नगर निगम के भ्रष्ट बेलदार असलम खान को जब्त 3 करोड़ की ज्वेलरी नहीं मिलेगी वापस

Sanjay Gupta | Jul 09, 2026, 12:37 IST
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aslam khan lokayukta raid case high court
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इंदौर नगर निगम के भ्रष्ट बेलदार असलम खान को हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। आय से अधिक संपत्ति मामले में जब्त उसकी मां और पत्नी के नाम की करोड़ों की ज्वेलरी फिलहाल वापस नहीं मिलेगी।

समझें क्या है पूरा मामला

  • आय से अधिक संपत्ति मामले में असलम खान के यहां 2018 में लोकायुक्त ने छापा मारा था।
  • जिला कोर्ट ने 70 लाख की गारंटी पर परिवार को ज्वेलरी लौटाने का आदेश दिया था।
  • लोकायुक्त ने इस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी।
  • हाईकोर्ट ने जिला कोर्ट के आदेश पर रोक लगाकर ज्वेलरी लोकायुक्त की कस्टडी में रखने के निर्देश दिए।
  • असलम खान पर वेतन से 1216 फीसदी अधिक संपत्ति अर्जित करने का आरोप है।
इंदौर के चर्चित भ्रष्ट अधिकारी-कर्मचारियों में शामिल बेलदार असलम खान के यहां वर्ष 2018 में लोकायुक्त ने छापा मारा था। छापे के दौरान एक निचले स्तर के कर्मचारी के पास मिली अकूत संपत्ति देखकर अधिकारी भी हैरान रह गए थे।
जांच में उसके पास बड़ी मात्रा में सोने की ज्वेलरी और अन्य संपत्तियां मिली थीं। लोकायुक्त कार्रवाई में करीब दो किलो सोने की ज्वेलरी बरामद हुई थी। इसके अलावा उसके यहां करीब एक किलो सोने के बार भी मिले थे। मामले के सामने आने के बाद असलम खान की संपत्ति को लेकर काफी चर्चा हुई थी।

हाल ही में जिला कोर्ट ने एक आवेदन पर लोकायुक्त को आदेश दिया था। इस आदेश में 70 लाख रुपए की गारंटी पर असलम खान के परिवार को जब्त ज्वेलरी लौटाने के निर्देश दिए गए थे। अब हाईकोर्ट ने जिला कोर्ट के इस आदेश पर रोक लगा दी है।

जिला कोर्ट ने यह दिया था आदेश

मोहम्मद असलम खान पिता अफजल खान, निवासी अशोका कॉलोनी, माणिक बाग रोड, इंदौर ने कोर्ट में कहा था कि अगस्त 2018 में लोकायुक्त छापे के दौरान उसकी पुत्रियों सिदरा खान, राहेमीन खान और अलिस्बा खान के साथ मां बिलकिस खान की ज्वेलरी भी जब्त की गई थी। उसकी पुत्रियां और मां इस मामले में आरोपी नहीं हैं, इसलिए उनकी ज्वेलरी लौटाई जाए।

छापे के समय इस ज्वेलरी की कीमत 58 लाख रुपए आंकी गई थी, जो अब बढ़कर 3 करोड़ रुपए से अधिक हो चुकी है। जिला कोर्ट ने 70 लाख रुपए की गारंटी पर ज्वेलरी लौटाने का आदेश दिया था। कोर्ट ने ज्वेलरी लौटाने के साथ कुछ शर्तें भी तय की थीं।

इसके तहत ज्वेलरी को न तो बेचा जा सकेगा और न ही उसमें किसी तरह का बदलाव किया जा सकेगा। ज्वेलरी का उपयोग केवल पहनने और अपने पास रखने के लिए किया जा सकेगा। कोर्ट के निर्देश पर जरूरत पड़ने पर ज्वेलरी को दोबारा पेश करना होगा।

लोकायुक्त गया था हाईकोर्ट

जिला कोर्ट के आदेश के खिलाफ लोकायुक्त इंदौर ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की। लोकायुक्त का कहना था कि मामला अभी विचाराधीन है। ऐसे में जब्त संपत्ति लौटाना उचित नहीं होगा। गंभीर आरोपों के चलते संपत्ति फिलहाल वापस नहीं दी जानी चाहिए।

लोकायुक्त ने इस मामले में असलम खान की मां बिलकिस खान और पत्नी राहेला खान को भी पक्षकार बनाया था।
इस फैसले के खिलाफ मामला हाईकोर्ट पहुंचा। हाईकोर्ट ने जिला कोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी है।

