मुकेश मौर्य बने अजाक्स प्रांताध्यक्ष, आईएएस गढ़पाले को मिली कार्यवाहक प्रांताध्यक्ष की मान्यता

Amresh Kushwaha | Apr 04, 2026, 09:16 IST
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ajax mp mukesh maurya prantadhyaksh vivad khatam
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मध्यप्रदेश अजाक्स में प्रांताध्यक्ष पद को लेकर चल रहा लंबा विवाद अब खत्म हो गया है। सामान्य प्रशासन विभाग ने चौधरी मुकेश मौर्य को वैधानिक प्रांताध्यक्ष और आईएएस विशेष गढ़पाले को कार्यवाहक प्रांताध्यक्ष की मान्यता दी है।

मध्यप्रदेश में अनुसूचित जाति-जनजाति अधिकारियों और कर्मचारियों के सबसे बड़े संगठन अजाक्स में महीनों से खींचतान चल रही थी। यह विवाद इस बात को लेकर था कि असली प्रांताध्यक्ष कौन है। अब सामान्य प्रशासन विभाग ने यह उलझन सुलझा दी है।

विभाग ने चौधरी मुकेश मौर्य को वैधानिक प्रांताध्यक्ष और आईएएस विशेष गढ़पाले को कार्यवाहक प्रांताध्यक्ष के रूप में मान्यता दी है। इसके साथ ही सभी शासकीय विभागों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं। उन्हें कहा गया है कि सिर्फ इन्हीं दो अधिकृत पदाधिकारियों से पत्राचार किया जाए।

20 मार्च को क्या हुआ था?

इस विवाद का सबसे विवादित मोड़ 20 मार्च को आया था। उस दिन मुकेश मौर्य अपने समर्थकों के साथ अजाक्स कार्यालय पहुंचे। उन्होंने कार्यालय में लगी जेएन कंसोटिया, संतोष वर्मा और एसएल सूर्यवंशी की नेमप्लेट हटाकर अपनी नेमप्लेट लगा दी।

इसके जवाब में दूसरे पक्ष ने भी मौर्य की नेमप्लेट हटा दी। मौके पर पुलिस मौजूद थी, लेकिन विवाद नहीं रुका। मुकेश मौर्य की शिकायत पर एक महिला के खिलाफ एफआईआर (First Information Report) दर्ज की गई थी। इसके अलावा 8 अन्य लोगों को बाउंडओवर किया गया था।

दोनों गुटों के आरोप-प्रत्यारोप

मुकेश मौर्य का कहना है कि वे रजिस्ट्रार फर्म्स एवं सोसायटी से मान्यता प्राप्त वैधानिक अध्यक्ष हैं। उनके मुताबिक, संतोष वर्मा के पास कोई कानूनी दस्तावेज नहीं है और उन्हें साजिश के तहत थाने बुलाकर उनकी नेमप्लेट तोड़ी गई। मौर्य ने यह भी आरोप लगाया कि कार्यालय में असामाजिक तत्वों को बुलाया जा रहा था।

दूसरी तरफ आईएएस संतोष वर्मा ने मौर्य की वैधता पर ही सवाल खड़े किए थे। वर्मा का दावा था कि मौर्य संगठन के सदस्य बनने के योग्य ही नहीं हैं। उन्होंने सदस्यता के नाम पर आर्थिक गड़बड़ी का आरोप भी लगाया और बताया कि इस मामले में कोर्ट में एक निजी परिवाद लंबित है। वर्मा ने यह भी कहा कि मौर्य को पहले ही संगठन से निष्कासित किया जा चुका है।

विवाद की राजनीतिक रंगत

इस संगठनात्मक विवाद ने धीरे-धीरे राजनीतिक रंग भी ले लिया था। संतोष वर्मा ने बयान दिया कि अनुसूचित जाति-जनजाति वर्ग के कर्मचारियों में आक्रोश बढ़ रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर यह नहीं रुका तो इसका खामियाजा सरकार को भुगतना पड़ेगा। इस बयान ने पूरे मामले को एक नया आयाम दे दिया था।

वर्मा का यह भी आरोप था कि उनके शिकायती आवेदन पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। दोनों गुट अलग-अलग जगहों पर बैठकर खुद को अध्यक्ष बता रहे थे।

विवाद की जड़ें 2023 में

मध्यप्रदेश अजाक्स विवाद एकाएक नहीं उठा। साल 2023 में ही सदस्यता और चुनाव को लेकर यह विवाद शुरू हुआ था। रजिस्ट्रार और फर्म-सोसाइटी के सामने अलग-अलग दावे पेश किए गए थे। जेएन कंसोटिया, संतोष वर्मा और सूर्यवंशी गुट एक तरफ थे और मुकेश मौर्य गुट दूसरी तरफ। कई बार शिकायतें हुईं, प्रशासनिक हस्तक्षेप हुआ, लेकिन मामला सुलझ नहीं पाया था।

प्रांतीय सचिव डॉ. अनिल अर्गल ने बताया कि रजिस्ट्रार फर्म्स एवं सोसायटी, भोपाल द्वारा मान्यता प्राप्त कर्मचारी संघों के प्रांताध्यक्षों की सूची विधानसभा पटल पर रखी गई थी। इसी सूची के आधार पर सामान्य प्रशासन विभाग को सूचित किया गया कि कुछ लोग संगठन के नाम का गलत उपयोग करके भ्रम फैला रहे हैं।

अब क्या है आगे की राह?

मुकेश मौर्य और विशेष गढ़पाले ने कहा है कि संगठन सभी को साथ लेकर आगे बढ़ेगा। उनका लक्ष्य अनुसूचित जाति-जनजाति के अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ-साथ पूरे समाज को मजबूत करना है। साथ ही इस वर्ग को विकास की मुख्यधारा से जोड़ना भी प्राथमिकता में है।

संगठन ने तय किया है कि केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाया जाएगा। एससी-एसटी (Scheduled Caste-Scheduled Tribe) छात्रों को छात्रावासों में मिलने वाली सुविधाओं की निगरानी भी की जाएगी। भोपाल स्थित अजाक्स भवन में जल्द ही प्रांतीय और जिला पदाधिकारियों की बैठक बुलाई जाएगी।

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