छुट्टी पर आया सैनिक और चार दिन में गर्भवती हो गई पत्नी! अब बच्चे का होगा DNA टेस्ट

जबलपुर हाईकोर्ट ने पति-पत्नी के वैवाहिक विवाद में बेटी के डीएनए टेस्ट के आदेश को बरकरार रखा। सैनिक पति के आरोपों की सच्चाई जानने के लिए टेस्ट जरूरी।

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Neel Tiwari
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News in short

  • सेना में पदस्थ पति ने पत्नी पर लगाए व्यभिचार के आरोप।
  • फैमिली कोर्ट जबलपुर ने 18 अगस्त 2022 को DNA टेस्ट की दी थी अनुमति।
  • पत्नी ने हाईकोर्ट में आदेश को दी थी चुनौती।
  • जस्टिस विवेक जैन की बेंच ने याचिका की खारिज।
  • टेस्ट से इनकार पर पत्नी के खिलाफ अनुमान लगाने का रास्ता खुला।

News in detail

सेना में कार्यरत पति और मध्यप्रदेश पुलिस में पदस्थ पत्नी के बीच वैवाहिक विवाद में जबलपुर हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाया। कोर्ट ने महिला पुलिस कॉन्स्टेबल की याचिका खारिज करते हुए बेटी के डीएनए टेस्ट के आदेश को बरकरार रखा। हाईकोर्ट ने कहा कि व्यभिचार के गंभीर आरोपों की सच्चाई सामने लाने के लिए डीएनए टेस्ट जरूरी हो सकता है।

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पति सेना में, पत्नी एमपी पुलिस में

यह मामला ऐसे दंपती से जुड़ा है। इसमें पति भारतीय सेना में कार्यरत है, जबकि पत्नी मध्य प्रदेश पुलिस में जबलपुर में कॉन्स्टेबल के पद पर पदस्थ है। पति का आरोप है कि पत्नी का किसी अन्य व्यक्ति के साथ अवैध संबंध है। उसी संबंध के परिणामस्वरूप बेटी का जन्म हुआ। इसी आरोप को आधार बनाकर पति ने तलाक की याचिका के साथ बच्ची के डीएनए टेस्ट की मांग की।

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गर्भावस्था को लेकर उठे गंभीर सवाल

पति ने अदालत में दलील दी कि अक्टूबर 2015 में वह छुट्टी लेकर जबलपुर आया था। महज चार दिनों के भीतर पत्नी ने गर्भवती होने की जानकारी दे दी। पति के अनुसार, मेडिकल साइंस के मुताबिक गर्भधारण की पुष्टि आमतौर पर 20 से 30 दिनों बाद ही होती है। बच्ची का जन्म कथित गर्भधारण के आठ महीने में हुआ। इसने पूरे मामले पर संदेह और गहरा दिया।

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तीन बार लगा तलाक का मामला

कोर्ट को बताया गया कि पति-पत्नी के बीच पहले भी दो बार तलाक की प्रक्रिया शुरू हो चुकी थी। पहली बार 2019 में आपसी सहमति से तलाक की बात हुई। दूसरी बार धारा 13-बी के तहत याचिका दायर की गई। लेकिन पत्नी के दूसरी पेशी में उपस्थित न होने के कारण मामला समाप्त हो गया। तीसरी और वर्तमान याचिका में पति ने सीधे तौर पर व्यभिचार का आरोप लगाते हुए डीएनए टेस्ट की मांग की।

फैमिली कोर्ट ने दिया DNA टेस्ट का आदेश

फैमिली कोर्ट, जबलपुर ने 18 अगस्त 2022 को डीएनए टेस्ट की अनुमति दी। कोर्ट ने पति की दलीलों को मजबूत माना। महिला पुलिस कॉन्स्टेबल ने इस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी। उन्होंने इसे निजता और बच्ची के अधिकार के खिलाफ बताया।

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हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी

जस्टिस विवेक जैन की सिंगल बेंच ने सुप्रीम कोर्ट के दिपन्विता रॉय फैसले का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि जब व्यभिचार मुख्य विवाद हो, तब डीएनए टेस्ट सच्चाई सामने लाने का प्रभावी तरीका हो सकता है। कोर्ट ने माना कि बच्चे की वैधता पर सवाल उठाना संवेदनशील है। लेकिन न्याय के हित में सच्चाई जानना अधिक आवश्यक है।

नॉन-एक्सेस की दलील को माना गया मजबूत आधार

हाईकोर्ट ने इस तथ्य को भी महत्वपूर्ण माना कि पति सेना में पदस्थ है। सीमित समय के लिए ही घर आ पाता है। पति की यह दलील कि जिस अवधि में गर्भधारण बताया गया, उस समय उसका पत्नी से शारीरिक संपर्क संभव नहीं था। 

DNA टेस्ट से इनकार पर क्या होगा?

हाईकोर्ट ने आदेश में कहा कि यदि पत्नी डीएनए सैंपल देने से इनकार करती है, तो फैमिली कोर्ट भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 114(h) के तहत प्रतिकूल अनुमान लगा सकता है। कोर्ट यह मान सकता है कि यदि टेस्ट होता, तो परिणाम पति के पक्ष में आता।

आरोपों की सच्चाई से जुड़ा मामला

हाईकोर्ट ने कहा कि यह मामला केवल बच्चे की वैधता का नहीं है। यह पति द्वारा लगाए गए व्यभिचार के आरोपों की सच्चाई जांचने का है। कोर्ट ने फैमिली कोर्ट के डीएनए टेस्ट आदेश को सही ठहराया। महिला पुलिस कॉन्स्टेबल की याचिका खारिज कर दी गई।

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