अंबेडकर विवाद: अनिल मिश्रा की जमानत पर टिकी निगाहें, सोमवार को सुनवाई

ग्वालियर में डॉ. भीमराव अंबेडकर के चित्र जलाने का मामला कानूनी रूप ले चुका है। आरोपियों की जमानत याचिका पर विशेष अदालत में सुनवाई की गई। दस्तावेजों की कमी के कारण टल गई।

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Ramanand Tiwari
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BHOPAL. ग्वालियर में डॉ. भीमराव अंबेडकर के चित्र जलाने का मामला सामने आया। कथित अपमानजनक नारेबाजी के बाद यह मामला कानूनी मोड़ ले चुका है। अधिवक्ता अनिल मिश्रा समेत चार आरोपियों की जमानत याचिका पर विशेष अदालत में सुनवाई चल रही है। शनिवार को दस्तावेजों की कमी के कारण सुनवाई टल गई। कोर्ट ने केस डायरी तलब की है।

एट्रोसिटी एक्ट बना जमानत में सबसे बड़ी बाधा

अनिल मिश्रा पर एससी/एसटी (एट्रोसिटी) एक्ट लागू होने से रविवार को जमानत मिलने की संभावना कम है। इसलिए सोमवार को स्पेशल कोर्ट में औपचारिक रूप से जमानत आवेदन पेश किया जाएगा। कानूनी जानकारों का मानना है कि सोमवार के बाद राहत मिलने की उम्मीद बढ़ेगी।

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सोमवार के बाद जमानत की पूरी उम्मीद

अनिल मिश्रा की पैरवी कर रहे पवन पाठक ने कहा कि यह मामला पांच साल से कम सजा वाले अपराधों से जुड़ा है। ऐसे मामलों में थाने से जमानत मिलनी चाहिए थी। पुलिस ने नियमों को नजरअंदाज कर पहले गिरफ्तारी की। बाद में एफआईआर दर्ज की, जो गैरकानूनी है। पवन पाठक ने कहा कि सोमवार को स्पेशल कोर्ट में बेल लगाई जाएगी। इसके बाद अनिल मिश्रा को जमानत मिलने की संभावना है।

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द सूत्र से बातचीत: गिरफ्तारी को बताया अवैध

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता जय प्रकाश मिश्रा ने भी द सूत्र से चर्चा में अनिल मिश्रा की गिरफ्तारी को अवैध करार दिया। उनका कहना है कि कानून के मुताबिक ऐसे मामलों में नोटिस देकर छोड़े जाने का प्रावधान है। लेकिन पुलिस ने इसका पालन नहीं किया।

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पहले गिरफ्तारी, बाद में एफआईआर

कोर्ट में दलील देते हुए एडवोकेट पवन पाठक ने कहा कि ग्वालियर पुलिस ने विधि प्रक्रिया का पालन नहीं किया। आरोपियों को पहले गिरफ्तार किया गया और बाद में एफआईआर दर्ज की गई। यही नहीं, परिजनों को समय पर गिरफ्तारी की सूचना भी नहीं दी गई।

नोटिस देकर छोड़ने का विकल्प नजरअंदाज

वकीलों का तर्क है कि जिन धाराओं में मामला दर्ज किया गया है, उनमें नोटिस देकर छोड़े जाने का स्पष्ट प्रावधान है। इसके बावजूद पुलिस ने हाईकोर्ट के पूर्व निर्देशों की अवहेलना करते हुए सीधे गिरफ्तारी की।

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सात आरोपियों पर दर्ज है केस

यह पूरा मामला एक जनवरी का है, जब डॉ. भीमराव अंबेडकर के चित्र को जलाने और नारेबाजी का आरोप सामने आया। साइबर सेल थाना ग्वालियर में दर्ज एफआईआर में अनिल मिश्रा समेत कुल सात लोगों को आरोपी बनाया गया है।

निचली अदालत से नहीं मिली राहत

इससे पहले जेएमएफसी मधुलिका खत्री की कोर्ट ने चार आरोपियों की जमानत याचिका खारिज की। इसके बाद उन्हें जेल भेज दिया गया। गुरुवार को अनिल मिश्रा, अमित दुबे, मोहित ऋषीश्वर और गौरव व्यास को गिरफ्तार किया गया।

तीन आरोपी अब भी फरार

मामले में कुलदीप कांकोरिया, अमित भदौरिया और ध्यानेन्द्र शर्मा फरार हैं। पुलिस उनकी तलाश में जुटी है। सुनवाई के दौरान जबलपुर से आए सरकारी वकीलों और अभियोजन अधिकारियों की मौजूदगी रही।

अब आगे क्या?

एट्रोसिटी एक्ट के कारण रविवार को राहत की उम्मीद कम है। सोमवार को स्पेशल कोर्ट में जमानत याचिका दाखिल होने के बाद अनिल मिश्रा को जमानत मिलने की संभावना है। अब सभी की नजरें सोमवार की सुनवाई पर टिकी हैं।

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