नक्सलियों का ट्रेनिंग कैंप तबाह... खूंखार हिड़मा करता था लड़ाके तैयार
Marut raj | Jan 22, 2025, 14:57 IST
Telangana Border Naxalite Training Camp the sootr
Telangana Border Naxalite Training Camp : नक्सल संगठन में भर्ती होने वाले नए लड़ाकों को ट्रेनिंग कैंप में गुरिल्ला ट्रेनिंग दी जाती थी। जवानों पर हमला करना, उन्हें एंबुश में फंसाना, बम प्लांट करना सिखाया जाता था।
Telangana Border Naxalite Training Camp : फोर्स ने नक्सलियों के बड़े ट्रेनिंग कैंप को तबाह कर दिया है। यहां खूंखार नक्सली कमांडर हिड़मा और देवा की बटालियन तथा नए लड़ाकों को फाइट के लिए तैयार किया जाता था। यह कैंप छत्तीसगढ़ और तेलंगाना राज्य की सीमा पर स्थित माओवादियों के सबसे सुरक्षित ठिकाने भट्टिगुड़ा में था। यहां पर अब फोर्स का कब्जा है।
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नक्सलियों के कोर इलाके यानी सबसे सुरक्षित क्षेत्रों में जवान पहुंच गए हैं। बुधवार को बस्तर की कोबरा बटालियन के जवान सर्चिंग करते हुए तेलंगाना बॉर्डर पर स्थित भट्टिगुड़ा इलाके में पहुंचे। यहां नक्सलियों ने अपना स्थाई ट्रेनिंग कैंप बना रखा था। जवानों को नक्सलियों के सेंट्रल कमेटी मेंबर सुदर्शन का विशाल कंक्रीट का स्मारक मिला।
नक्सल संगठन में भर्ती होने वाले नए लड़ाकों को यहां गुरिल्ला ट्रेनिंग दी जाती थी। जवानों पर हमला करना, उन्हें एंबुश में फंसाना, बम प्लांट करना, फोर्स की गोली का शिकार हुए साथियों को लेकर मौके से निकले के गुर सिखाए जाते थे।
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ट्रेनिंग के लिए बांस का पूरा सेटअप बना रखा था। करीब डेढ़ एकड़ के इलाके में इनका ट्रेनिंग कैंप था। बताया जा रहा है कि जब जवान यहां पहुंचे तो नक्सली भाग निकले। इसके बाद जवानों ने नक्सलियों का स्मारक और ट्रेनिंग कैंप तोड़ दिया।
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नक्सलियों की बटालियन नंबर एक सबसे मजबूत टीम है। पहले इस टीम का कमांडर हिड़मा हुआ करता था। हिड़मा को अब सेंट्रल कमेटी में शामिल कर लिया गया है। इसके बाद इसकी जिम्मेदारी नक्सली देवा पर है।
वहीं हिड़मा और देवा की इस बटालियन में ऑटोमैटिक वेपंस से लैस करीब 250 से 300 नक्सली हैं। पहले यह संख्या करीब 400 के करीब थी, लेकिन अब नक्सली कमजोर हुए हैं।
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जवानों पर हमला, एंबुश में फंसाना, बम प्लांट करना सिखाते थे
नक्सल संगठन में भर्ती होने वाले नए लड़ाकों को यहां गुरिल्ला ट्रेनिंग दी जाती थी। जवानों पर हमला करना, उन्हें एंबुश में फंसाना, बम प्लांट करना, फोर्स की गोली का शिकार हुए साथियों को लेकर मौके से निकले के गुर सिखाए जाते थे।
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नक्सलियों की बटालियन नंबर एक सबसे मजबूत टीम है। पहले इस टीम का कमांडर हिड़मा हुआ करता था। हिड़मा को अब सेंट्रल कमेटी में शामिल कर लिया गया है। इसके बाद इसकी जिम्मेदारी नक्सली देवा पर है।
वहीं हिड़मा और देवा की इस बटालियन में ऑटोमैटिक वेपंस से लैस करीब 250 से 300 नक्सली हैं। पहले यह संख्या करीब 400 के करीब थी, लेकिन अब नक्सली कमजोर हुए हैं।
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FAQ
- फोर्स ने नक्सलियों के किस ट्रेनिंग कैंप को तबाह किया और यह कहाँ स्थित था ?
फोर्स ने नक्सलियों के बड़े ट्रेनिंग कैंप को तबाह किया, जो छत्तीसगढ़ और तेलंगाना राज्य की सीमा पर स्थित माओवादियों के सबसे सुरक्षित ठिकाने भट्टिगुड़ा में था। - नक्सली ट्रेनिंग कैंप में नए लड़ाकों को क्या सिखाया जाता था ?
नक्सली ट्रेनिंग कैंप में नए लड़ाकों को जवानों पर हमला करना, एंबुश में फंसाना, बम प्लांट करना, और गोली का शिकार हुए साथियों को मौके से निकालने के गुर सिखाए जाते थे। - भट्टिगुड़ा इलाके में नक्सलियों की बटालियन के बारे में क्या जानकारी मिली है ?
भट्टिगुड़ा इलाके में नक्सलियों की बटालियन नंबर एक की ट्रेनिंग कैंप था, जिसका पहले कमांडर हिड़मा था, अब इसकी जिम्मेदारी नक्सली देवा के पास है। इस बटालियन में ऑटोमैटिक हथियारों से लैस 250 से 300 नक्सली हैं।
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