डस्टबिन लेने में करोड़ों के घोटाले का आरोप, 150 की चीज़ 250 में खरीदी
Arun Tiwari | Jun 29, 2026, 19:53 IST
डस्टबिन खरीदी में करोड़ों के घोटाले का आरोप
रायपुर नगर निगम की डस्टबिन खरीदी पर कांग्रेस ने गड़बड़ी का आरोप लगाया है। दावा है कि 12 लीटर का डस्टबिन करीब 235.80 रुपए में खरीदा गया, जबकि थोक बाजार में इसकी कीमत 140 से 150 रुपए है।
Raipur : छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर नगर निगम की डस्टबिन खरीदी को लेकर सियासत गरमा गई है। प्रदेश कांग्रेस ने नगर निगम पर बाजार कीमत से अधिक दर पर डस्टबिन खरीदने का आरोप लगाते हुए पूरे मामले की स्वतंत्र जांच की मांग की है। कांग्रेस का कहना है कि स्वच्छता के नाम पर जनता के टैक्स के पैसे की खुली बर्बादी की गई है और यदि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो जाए तो बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितता सामने आ सकती है।
कांग्रेस प्रवक्ता सत्यप्रकाश सिंह ने कहा कि नगर निगम द्वारा 12 लीटर क्षमता वाले डस्टबिन की खरीदी जिस दर पर की गई है, वह कई सवाल खड़े करती है। उनके अनुसार निगम ने प्रत्येक डस्टबिन लगभग 235.80 रुपए की दर से खरीदा, जबकि यही डस्टबिन खुदरा बाजार में 190 से 200 रुपए के बीच आसानी से उपलब्ध है। इतना ही नहीं, थोक बाजार में इसकी कीमत 140 से 150 रुपए प्रति नग बताई जा रही है। ऐसे में प्रति डस्टबिन 80 से 90 रुपए तक का अंतर यह संकेत देता है कि खरीदी प्रक्रिया में गंभीर अनियमितता हुई है।
मामला सिर्फ एक-दो डस्टबिन का नहीं है। नगर निगम ने करीब 1.60 लाख डस्टबिन खरीदने की प्रक्रिया अपनाई है। इतनी बड़ी संख्या में खरीदी होने के कारण प्रति डस्टबिन की कीमत में मामूली अंतर भी लाखों और करोड़ों रुपए के अतिरिक्त भुगतान में बदल जाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि यदि थोक बाजार की दरों को आधार माना जाए तो जनता के करोड़ों रुपए अनावश्यक रूप से खर्च किए गए हैं।
कांग्रेस ने कहा कि सरकार और नगर निगम प्रशासन को यह स्पष्ट करना चाहिए कि जब बाजार में कम कीमत पर वही गुणवत्ता वाला सामान उपलब्ध था तो अधिक दर पर खरीदी क्यों की गई। क्या इसके लिए प्रतिस्पर्धात्मक निविदा प्रक्रिया अपनाई गई थी? क्या बाजार दरों का स्वतंत्र मूल्यांकन कराया गया था? और आखिर ऐसी कौन-सी विशेषता थी जिसके कारण अधिक कीमत चुकानी पड़ी? इन सभी सवालों के जवाब जनता को मिलने चाहिए।
उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में भाजपा सरकार बनने के बाद से सरकारी विभागों और स्थानीय निकायों की टेंडर प्रक्रिया लगातार विवादों में रही है। कई मामलों में पारदर्शिता को लेकर सवाल उठे हैं, लेकिन सरकार ने अब तक किसी भी शिकायत की गंभीरता से जांच कराने के बजाय संबंधित अधिकारियों और एजेंसियों को खुली छूट दे रखी है। इससे भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिल रहा है और सरकारी धन के दुरुपयोग की आशंकाएं लगातार बढ़ रही हैं।
स्वच्छता अभियान का उद्देश्य शहर को साफ-सुथरा बनाना है, लेकिन यदि इसी अभियान के नाम पर खरीदी में अनियमितता होगी तो यह जनता के विश्वास के साथ भी धोखा होगा। उन्होंने कहा कि सरकार को यह समझना चाहिए कि सरकारी खजाने में रखा पैसा किसी राजनीतिक दल का नहीं, बल्कि प्रदेश की जनता का है। इसलिए सब रुपए का हिसाब देना प्रशासन की जिम्मेदारी है।
