पंडवानी गायिका तीजन बाई का निधन : पीएम मोदी और सीएम साय ने जताया शोक
Umeshwari Baghel | Jul 05, 2026, 14:27 IST
छत्तीसगढ़ की अनमोल धरोहर तीजन बाई का निधन
पद्म विभूषण सम्मानित पंडवानी गायिका तीजन बाई का रायपुर एम्स में निधन हो गया। उन्होंने छत्तीसगढ़ की लोककला पंडवानी को देश-दुनिया में पहचान दिलाई। उनकी दमदार आवाज और संघर्ष हमेशा याद किए जाएंगे।
Raipur। छत्तीसगढ़ की लोककला पंडवानी को देश-दुनिया तक पहुंचाने वाली पद्म विभूषण सम्मानित प्रख्यात लोकगायिका तीजन बाई अब हमारे बीच नहीं रहीं। उन्होंने आज रविवार तड़के करीब 3:15 बजे रायपुर एम्स में अंतिम सांस ली। वे लंबे समय से बीमार चल रही थीं और उनका इलाज जारी था।
तीजन बाई के निधन से छत्तीसगढ़ ही नहीं, पूरे देश के कला और संस्कृति जगत में शोक की लहर है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय समेत कई नेताओं और सांस्कृतिक हस्तियों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी है।
लोकगायिका तीजन बाई का निधन
पंडवानी को दुनिया के मंच तक पहुंचाया
वे छत्तीसगढ़ की उस लोक परंपरा की सबसे प्रभावशाली आवाज बनीं, जिसे उन्होंने भारत से बाहर भी पहचान दिलाई। उनके कारण पंडवानी को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सम्मान मिला और छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति विश्व मानचित्र पर मजबूत पहचान बना सकी।
गनियारी गांव से वैश्विक पहचान तक का सफर
बताया जाता है कि उन्होंने बहुत कम उम्र में पंडवानी गायन शुरू कर दिया था। महज 13 साल की उम्र में उन्होंने 10 रुपए के पारिश्रमिक पर पहला मंचीय प्रदर्शन किया। यही शुरुआत आगे चलकर उन्हें देश की सबसे बड़ी लोक कलाकारों में शामिल करने वाली साबित हुई।
पुरुषों के वर्चस्व को दी चुनौती
तीजन बाई ने इस परंपरा को तोड़ा। उन्होंने कापालिक शैली अपनाई और हाथ में तंबूरा लेकर खड़े होकर गायन किया। उनके इस फैसले ने उन्हें अलग पहचान दी। इसी साहस ने उन्हें पंडवानी की सबसे सशक्त कलाकारों में शामिल कर दिया।
इंदिरा गांधी के सामने प्रस्तुति से मिली पहचान
इसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। भारत के अलग-अलग राज्यों से लेकर विदेशों तक उन्होंने पंडवानी की प्रस्तुति दी और छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत को नई ऊंचाई दी।
सुप्रसिद्ध पंडवानी गायिका तीजन बाई जी के निधन से अत्यंत दुख हुआ है। उन्होंने छत्तीसगढ़ की इस लोक कला को अपनी भव्य प्रस्तुति से दुनियाभर में एक विशिष्ट पहचान दिलाई। उनका जाना कला एवं संस्कृति जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति है। शोक की इस घड़ी में मेरी संवेदनाएं उनके परिजनों और…
— Narendra Modi (@narendramodi) July 5, 2026
पीएम मोदी और सीएम साय ने जताया शोक
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि तीजन बाई ने छत्तीसगढ़ का नाम देश और दुनिया में रोशन किया। प्रदेश उनके योगदान को हमेशा याद रखेगा। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु, अमित शाह, योगी आदित्यनाथ, रमन सिंह और भूपेश बघेल समेत कई नेताओं ने भी उनके निधन पर दुख जताया।
छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति की अमर गाथाकार, पद्म विभूषण से सम्मानित विश्वविख्यात पंडवानी कलाकार डॉ. तीजन बाई जी के निधन का समाचार अत्यंत दुखद है।
उनका निधन न केवल लोककला जगत के लिए, बल्कि समूचे छत्तीसगढ़ तथा समस्त देश की सांस्कृतिक विरासत के लिए एक अपूरणीय क्षति है। अपने अद्वितीय…
— Vishnu Deo Sai (@vishnudsai) July 5, 2026
सम्मान से सजा जीवन
बीमारी से जूझते हुए ली अंतिम सांस
इलाज के दौरान रविवार तड़के उन्होंने अंतिम सांस ली। उनकी आवाज भले ही शांत हो गई हो, लेकिन पंडवानी में उनका योगदान हमेशा जीवित रहेगा।
अमर रहेगी पंडवानी की यह आवाज
Important Facts
उन्होंने रायपुर एम्स में सुबह करीब 3:15 बजे अंतिम सांस ली।
तीजन बाई लंबे समय से बीमार चल रही थीं।
उन्हें फेफड़ों में पानी, निमोनिया और लो ब्लड प्रेशर की शिकायत थी।
तीजन बाई ने पंडवानी को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई।
उन्होंने महाभारत की कथाओं को पंडवानी शैली में जीवंत किया।
उनका जन्म भिलाई के पास गनियारी गांव में हुआ था।
उनके पिता का नाम हुकुमचंद परधा और माता का नाम सुखवाती बाई था।
उन्होंने करीब 13 साल की उम्र में पहला मंचीय प्रदर्शन किया था।
तीजन बाई ने पुरुष प्रधान पंडवानी परंपरा को चुनौती देकर कापालिक शैली अपनाई।
उन्हें पद्म श्री, पद्म भूषण और पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया था।
पीएम मोदी, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और सीएम विष्णुदेव साय ने निधन पर शोक जताया।
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