मप्र विधानसभा में अटकी 2100 याचिकाएं : विधायक परेशान, विकास फाइलों पर धूल

मध्य प्रदेश विधानसभा में 2100 से अधिक याचिकाएं लंबित हैं। बस स्टैंड से स्कूल उन्नयन तक कई मांगें फाइलों में अटकीं। विभागों के ढीले रवैए से विधायक व याचिका समिति दोनों परेशान हैं।

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Ravi Awasthi
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Photograph: (thesootr)

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BHOPAL. मध्य प्रदेश के नए जिले निवाड़ी में बस स्टैंड के निर्माण को लेकर बीजेपी विधायक अनिल जैन की लंबी कोशिशें अब तक नतीजा नहीं दे पाई हैं। बीते साल विधानसभा में दायर की गई उनकी याचिका अभी भी अधूरी पड़ी है। यह स्थिति अकेले जैन की नहीं है,सदन में कई विधायक इसी पीड़ा से गुजर रहे हैं।

सूत्रों के अनुसार, वर्तमान में विधानसभा में 2155 याचिकाएं विचाराधीन हैं, जिनमें से अधिकांश पर काम की शुरुआत तक नहीं हुई है। ऐसे में याचिकाओं का उद्देश्य और उपयोगिता दोनों सवालों के घेरे में हैं।

याचिकाएं सिर्फ औपचारिकता ? 

2100 petitions

धार जिले के सरदारपुर से कांग्रेस विधायक प्रताप ग्रेवाल अक्सर सदन में सार्वजनिक मुद्दे उठाने के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने पिछले बजट सत्र में सरदारपुर की कई माध्यमिक स्कूलों को उच्चतर माध्यमिक में अपग्रेड करने की मांग रखी थी।उनका आरोप है कि बीते डेढ़ सालों में इस दिशा में रत्तीभर काम नहीं हुआ। वह कहते हैं-याचिका लगाकर आप सिर्फ अपना मन हल्का कर सकते हैं, इससे आगे कुछ नहीं। यह बिलखते बच्चे को चुप कराने जैसा है।

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याचिकाओं से जुड़ा सवाल उठाने की तैयारी

डबरा के कांग्रेस विधायक सुरेश राजे भी लगातार अनसुनी की शिकायत कर रहे हैं। वे कहते हैं-पिछले पांच साल में कई याचिकाएं डालीं, लेकिन एक भी काम धरातल पर नहीं उतरा। अब इसी मुद्दे पर सदन में सवाल उठाने की तैयारी है। राजे के मुताबिक सत्ता पक्ष के कई विधायक भी अपने क्षेत्रों में कामकाज न होने से परेशान हैं।

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इनकी याचिकाएं भी ठंडे बस्ते में

बड़वानी के मोंटू सोलंकी, मंडला के चैन सिंह बरकड़े, घोड़ाडोंगरी के ब्रह्मा भलावी, बिछिया के नारायण सिंह पट्टा तथा बालाघाट के विवेक विक्की पटेल भी उन विधायकों में शामिल हैं, जिनकी मांगें अनसुनी कर दी गईं। 

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 बजट और मद का प्रावधान सबसे बड़ी बाधा

सूत्रों का दावा है कि सदन में पेश अधिकांश याचिकाएं निर्माण कार्यों से जुड़ी होती हैं। इनमें कई काम पहले से योजनाओं में शामिल होते हैं। जिन्हें बजट में शामिल नहीं किया जाता,उन्हें संबंधित ‘मद’ की कमी के कारण आगे नहीं बढ़ाया जाता। ऐसे मामलों में विभागीय अधिकारी भी विशेष रुचि नहीं दिखाते।

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सिर्फ रिमाइंडर से नहीं बनती बात

विधानसभा याचिका समिति भी विभागों के ढीले रवैये से परेशान है। सूत्र बताते हैं-एक-दो रिमाइंडर से जवाब नहीं मिलता, इसलिए अधिकारियों को तलब करना पड़ता है। इसे लेकर मध्य प्रदेश विधानसभा सचिवालय (mdhy prdesh vidhaansbhaa scivaaly) के अवर सचिव अमित अवस्थी कहते हैं-सचिवालय सहायक की भूमिका में है। मुख्य जिम्मेदारी विभागों की है। विलंब संभव है, लेकिन याचिकाओं के माध्यम से भी विकास कार्य होते हैं। 

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