सीपत से NTPC और रायखेड़ा से ADANI POWER अपना फ्लाई ऐश अवैध तरीके से यहां डंप कर रही है। अवैध डंपिंग से ग्रामीण परेशान हैं। आरोप है कि हाइवा और भारी ट्रकों से लाई जा रही राखड़ खुले में उड़ रही है, जिससे पूरे इलाके में प्रदूषण का स्तर तेजी से बढ़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि गांव की हवा जहरीली हो चुकी है और लोग रोज बीमार पड़ रहे हैं।

पानी और हवा दोनों हो रहे प्रदूषित

स्थानीय लोगों के मुताबिक जिन खदानों में फ्लाई ऐश डाली जा रही है, वहां पहले से पानी भरा हुआ है। राखड़ पानी में मिलकर आसपास के जलस्रोतों को दूषित कर रही है। यही पानी गांवों में उपयोग हो रहा है, जिससे लोगों में त्वचा रोग, सांस की बीमारी और आंखों में जलन जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं। दूसरी ओर राखड़ के महीन कण हवा में उड़कर खेतों और घरों तक पहुंच रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि उद्योगों के मुनाफे के लिए गांव वालों की जिंदगी दांव पर लगा दी गई है।

हाईवे पर उड़ती राखड़ बन रही जानलेवा

स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि NH-130 मुख्य मार्ग पर भी इसका असर साफ दिखाई दे रहा है। सड़क किनारे खदानों में डंप की जा रही फ्लाई ऐश गांव तक पहुंच रही है। सड़कों पर उड़ती ऐश के कारण 50 मीटर के बाद कुछ दिखाई नहीं देता है। गाडी चलाते समय ऐश आंखों में चला जाता है। इस वजह से एक्सीडंेट होने लगे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है।

ग्रामीणों ने किया विरोध,

ग्रामीणों की मांग पर पर्यावरण संरक्षण से जुड़े कार्यकर्ता सहित ग्रामीण विरोध कर रहे हैं। तहसीलदार, खनिज विभाग और पर्यावरण विभाग के अधिकारियों को मौके पर बुलाकर कार्रवाई की मांग की गई। तहसीलदार के निर्देश पर पटवारी ने श्रीनिवास ट्रांसपोर्ट मोवा, सुमित ठाकुर निवासी चिचोली और हर्षदीप ट्रांसपोर्ट से जुड़े लोगों के खिलाफ पंचनामा कार्रवाई की है। बड़े विरोध को देखते हुए पंचनामा तो बनवा लिया लेकिन कार्रवाई नहीं हुई।

नियमों की खुलेआम उड़ रही धज्जियां

पर्यावरण संगठन से जुड़े सूरज टंडन ने कहा कि केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की 28 अगस्त 2019 की गाइडलाइन के अनुसार फ्लाई ऐश का परिवहन केवल टैंकर, बल्कर या मैकेनिकली कवर ट्रकों से किया जाना चाहिए। साथ ही डंपिंग स्थल पर धूल नियंत्रण, पानी का छिड़काव और वृक्षारोपण जैसी व्यवस्थाएं अनिवार्य हैं। लेकिन दोन्देकला में इन नियमों का खुला उल्लंघन हो रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि कंपनियां प्रशासन को ठेंगा दिखाकर मनमाने तरीके से राखड़ डंपिंग कर रही हैं।

प्रशासन से तत्काल रोक लगाने की मांग

स्थानीय ग्रामीण प्रशासन से सवाल पूछ रहे हैं कि क्या स्वास्थ्य और सुरक्षा से बड़ा कोई मुद्दा है? प्रशासन से तत्काल अवैध फ्लाई ऐश डंपिंग पर रोक लगाते हुए जिम्मेदार कंपनियों पर क्यों नहीं कार्रवाई कर रही है। माना कि जमीन शासकीय है, लेकिन आता तो गांव के अंदर ही है। ऐसे में प्रशासन उनसे बिना पूछे कैसे इस तरह के फैसले ले सकता है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो बड़ा आंदोलन किया जाएगा।

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