एक साल में 6 हजार 967 मौतें! हाईकोर्ट ने कहा, क्या पुलिस का काम मवेशी हांकना है
Harrison Masih | Jul 22, 2026, 12:29 IST
छत्तीसगढ़ में सड़क हादसे 2026
छत्तीसगढ़ में बढ़ते सड़क हादसों को लेकर हाईकोर्ट ने सरकार पर सख्त रुख अपनाया है। 6 हजार 967 लोगों की मौत के बाद कोर्ट ने सरकार से जवाब मांगा है। चीफ जस्टिस ने सवाल उठाते हुए कहा, क्या पुलिसकर्मियों का काम सिर्फ मवेशी हांकना है?
समझें क्या है पूरा मामला
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने प्रदेश में बढ़ते सड़क हादसों पर बड़ी सख्ती दिखाई है। यह मामला हाईकोर्ट में जनहित याचिका के तौर पर चल रहा है। कोर्ट ने खुद संज्ञान लेकर इसकी सुनवाई शुरू की थी।
डिवीजन बेंच ने राज्य सरकार और संबंधित विभागों से एक बार फिर शपथ पत्र के साथ जवाब मांगा है। यह जवाब 10 दिन के भीतर देना होगा। कोर्ट कमिश्नर ने प्रदेश भर से जुटाए गए आंकड़े पहले ही अदालत में पेश कर दिए हैं।
6 हजार 967 लोगों की गई जान
साल 2026 के आंकड़े भी चिंताजनक हैं। 31 मई तक सिर्फ पांच महीनों में 6 हजार 891 सड़क दुर्घटनाएं दर्ज हो चुकी हैं। इनमें 3 हजार 170 लोगों की जान जा चुकी है।
जिलों में सुरक्षा बैठकें तक नहीं हो रहीं
सरगुजा जिले में एक साल में सड़क हादसों में 300 से ज्यादा लोगों की मौत हुई। इसके बावजूद कलेक्टर की अध्यक्षता में पूरे 2025 में सिर्फ एक ही बैठक बुलाई गई। कांकेर जिले में भी सालभर में महज एक बैठक हुई।
CG road accidents
मवेशियों को लेकर कोर्ट की तीखी टिप्पणी
कोर्ट ने पुलिस की भूमिका पर भी सीधा सवाल उठाया। चीफ जस्टिस ने कहा, "क्या पुलिसकर्मियों का काम सिर्फ मवेशी हांकना है या व्यवस्था बनाना?" उन्होंने यह भी कहा कि राजधानी और आसपास रोज सैकड़ों वाहन गुजरते हैं, लेकिन व्यवस्था भगवान भरोसे चल रही है।
रायपुर बना सबसे बड़ा डेथ जोन
कोरबा के पाली से गझरा नाला मार्ग पर 22 हादसों में 17 लोगों की जान गई। रायपुर के तेलीबांधा, नेवरा, आरंग और खरोरा क्षेत्र भी गंभीर दुर्घटना वाले स्थानों में गिने गए हैं।
ओवरलोडिंग और अवैध पार्किंग पर भी सवाल
वजन जांचने वाली वेइंग मशीनें बंद पड़ी हैं। भारी वाहन मुख्य सड़कों पर ही खड़े रहते हैं, जिससे दुर्घटनाएं होना लगभग तय हो जाता है।
हाईकोर्ट ने इन बिंदुओं पर मांगा जवाब
तीसरा सवाल है कि चिन्हित ब्लैक स्पॉट्स को सुधारने के लिए क्या कदम उठाए गए। कोर्ट ने एनएचएआई (NHAI - National Highways Authority of India) के क्षेत्रीय और प्रशासनिक अधिकारियों से भी शपथ पत्र के साथ रिपोर्ट मांगी है। साथ ही सड़क सुरक्षा सुधारने की समयबद्ध कार्ययोजना भी अदालत को बतानी होगी।
अब सबकी नजर इस पर है कि सरकार 10 दिन के भीतर क्या जवाब पेश करती है। हाईकोर्ट की सख्ती के बाद प्रशासन पर दबाव जरूर बढ़ गया है।
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