गुणवत्ता सुधारने ली परीक्षा, प्रश्नपत्र में लगाया अडानी फाउंडेशन का लोगो
VINAY VERMA | Aug 08, 2026, 12:39 IST
प्रश्नपत्र में अडानी फाउंडेशन का प्रमोशन
रायपुर के सरकारी स्कूलों में मिशन उत्कर्ष 2.0 के तहत टेस्ट पेपर पर अडानी फाउंडेशन की ब्रांडिंग को लेकर सवाल उठे हैं। कांग्रेस ने सरकार और जिला प्रशासन से प्रक्रिया पर जवाब मांगा है।
रायपुर के सरकारी स्कूलों में बच्चों की परीक्षा ने नई बहस छेड़ दी है। मिशन उत्कर्ष 2.0 के तहत कक्षा 10वीं के विज्ञान विषय के यूनिट टेस्ट के पेपर पर अडानी फाउंडेशन की ब्रांडिंग नजर आ रही है। पेपर की तस्वीर सामने आते ही सवाल उठने लगे हैं। सरकारी स्कूल की परीक्षा में निजी संस्था का लोगो आखिर क्यों? इसकी अनुमति किसने दी? और क्या सरकारी परीक्षा सामग्री में निजी ब्रांड को जगह देने की कोई नीति है?
मामला सिर्फ एक लोगो का नहीं है। सरकारी स्कूलों में बच्चों के हाथ में पहुंचने वाला प्रश्न पत्र प्रशासनिक व्यवस्था का हिस्सा होता है। उस पर जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग की पहचान स्वाभाविक है। लेकिन उसी पेपर पर निजी फाउंडेशन की ब्रांडिंग दिखना कई सवाल खड़े करता है। सवाल यह भी है कि अगर किसी संस्था ने परीक्षा तैयार करने या शैक्षणिक गतिविधि में सहयोग किया है, तो उसकी भूमिका क्या थी? क्या इसके लिए औपचारिक अनुमति ली गई? क्या सभी सरकारी स्कूलों के लिए ऐसी ब्रांडिंग की व्यवस्था तय की गई है?
रायपुर जिला प्रशासन ने मिशन उत्कर्ष 2.0 के जरिए कक्षा 10वीं के विद्यार्थियों के परीक्षा परिणाम सुधारने और पढ़ाई का स्तर बेहतर करने पर फोकस किया है। इसके तहत बच्चों की नियमित प्रगति जांचने के लिए यूनिट टेस्ट कराए जा रहे हैं। शिक्षकों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। ब्लूप्रिंट के आधार पर प्रश्न पत्र तैयार किए जा रहे हैं। मकसद साफ है, बोर्ड परीक्षा से पहले बच्चों की तैयारी मजबूत करना। लेकिन अब मिशन के मकसद से ज्यादा चर्चा प्रश्न पत्र पर छपी निजी संस्था की ब्रांडिंग को लेकर हो रही है।
प्रश्न पत्र की तस्वीर सामने आने के बाद कांग्रेस विधायक देवेंद्र यादव ने सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने सोशल मीडिया पर पेपर की तस्वीर साझा कर सवाल उठाए। यादव ने सरकारी स्कूलों की परीक्षा में अडानी फाउंडेशन के लोगो को लेकर सरकार की मंशा पर सवाल खड़े किए। उनका हमला सीधे उस व्यवस्था पर है, जिसमें सरकारी परीक्षा सामग्री पर निजी संस्था की पहचान दिखाई दे रही है। अब सरकार और जिला प्रशासन से जवाब मांगा जा रहा है कि यह लोगो किस प्रक्रिया के तहत प्रश्न पत्र पर लगाया गया।
अगर अडानी फाउंडेशन ने मिशन उत्कर्ष 2.0 में तकनीकी या शैक्षणिक सहयोग दिया है, तो उसकी भूमिका सार्वजनिक होनी चाहिए। किस काम के लिए सहयोग लिया गया? प्रश्न पत्र तैयार करने में संस्था की भूमिका थी या नहीं? पेपर का कंटेंट किसने तैयार किया? अंतिम मंजूरी किस अधिकारी ने दी? इन सवालों का जवाब जरूरी है। क्योंकि सरकारी स्कूलों में निजी संस्थाओं की भागीदारी गलत नहीं है, लेकिन उसकी प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए। ब्रांडिंग की अनुमति भी साफ होनी चाहिए।
सरकार लगातार सरकारी स्कूलों की गुणवत्ता सुधारने की बात कर रही है। मिशन उत्कर्ष 2.0 भी इसी दिशा में बताया जा रहा है। ऐसे में परीक्षा के पेपर पर निजी ब्रांड की मौजूदगी पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े करती है। आखिर सरकारी परीक्षा को निजी ब्रांडिंग की जरूरत क्यों पड़ी? अगर फाउंडेशन ने मदद की है तो उसका काम क्या है? और अगर यह सिर्फ तकनीकी गलती है तो इतनी बड़ी परीक्षा सामग्री में यह गलती कैसे हो गई? इन सवालों का जवाब जिला प्रशासन को देना होगा।
मामला अब सिर्फ अडानी फाउंडेशन के लोगो तक सीमित नहीं है। सवाल सरकारी स्कूलों की परीक्षा व्यवस्था की पारदर्शिता का है। बच्चों की परीक्षा में कौन सामग्री तैयार कर रहा है, किसकी निगरानी में पेपर बन रहा है और किसकी अनुमति से उस पर निजी संस्था की पहचान छप रही है। यह सब साफ होना चाहिए। सरकार अगर इसे सामान्य सहयोग बता रही है तो पूरी प्रक्रिया सामने रखे। वरना विपक्ष के आरोपों को हवा मिलती रहेगी और मिशन उत्कर्ष 2.0 की चर्चा बच्चों की पढ़ाई से ज्यादा कॉर्पाेरेट ब्रांडिंग को लेकर होगी।
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सरकारी पेपर या कॉर्पाेरेट पहचान?
मिशन उत्कर्ष 2.0 का मकसद क्या है?
कांग्रेस ने सरकार को घेरा
अब वो दिन दूर नहीं जब छत्तीसगढ़ अब अडानीगढ़ कहलायेगा… pic.twitter.com/L0CXukNEeq
— Devendra Yadav (@Devendra_1925) August 7, 2026
निजी संस्था की भूमिका भी सवालों में
बच्चों की पढ़ाई से बड़ा सवाल व्यवस्था का
अब सरकार से सीधे सवाल
FAQ
- अडानी फाउंडेशन की ब्रांडिंग को लेकर क्या विवाद है?
रायपुर के सरकारी स्कूलों में मिशन उत्कर्ष 2.0 के तहत कक्षा 10वीं के विज्ञान यूनिट टेस्ट पेपर पर अडानी फाउंडेशन का लोगो नजर आने के बाद विवाद शुरू हुआ। सवाल उठ रहे हैं कि सरकारी परीक्षा सामग्री पर निजी संस्था की ब्रांडिंग किसकी अनुमति से की गई और परीक्षा प्रक्रिया में फाउंडेशन की क्या भूमिका है। - मिशन उत्कर्ष 2.0 क्या है?
मिशन उत्कर्ष 2.0 रायपुर में कक्षा 10वीं के विद्यार्थियों की पढ़ाई और बोर्ड परीक्षा की तैयारी बेहतर करने के लिए चलाया जा रहा शैक्षणिक अभियान है।
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