छत्तीसगढ़ की चिट्ठी: योग से जंगल तक, इस हफ्ते के सात बड़े खेल

Rajesh Lahoti | Jun 13, 2026, 18:40 IST
Share
छत्तीसगढ़ की चिट्ठी 2026
छत्तीसगढ़ की चिट्ठी 2026

छत्तीसगढ़ की चिट्ठी में इस हफ्ते फाइलों का योग, मुआवजे के लिए बदलते रिश्ते और भर्तियों की सरकारी भूल चर्चा में रही। चावल वाले बाबा से लेकर 16 साल पुराने बालको चिमनी कांड तक न्याय और आस्था दोनों कटघरे में दिखे।

फाइलों ने भी किया सूर्य नमस्कार

छत्तीसगढ़ में योग अब समाज कल्याण विभाग से निकलकर स्वास्थ्य विभाग में पहुंच गया है। सरकार इसे प्रशासनिक सुधार बता रही है, लेकिन विपक्ष और जानकार पूछ रहे हैं कि यह योग का ट्रांसफर है या पुराने घपले-घोटालो के विसर्जन का नया तरीका। योग आयोग का मकसद गांव-गांव योग पहुंचाना था, लेकिन उसकी सबसे बड़ी उपलब्धि हर साल योग दिवस पर होने वाला आयोजन होकर रह गया है। ट्रैक सूट, स्पोर्ट्स शू और योगा मैट की खरीदी पर वर्षों से सवाल उठते रहे हैं। आरोप लगे कि योग से ज्यादा बजट की स्ट्रेचिंग हो रही है। हजारों योगा मैट हर साल ऐसे गायब हुए हैं जैसे वे कभी थे ही नहीं। अब विभाग बदल गया है, लेकिन घोटाले रुकेंगे, इसमें संशय है। महत्वपूर्ण यह है कि करोड़ों के खर्च का हिसाब कौन देगा? योग शिक्षकों का क्या हुआ? और सबसे बड़ी बात, क्या फाइलें भी विभाग बदलते ही स्वस्थ हो जाएंगी? फिलहाल सरकार योग के लिए जवाबदेही तय करने की कोशिश कर रही है।

डेढ़ करोड़ का प्यार, नया पति तैयार

भारतमाला परियोजना का उद्देश्य सड़क बनाना था, लेकिन छत्तीसगढ़ में यह परियोजना रिश्तों की नई परिभाषा भी गढ़ती दिख रही है। यहां जमीन का मुआवजा इतना आकर्षक निकला कि कुछ लोगों ने खेतों के साथ-साथ पारिवारिक विवरण भी अपडेट कर लिए। सरकारी जांच रिपोर्ट के अनुसार एक पूर्व मंत्री के रिश्तेदार के पति का नाम जमीन खरीदते समय कुछ और था, लेकिन मुआवजा सूची में पति बदल गया। लोकतंत्र में सरकारें बदलती हैं, अफसर बदलते हैं, विभाग बदलते हैं, लेकिन यहां तो मुआवजे के लिए पति ही बदल गया। विवाह अधिनियम के विशेषज्ञ भी शायद इस नवाचार पर शोध करना चाहें। करोड़ों के मुआवजे के लिए जमीनों के छोटे-छोटे टुकड़े किए गए और हर टुकड़ा मानो एटीएम मशीन बन गया। मामला यहीं नहीं रुका।अफसर परिवारों के नाम पर भी जमीनों के हिस्से किए जाने के आरोप सामने आए। अब जांच एजेंसियां दस्तावेज खंगाल रही हैं। इस पूरे प्रकरण ने साबित कर दिया कि सरकारी योजनाओं में पैसा ज्यादा हो तो रिश्तों की परिभाषा भी लचीली हो जाती है। भारतमाला सड़क कब बनेगी, यह बाद की बात है, लेकिन मुआवजे का एक्सप्रेस-वे कई लोगों के लिए समय पर खुल गया था।

भर्ती निकाली, नियम बाद में याद आया

स्कूल शिक्षा विभाग ने स्पेशल एजुकेटर भर्ती निकाली, आवेदन मंगाए, चयन प्रक्रिया शुरू की और फिर अचानक याद आया कि टीईटी भी जरूरी है। यानी पहले उम्मीदवारों को मैदान में उतार दिया गया और बाद में बताया गया कि मैच के नियम कुछ और थे। सुप्रीम कोर्ट का आदेश पहले से मौजूद था, लेकिन विज्ञापन बनाते समय शायद वह पन्ना फाइल से छुट्टी पर चला गया। नतीजा यह हुआ कि 50 पदों में सिर्फ 21 लोगों को नियुक्ति मिली और 29 पद विवाद में फंस गए। पात्र उम्मीदवार नौकरी के लिए भटक रहे हैं और विभाग कोर्ट के डर से फाइलों को इधर-उधर घुमा रहा है। सबसे दुखद बात यह है कि इसका असर उन विशेष बच्चों पर पड़ रहा है जिनके लिए ये शिक्षक नियुक्त होने थे। गलती अफसरों की थी, लेकिन कीमत अभ्यर्थी और बच्चे दोनों चुका रहे हैं। सरकारी भर्ती अब रोजगार कम और कानूनी केस ज्यादा लग रही है।

