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Photograph: (the sootr)
NEWS IN SHORT
- एसीसी सीमेंट(acc cement) पर ₹2.3 करोड़ का जुर्माना लगाया गया है।
- यह जुर्माना खदान संचालन में पर्यावरणीय मंजूरी की लापरवाही पर लगा है।
- एसीसी सीमेंट कंपनी ने 2014 से 2018 तक बिना वैध EC के जमकर खनन किया।
- पर्यावरणीय मुआवजा फॉर्मूला का उपयोग करके जुर्माना तय किया गया है।
एसीसी लिमिटेड (ACC Limited) पर ₹2.3 करोड़ का जुर्माना लगाया गया है। यह जुर्माना कंपनी द्वारा पर्यावरणीय नियमों की अनदेखी करने के कारण लगा है। मामला कटनी जिले की बदारी लाइमस्टोन खदान (Badari Limestone Mine) का है। यहां खनन कार्य करते हुए एसीसी ने पर्यावरणीय मंजूरी (EC) के हस्तांतरण में गंभीर लापरवाही बरती। और जमकर खुदाई करती रही।
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सिया की तीन सदस्यीय समिति ने की कार्रवाई
एसीसी सीमेंट कंपनी पर पर्यावरणीय अनुमतियों की अनदेखी के मामले में जुर्माना आदेश सिया की तीन सदस्यीय समिति ने दिया। इस समिति में सिया अध्यक्ष शिव नारायण सिंह चौहान, सदस्य सचिव दीपक आर्य व सदस्य डॉ सुनंदा सिंह रघुवंशी शामिल हैं। इस समिति ने जांच रिपोर्ट के आधार पर सीमेंट कंपनी पर जुर्माने की कार्यवाही की है।
पर्यावरणीय मंजूरी की लापरवाही ने बढ़ाया जुर्माना
जानकारी के अनुसार यह विवाद पर्यावरणीय मंजूरी (EC) के हस्तांतरण में लापरवाही से शुरू हुआ। एसीसी लिमिटेड ने 2014 से 2018 तक बिना वैध EC के खनन कार्य जारी रखा। यह कार्य नियमों के खिलाफ था और इसके कारण उन्हें ₹2.3 करोड़ का जुर्माना भरना पड़ेगा।
जुर्माने की गणना: ₹2.3 करोड़ क्यों?
SEIAA ने जुर्माने की गणना के लिए CPCB के 'पर्यावरण मुआवजा' फॉर्मूले का इस्तेमाल किया। फार्मूला के अनुसार खनन कार्य के दौरान 65,611 मीट्रिक टन खनिज निकाला गया था, जिसके आधार पर ₹2.3 करोड़ का जुर्माना तय किया गया है।
बड़ी चूक: खदान के भीतर खदान
इस मामले में एक और चूक एसीसी द्वारा खदानों के बीच तालमेल न बैठाने की थी। एसीसी ने अपनी बड़ी खदानों में बदारी खदान को एकीकृत नहीं किया, जिससे नियमों का उल्लंघन हुआ।
बता दें कि एसीसी ने 2009 से 2014 तक खनन कार्य भी बिना पर्यावरणीय मंजूरी के किया गया था। इस मामले में भी भविष्य में और जुर्माना लगाया जा सकता है।
FAQ
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एसीसी सीमेंट पर जुर्माना
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