कोर्ट ने निर्देश दिए हैं कि ज्वेलरी फिलहाल लोकायुक्त की कस्टडी में ही रखी जाए। साथ ही सभी पक्षों से जवाब मांगते हुए अंतिम सुनवाई करने की बात कही है।

1 किलो सोने के बार वापस नहीं होंगे

जिला कोर्ट ने असलम खान के यहां से जब्त एक किलो सोने के 12 गोल्ड बार रिलीज करने से पहले ही इनकार कर दिया था। इन्हें कथित अवैध कमाई से खरीदा गया माना गया है। इनकी मौजूदा कीमत डेढ़ करोड़ रुपए से अधिक है। इन्हें भी वापस नहीं किया जाएगा।

1216 फीसदी अधिक कमाई की थी

लोकायुक्त जांच में सामने आया था कि असलम खान का वेतन केवल 18 हजार रुपए प्रतिमाह था, लेकिन उसने अपनी आय से 1216 फीसदी अधिक संपत्ति अर्जित की थी। आयकर विभाग की बेनामी विंग ने भी उसकी कई संपत्तियां अटैच की हैं। वहीं ईडी ने भी इस मामले में कार्रवाई की है।

लोकायुक्त छापे के दौरान यह सब मिला था

अगस्त 2018 में असलम खान पर पड़ा लोकायुक्त का छापा नगर निगम में भ्रष्टाचार के सबसे बड़े खुलासों में से एक माना जाता है। महज 18 हजार रुपए मासिक वेतन पाने वाले असलम के पास करोड़ों रुपए की संपत्ति मिली थी। इनमें से अधिकांश संपत्तियां रिश्तेदारों के नाम पर थीं।

असलम के भाई और अन्य रिश्तेदार हाल ही में इंदौर नगर निगम के 150 करोड़ रुपए के फर्जी बिल मामले में भी आरोपी बने हैं। इसमें बाई एहतेश्याम उर्फ काकू का नाम प्रमुखता से सामने आया था।

लोकायुक्त जांच में सामने आया कि असलम के पास 25 लाख रुपए नकद, एक किलो सोने के बिस्किट सहित करीब दो किलो सोना और एक किलो चांदी थी।

साथ ही 21 संपत्तियों के दस्तावेज और नगर निगम की फाइलें भी बरामद हुई थीं। उस समय कुल संपत्ति का मूल्य 4 करोड़ 40 लाख रुपए आंका गया था। वहीं सूत्रों के अनुसार बाजार मूल्य तब भी 25 करोड़ रुपए से अधिक था।

1998 में निगम में भर्ती हुआ असलम

असलम नगर निगम की रिमूवल शाखा में बेलदार था। वह निजी कॉलेज की नौकरी छोड़कर वर्ष 1998 में नगर निगम में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी बना था। बाद में उसने रियल एस्टेट से जुड़े काम शुरू किए और भवन अनुज्ञा शाखा में नक्शे पास कराने के नाम पर बड़े बिल्डरों और समूहों से कमाई की। उसे 2010, 2011, 2015 और 2017 में निलंबित भी किया गया, लेकिन बाद में वह बहाल हो गया।

  • छापे में 1.60 लाख के बकरे भी मिले थे
  • दो कार, एक जीप और एक बुलेट।
  • 1.60 लाख रुपए कीमत के पांच बकरे।
  • पिता के नाम मकान, जिस पर असलम का नाम भी दर्ज था।
  • घर के पास मकान और खाली जमीन।
  • पीछे की ओर तीन मंजिला मकान, जिसमें किराएदार रहते हैं, साथ ही फ्लैट।
  • कंचनबाग और एबी रोड पर कार्यालय।
  • 100-100 ग्राम के 12 बिस्किट सहित करीब दो किलो सोना।
  • 25 लाख रुपए नकद और छह बैंक खाते।
  • कमलापुर (देवास) में 1.07 और 0.93 हेक्टेयर जमीन, जिसे 54 लाख रुपए में खरीदा गया था।
  • चिकली (महू) में 0.212 हेक्टेयर जमीन।
  • सुखलिया में चार प्लॉट, सुतार गली में पैतृक संपत्ति, स्कीम नंबर 103 और 136 में प्लॉट।
  • जागृति सहकारी संस्था में मां के नाम व राजगृही में पत्नी के नाम भूखंड
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