चावल वाले बाबा अब जेल का राशन देखेंगे

छत्तीसगढ़ में बाबाओं का मौसम इन दिनों खराब चल रहा है। जो कल तक लोगों का भविष्य बता रहे थे, आज अपना भविष्य अदालत की तारीखों में खोज रहे हैं। ताजा मामला चावल वाले बाबा का है। दावा था कि चावल और फूल देखकर भूत-भविष्य बता देते हैं, लेकिन पुलिस कब आएगी और जेल कब जाना पड़ेगा, इसकी भविष्यवाणी शायद उनसे छूट गई। पिछले एक साल में प्रदेश में कई कथित बाबा गंभीर आरोपों में जेल पहुंचे हैं। कोई चमत्कार दिखा रहा था, कोई आध्यात्मिक ज्ञान बेच रहा था और कोई आस्था को कारोबार बना चुका था। हर गिरफ्तारी के बाद समाज कुछ दिन चर्चा करता है और फिर किसी नए बाबा के दरबार में पहुंच जाता है। लगता है कि अंधविश्वास का कारोबार मंदी से अछूता है। फिलहाल चावल वाले बाबा के सितारे गर्दिश में हैं। जो दूसरों का भाग्य लिखने का दावा करते थे, उनका भाग्य अब पुलिस डायरी और अदालत की फाइलें लिख रही हैं।

चीनी आरोपी फिर याद आए

बालको चिमनी हादसे को 16 साल हो चुके हैं, लेकिन मामला अभी भी अदालत की गलियों में दौड़ रहा है। इस सप्ताह कोर्ट ने तीन चीनी आरोपियों की पेशी सुनिश्चित करने के लिए फिर नोटिस भेजने के निर्देश दिए। ऐसा लगता है कि इस केस में सबसे नियमित काम सुनवाई नहीं, बल्कि नोटिस भेजना है। एक पीढ़ी बड़ी हो गई, कई अधिकारी बदल गए, लेकिन फाइल अब भी सक्रिय है। इस बीच एक आरोपी पर गवाह को प्रभावित करने का आरोप लगा, लेकिन अदालत ने फिलहाल जमानत रद्द नहीं की। यानी मुकदमा अभी लंबी दौड़ में बना रहेगा। यह मामला अब सिर्फ एक हादसे का नहीं, बल्कि न्यायिक प्रक्रिया की रफ्तार का प्रतीक बन चुका है। 16 साल बाद भी आरोपी, गवाह और नोटिस चर्चा में हैं। लगता है कि बालको की चिमनी तो एक दिन गिरी थी, लेकिन उसकी फाइल आज तक खड़ी हुई है।

मेडिकल कॉलेजों को लगा एनएमसी ब्रेक

सरकार ने पांच नए मेडिकल कॉलेजों का खूब प्रचार किया। 250 नई एमबीबीएस सीटों का सपना दिखाया गया, लेकिन एनएमसी ने दस्तावेज देखे और फिलहाल फाइल पर ब्रेक लगा दिया। आरोप है कि संसाधन, फैकल्टी और जरूरी व्यवस्थाएं पूरी किए बिना अनुमति के लिए आवेदन भेज दिया गया। यानी घर की छत बनने से पहले ही गृहप्रवेश का निमंत्रण बांट दिया गया। दिलचस्प बात यह है कि प्रभावित कॉलेजों में मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री के प्रभाव वाले इलाके भी शामिल हैं। इसलिए मामला प्रशासनिक से ज्यादा राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया है। अब सरकार को 15 दिन में कमियां दूर करनी हैं, लेकिन इस घटनाक्रम ने यह जरूर बता दिया कि मेडिकल कॉलेज भाषणों से नहीं, बुनियादी तैयारी से खुलते हैं। फिलहाल 250 सीटें इंतजार में हैं और जनता यह देख रही है कि इलाज पहले होगा या प्रचार।

