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मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा से एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां 15-16 साल के नाबालिग लड़कों ने AI की मदद से 9 लड़कियों की न्यूड तस्वीरें और वीडियो बनाए है। साथ ही, इन्हें सोशल मीडिया पर अपलोड कर दिया है।
इन लड़कों का कहना था कि उन्होंने यह सब बस यह देखने के लिए किया था कि जिन लड़कियों के साथ हम रहते हैं, वह बिना कपड़ों के कैसी दिखती हैं। इन लड़कों ने इस हरकत के लिए पैसे भी खर्च किए थे।
कैसे हुई इस शर्मनाक घटना की शुरुआत?
24 जनवरी को छिंदवाड़ा के कोतवाली थाना में एक मामला सामने आया था। कोतवाली टीआई आशीष कुमार ने बताया कि तीन लड़कियां पुलिस स्टेशन पहुंची थी। उन्होंने शिकायत की कि उनकी तस्वीरों को AI से एडिट कर अश्लील फोटो बनाई गई है। इन तस्वीरों को सोशल मीडिया पर अपलोड किया गया था। लड़कियों के अनुसार, आरोपियों ने उनके आपत्तिजनक वीडियो भी बनाए थे। इस बारे में उन्हें एक युवक से जानकारी मिली थी।
जांच में मिले नाबालिग आरोपी
मामले की गंभीरता को देखने हुए पुलिस ने तुरंत साइबर टीम की मदद से जांच शुरू की। मोबाइल से मिले साक्ष्यों के आधार पर केस दर्ज किया गया है। साथ ही, आरोपियों की पहचान की गई है। यह भी पाया गया कि दोनों आरोपी नाबालिग थे।
मोबाईल में मिले न्यूड फोटो-वीडियो
पीड़ित लड़की ने पुलिस को बताया कि उसने 12वीं तक पढ़ाई की है। उसकी दो सहेलियां हैं। 24 जनवरी को रात करीब 11 बजे, मोहल्ले का एक लड़का घर आया था। उसने लड़की को बुलाया और अपने मोबाइल में टेलीग्राम एप पर दोनों सहेलियों के एआई जनरेटेड न्यूड फोटो दिखाए।
फोटो देखकर लड़की ने उसे डांटा। उसने पूछा कि तूने हमारे ऐसे फोटो क्यों बनाए? लड़की ने मोबाइल चेक किया। उसने पाया कि उसने सहेलियों के अश्लील फोटो वाट्सएप पर भेजे थे। ऐसे में लड़की ने सहेलियों और उनके परिवारों को फोटो वायरल होने की जानकारी दी। इसके बाद वह थाने पहुंची और शिकायत दर्ज करवाई।
549 रुपए देकर बनवाए थे फोटो-वीडियो
पुलिस ने जब्त किए चार फोन
टीआई आशीष कुमार का कहना है कि पुलिस ने चार मोबाइल जब्त किए हैं। रिकवर किए गए डेटा के आधार पर आरोपियों के खिलाफ धारा 79 BNS और 67 IT Act के तहत मामला दर्ज किया गया है। इन धाराओं में 5 साल और 3 साल तक की सजा हो सकती है।
पुलिस अब यह जांच कर रही है कि ये फोटो और वीडियो किस-किस से शेयर किए गए थे। मामले में पीड़ितों और आरोपियों की संख्या बढ़ सकती है।
AI से बनी फोटो-वीडियो की कैसे करें पहचान
सायबर एक्सपर्ट हिमांशु रघुवंशी का कहना है कि AI तकनीक का गलत इस्तेमाल खतरनाक हो सकता है। सोशल मीडिया तस्वीरों का दुरुपयोग किसी की इज्जत और मानसिक स्थिति पर गंभीर असर डाल सकता है।
AI की मदद से किसी के चेहरे को दूसरी बॉडी से जोड़ दिया जाता है। इसे डीपफेक कहते हैं। यह इतना साफ-सुथरा होता है कि पहचानना मुश्किल हो जाता है।
AI से बने फोटो और वीडियो में असली और नकली पहचानना कठिन है। वहीं, कुछ बातों पर ध्यान देकर इन्हें पहचाना जा सकता है। AI से बने फोटो में चेहरे की चमक ज्यादा होती है, जबकि असली चेहरे में इतनी चमक नहीं होती। वीडियो में चेहरे के हाव-भाव अलग नजर आते हैं। लिप सिंक भी सही नहीं होती।
जानें क्या है डीपफेक
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