उल्लू रेस्क्यू की लाइव रिपोर्ट ! घायल पक्षी 24 घंटे बिना खाना, इलाज को तरसा
VINAY VERMA | Jul 20, 2026, 15:52 IST
उल्लू रेस्क्यू की लाइव रिपोर्ट
रायपुर में घायल उल्लू 24 घंटे इलाज को तरसता रहा। पर्यावरण प्रेमियों के बचाने के बाद वन विभाग अधिकारी इलाज के बजाय फोटो खिंचवाते रहे। सेंघ की नाराजगी के 24 घंटे बाद उसकां इलाज शुरू हुआ।
क्या है पूरा मामला
मुख्यालय से प्वाइंट, फिर भी मनमानी
सुबह से शाम तक सिर्फ इंतजार
पहले फोटो, फिर इलाज की बात
डॉक्टर को सूचना तक नहीं
तस्करी के लगातार मामले
सादे पेज पर पावती
फोन बंद, जवाब बंद... सवाल बाकी’
5 बड़े सवाल
- भारत में उल्लू की तस्करी क्यों होती है और वन्यजीव संरक्षण कानून के तहत इसे क्या सुरक्षा प्राप्त है?
भारत में उल्लू की तस्करी मुख्य रूप से अंधविश्वास, तंत्र-मंत्र, और अवैध व्यापार के लिए की जाती है। भारत में पाई जाने वाली उल्लू की सभी प्रजातियाँ भारतीय वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 (Wildlife Protection Act, 1972) के तहत संरक्षित हैं, जिसके तहत इनका शिकार, पकड़ना या व्यापार करना पूरी तरह से गैर-कानूनी और दंडनीय अपराध है। - छत्तीसगढ़ का प्रसिद्ध 'जंगल सफारी' कहाँ स्थित है?
छत्तीसगढ़ का जंगल सफारी नवा रायपुर (अटल नगर) में स्थित है। यह एशिया की सबसे बड़ी मानव निर्मित (Man-made) सफारियों में से एक है और इसका आधिकारिक नाम 'जंगल सफारी' है। - अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लुप्तप्राय जीवों के व्यापार को रोकने के लिए कौन सा समझौता लागू है?
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वन्यजीवों और पक्षियों (जैसे उल्लू) के अवैध व्यापार को रोकने के लिए CITES (Convention on International Trade in Endangered Species of Wild Fauna and Flora) नाम की वैश्विक संधि लागू है, भारत भी जिसका एक हस्ताक्षरकर्ता सदस्य देश है।
- भारत में उल्लू की तस्करी क्यों होती है और वन्यजीव संरक्षण कानून के तहत इसे क्या सुरक्षा प्राप्त है?
भारत में उल्लू की तस्करी मुख्य रूप से अंधविश्वास, तंत्र-मंत्र, और अवैध व्यापार के लिए की जाती है। भारत में पाई जाने वाली उल्लू की सभी प्रजातियाँ भारतीय वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 (Wildlife Protection Act, 1972) के तहत संरक्षित हैं, जिसके तहत इनका शिकार, पकड़ना या व्यापार करना पूरी तरह से गैर-कानूनी और दंडनीय अपराध है। - छत्तीसगढ़ का प्रसिद्ध 'जंगल सफारी' कहाँ स्थित है?
छत्तीसगढ़ का जंगल सफारी नवा रायपुर (अटल नगर) में स्थित है। यह एशिया की सबसे बड़ी मानव निर्मित (Man-made) सफारियों में से एक है और इसका आधिकारिक नाम 'जंगल सफारी' है। - अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लुप्तप्राय जीवों के व्यापार को रोकने के लिए कौन सा समझौता लागू है?
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वन्यजीवों और पक्षियों (जैसे उल्लू) के अवैध व्यापार को रोकने के लिए CITES (Convention on International Trade in Endangered Species of Wild Fauna and Flora) नाम की वैश्विक संधि लागू है, भारत भी जिसका एक हस्ताक्षरकर्ता सदस्य देश है।
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