उदंती में पेड़ों से ज्यादा नोटिस उगे

उदंती टाइगर रिज़र्व से लगे इलाके में 17 साल में अतिक्रमण 10 एकड़ से बढ़कर 106 एकड़ पहुंच गया। जंगल धीरे-धीरे गायब होता रहा और वन विभाग धीरे-धीरे नोटिस जारी करता रहा। ड्रोन थे, सैटेलाइट थे, गश्त थी, रिपोर्टें थीं। सब कुछ था, बस समय पर कार्रवाई नहीं थी। लाखों पेड़ कट गए, लेकिन जिम्मेदारियां सुरक्षित रहीं। अब जब कार्रवाई शुरू हुई है तो कब्जाधारी पुश्तैनी जमीन का दावा कर रहे हैं और विभाग दस्तावेज मांग रहा है। अगर जंगल 17 साल तक कटता रहा तो क्या किसी को दिखाई नहीं दिया? और अगर दिखाई दिया तो रोका क्यों नहीं गया? उदंती का मामला बताता है कि जंगल एक दिन में नहीं उजड़ते। वे धीरे-धीरे खत्म होते हैं और अक्सर उनसे पहले सरकारी जवाबदेही गायब हो जाती है। अब पेड़ों की गिनती हो रही है, लेकिन जिम्मेदारों की तलाश अभी भी जारी है।

ये खबरें भी पढ़ें...

चावल वाले बाबा रेप केस में पहुंचे जेल, एक साल में 4 पाखंडियों का बिगड़ा खेल

16 साल पुराने बालको चिमनी हादसे में नई हलचल, चीनी आरोपी फिर अदालत के निशाने पर

उदंती में जंगल उजड़ा या पुश्तैनी जमीन पर खेती.... 17 साल बाद वन विभाग जागा

छत्तीसगढ़ की चिट्ठी : कहीं फटकार, कहीं मेहरबानी

Tags:
  • छत्तीसगढ़
  • मेडिकल कॉलेज
  • उदंती टाइगर रिज़र्व
  • एनएमसी
  • भारतमाला परियोजना
  • छत्तीसगढ़ की चिट्ठी
गूगल पर द सूत्र चुनें ! Add as a preferredsource on Google
MP कर्मचारी प्रमोशन: 10 साल बाद पदोन्नति, अब 4 साल की छूट पर अटका मामला, राज्य कर्मचारी संघ ने सीएम मोहन यादव से की मांग

By Atul Dwivedi

MP कर्मचारी प्रमोशन: 10 साल बाद पदोन्नति, अब 4 साल की छूट पर अटका मामला, राज्य कर्मचारी संघ ने सीएम मोहन यादव से की मांग
एमपी भाजपा में 30 सितंबर को तीन दिग्गजों की एकसाथ आमद, 236 दिन बाद मिला प्रदेश संगठन महामंत्री

By Ramanand Tiwari

एमपी भाजपा में 30 सितंबर को तीन दिग्गजों की एकसाथ आमद, 236 दिन बाद मिला प्रदेश संगठन महामंत्री
मध्य प्रदेश भाजपा में अब लक्ष्मण रेखा कौन खींचेगा? चंद्रशेखर की होगी असली परीक्षा

By Ramanand Tiwari

मध्य प्रदेश भाजपा में अब लक्ष्मण रेखा कौन खींचेगा? चंद्रशेखर की होगी असली परीक्षा
मध्य प्रदेश के किसानों को बड़ी राहत: मिनी ट्रैक्टर पर मिलेगी 50 प्रतिशत तक सब्सिडी, ऑनलाइन पोर्टल पर ऐसे करें आवेदन

By Jitendra Shrivastava

मध्य प्रदेश के किसानों को बड़ी राहत: मिनी ट्रैक्टर पर मिलेगी 50 प्रतिशत तक सब्सिडी, ऑनलाइन पोर्टल पर ऐसे करें आवेदन
mp-top-news: खबरें काम की... ब्राह्मणों ने कभी शासन नहीं किया, नरोत्तम मिश्रा बोले खामोशी को कमजोरी न समझें

By Sanjay Dhiman

mp-top-news: खबरें काम की... ब्राह्मणों ने कभी शासन नहीं किया, नरोत्तम मिश्रा बोले खामोशी को कमजोरी न समझें
झाबुआ संयुक्त कलेक्टर अक्षय सिंह की नौकरी खतरे में, फर्जी जाति प्रमाणपत्र में ऐसे घिरे

By Sanjay Gupta

झाबुआ संयुक्त कलेक्टर अक्षय सिंह की नौकरी खतरे में, फर्जी जाति प्रमाणपत्र में ऐसे घिरे
बस्तर में बाढ़ का जायजा लेने पहुंचे CM साय, प्रभावित परिवारों से मिले, 10 हजार रुपए अतिरिक्त सहायता की घोषणा

By Arun Tiwari

बस्तर में बाढ़ का जायजा लेने पहुंचे CM साय, प्रभावित परिवारों से मिले, 10 हजार रुपए अतिरिक्त सहायता की घोषणा