कांग्रेस ने मांग की है कि डस्टबिन खरीदी की पूरी प्रक्रिया की स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराई जाए। इसमें निविदा में भाग लेने वाली कंपनियों, उनकी पात्रता, बाजार दरों की तुलना, तकनीकी मूल्यांकन, भुगतान की प्रक्रिया और अंतिम आपूर्ति तक के सभी दस्तावेज सार्वजनिक किए जाएं। यदि जांच में किसी भी प्रकार की वित्तीय अनियमितता या नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है तो जिम्मेदार अधिकारियों और संबंधित एजेंसियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।
रायपुर नगर निगम पर डस्टबिन खरीदी में गड़बड़ी का आरोप लगा है।
नगर निगम ने करीब 1.60 लाख डस्टबिन खरीदने की प्रक्रिया अपनाई।
एक डस्टबिन की खरीदी दर करीब 235.80 रुपए बताई गई है।
खुदरा बाजार में इसकी कीमत 190 से 200 रुपए बताई गई।
थोक बाजार में यही डस्टबिन 140 से 150 रुपए में मिलने का दावा है।
प्रति डस्टबिन 80 से 90 रुपए अधिक भुगतान का आरोप है।
कांग्रेस ने पूरी खरीदी की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की है।
निविदा, बाजार दर, भुगतान और आपूर्ति के दस्तावेज सार्वजनिक करने की मांग है।
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कैसे हुआ घोटाला
लाखों की डस्टबिन की खरीदी
कांग्रेस के सवाल
उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में भाजपा सरकार बनने के बाद से सरकारी विभागों और स्थानीय निकायों की टेंडर प्रक्रिया लगातार विवादों में रही है। कई मामलों में पारदर्शिता को लेकर सवाल उठे हैं, लेकिन सरकार ने अब तक किसी भी शिकायत की गंभीरता से जांच कराने के बजाय संबंधित अधिकारियों और एजेंसियों को खुली छूट दे रखी है। इससे भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिल रहा है और सरकारी धन के दुरुपयोग की आशंकाएं लगातार बढ़ रही हैं।
स्वच्छता अभियान का उद्देश्य शहर को साफ-सुथरा बनाना है, लेकिन यदि इसी अभियान के नाम पर खरीदी में अनियमितता होगी तो यह जनता के विश्वास के साथ भी धोखा होगा। उन्होंने कहा कि सरकार को यह समझना चाहिए कि सरकारी खजाने में रखा पैसा किसी राजनीतिक दल का नहीं, बल्कि प्रदेश की जनता का है। इसलिए सब रुपए का हिसाब देना प्रशासन की जिम्मेदारी है।
जांच की मांग
IMP FACTS
नगर निगम ने करीब 1.60 लाख डस्टबिन खरीदने की प्रक्रिया अपनाई।
एक डस्टबिन की खरीदी दर करीब 235.80 रुपए बताई गई है।
खुदरा बाजार में इसकी कीमत 190 से 200 रुपए बताई गई।
थोक बाजार में यही डस्टबिन 140 से 150 रुपए में मिलने का दावा है।
प्रति डस्टबिन 80 से 90 रुपए अधिक भुगतान का आरोप है।
कांग्रेस ने पूरी खरीदी की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की है।
निविदा, बाजार दर, भुगतान और आपूर्ति के दस्तावेज सार्वजनिक करने की मांग है।
FAQ
- रायपुर नगर निगम पर डस्टबिन खरीदी में क्या आरोप लगा है?
कांग्रेस का आरोप है कि नगर निगम ने 12 लीटर के डस्टबिन बाजार दर से अधिक कीमत पर खरीदे। निगम की खरीदी दर करीब 235.80 रुपए प्रति डस्टबिन बताई गई है। - बाजार में डस्टबिन की कीमत कितनी बताई जा रही है?
कांग्रेस के मुताबिक यही डस्टबिन खुदरा बाजार में 190 से 200 रुपए और थोक बाजार में 140 से 150 रुपए प्रति नग मिल रहा है। - कांग्रेस ने मामले में क्या मांग की है?
कांग्रेस ने पूरी खरीदी प्रक्रिया की स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराने की मांग की है। साथ ही टेंडर, बाजार दर, भुगतान और आपूर्ति से जुड़े दस्तावेज सार्वजनिक करने को कहा है।
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