बनारस मणिकर्णिका घाट पर सोया इंदौर जिला प्रशासन, सुप्रीम कोर्ट से हाईकोर्ट तक खासगी ट्रस्ट संपत्ति पर आदेश

Sanjay Gupta | Jan 20, 2026, 15:19 IST
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banaras manikarnika ghat indore administration court orders
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में मणिकर्णिका घाट को लेकर बवाल जारी है। कांग्रेस और विपक्षी दल इस पर हमलावर हैं। वहीं, सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट इन संपत्तियों में बदलाव पर रोक लगा चुके हैं।

News In Short

  • बनारस का मणिकर्णिका घाट मां देवी अहिल्याबाई ने 1771 में बनवाया था।
  • यह घाट होलकर राज्य की संपत्तियों के संरक्षण के लिए बने खासगी ट्रस्ट के अधीन है।
  • इस ट्रस्ट को लेकर सुप्रीम कोर्ट 21 जुलाई 2022 को लंबा आदेश दे चुका है।
  • वहीं, हाईकोर्ट इंदौर ने 24 जनवरी 2023 को आदेश देकर संपत्ति में दखल पर रोक लगा दी थी।
  • ऐसे में यहां पर हो रहा विकास काम इन दोनों ही आदेशों की अवमानना है।

News In Detail

INDORE. होलकर साम्राज्य के भारत में विलीन होने के बाद इनकी संपत्तियों के रखरखाव के लिए 1962 में खासगी ट्रस्ट का गठन किया गया था। इस ट्रस्ट में मां अहिल्या के जरिए निर्मित 206 संपत्तियों को शामिल किया गया है। इसमें मणिकर्णिका घाट भी शामिल है।

होलकर के वंशजों के बीच चल रहे संपत्ति विवाद को लेकर हाईकोर्ट इंदौर में केस लगा था। इसमें सुनवाई अभी जारी है। 24 जनवरी 2023 को (याचिका क्रमांक FA702/2022) को अंतरिम आदेश दिया गया था। इसमे कहा गया है कि इन संपत्तियों में किसी भी तरह का बदलाव नहीं किया जाए। इसके पहले सुप्रीम कोर्ट में 21 जुलाई 2022 को लंबा आदेश जारी हुआ था।

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सुप्रीम कोर्ट ने जारी की थी लंबी गाइडलाइन

सुप्रीम कोर्ट में केस खासगी ट्रस्ट की संपत्तियों के बिकने को लेकर था। इसके खिलाफ पहले ही हाईकोर्ट ने ईओडब्ल्यू से जांच कराए जाने तक के आदेश दिए थे।

इसमें महारानी उषा देवी और खासगी ट्रस्ट सुप्रीम कोर्ट गए थे। यहां 21 जुलाई 2022 को आदेश हुए कि नए सिरे से रजिस्ट्रार पब्लिक ट्रस्ट इस ट्रस्ट को पुनर्गठित करे। संपत्तियों के बिकने की जांच करें और यदि इसमें नुकसान हुआ है, तो उसकी भरपाई की जाए।

ट्रस्ट में संभागायुक्त, रिटायर आईएएस भी, लेकिन सब चुप

खासगी ट्रस्ट में मध्य प्रदेश शासन की ओर से संभागायुक्त और पीडब्ल्यूडी इंजीनियर के साथ ही केंद्र से रिटायर आईएएस अवनी वैश्य भी सदस्य हैं। इसके बावजूद इनके जरिए किसी तरह की आपत्ति नहीं ली गई है।

बनारस में ट्रस्टी यशवंत राव रेंण्डल जरूर गए और उन्होंने टूटी मूर्तियों की मांग की। वहीं, किसी ने भी मौके पर कोर्ट के आदेश का हवाला देकर काम रोकने की कोशिश नहीं की।

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बनारस की यह संपत्तियां ट्रस्ट में शामिल

खासगी ट्रस्ट की संपत्तियों की सूची में बनारस का मणिकर्णिका घाट भी शामिल है। इसके अलावा, श्री महादेव मंदिर, दशावमेध घाट, जनाना घाट, सीतलामाता मंदिर के पीछे चबूतरा भी इसमें है। इसके अलावा अहिल्श्वेर मंदिर, तारेकश्वर मंदिर, मणिकर्णेशवर मंदिर और कुछ मकान नंबर भी इस सूची में शामिल हैं।

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पाल समाज आया विरोध में

उधर अखिल विश्व पाल क्षत्रिय महासभा इसे लेकर विरोध आंदोलन कर रही है। उनका आंदोलन रविवार, 18 जनवरी से बनारस में शुरू हुआ है। इन्होंने कलेक्टर बनारस को ज्ञापन भी दिया है। सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट इंदौर के आदेश का हवाला देकर काम रोकने की मांग की है।

समाज के अध्यक्ष विजय पाल सिंह ने कहा कि यह गैरकानूनी काम हो रहा है। इन कोर्ट आदेशों के साथ ही एनजीटी का भी आदेश है कि गंगा नदी के किनारे पर 200 मीटर तक काम नहीं हो सकता है।

इसके बाद भी यह काम गैरकानूनी हो रहा है। पाल ने द सूत्र को बताया कि जहां काम चल रहा है और टूटी मूर्तियां हैं, वहां पर प्रशासन ने पुलिस लगा दी है, ताकि कोई अंदर न जा सके। वहां निर्माण के लिए पुराने घाट और अन्य निर्माण तोड़े जाने के सबूत अलग ही दिख रहे हैं।

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इससे पहले प्रशासन ने दिखाई थी सक्रियता

इस मामले में जिला प्रशासन की चुप्पी सबसे बड़ा सवाल है। किसी ने सुप्रीम कोर्ट, हाईकोर्ट के आदेशों को झांकने की भी जहमत नहीं उठाई है। संभागायुक्त सुदाम पी खाड़े इसमें सदस्य हैं, लेकिन कोई एक्शन नहीं हुआ है।

ना ही रजिस्ट्रार पब्लिक ट्रस्ट यानी एसडीएम गोपाल वर्मा के जरिए कोई कदम उठाया गया है। इसके पहले जब हरिद्वार में कुशावर्त घाट को बेचा गया था, तब तत्कालीन कलेक्टर आकाश त्रिपाठी खुद हरिद्वार गए थे। इनके साथ, पूरी टीम भी गई थी।

इसके बाद इन संपत्तियों को शासकीय मानकर इन्हें चिन्हित किया गया था। फिर मामला हाईकोर्ट गया और यहां आदेश हुआ कि यह संपत्ति बिकना आर्थिक अपराध है और ईओडब्ल्यू के जरिए जांच कराई जाए।

फिर अपील में केस सुप्रीम कोर्ट गया और वहां लंबी गाइडलाइन्स और निर्देशों के साथ मामला तय हुआ था। वहीं, इन आदेशों का अब तक पालन नहीं किया गया है।

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