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News In Short
काशी में मणिकर्णिका घाट पर रिनोवेशन के दौरान बुलडोजर चलाया गया।
मां अहिल्या और भगवान शिव की मूर्तियां तोड़ी गईं, जिससे नाराजगी बढ़ी।
मणिकर्णिका घाट का निर्माण 1771 में मां अहिल्याबाई ने कराया था।
खासगी ट्रस्ट ने टूटी मूर्तियों की मांग काशी प्रशासन से की।
सुप्रीम कोर्ट ने ट्रस्ट संपत्तियों की बिक्री पर रोक लगाई थी।
News In Detail
INDORE. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र काशी/बनारस में मणिकर्णिका घाट पर बुलडोजर चल गया है। रिनोवेशन के चलते घाट के एक हिस्से को तोड़ा गया है। इसी दौरान वहां लगी मां अहिल्या और भगवान शिव की मूर्तियां भी टूट गईं। इसके चलते होलकर राजवंश से लेकर धनगर व पाल समाज में भारी नाराजगी है।
इसका निर्माण लोकमाता मां देवी अहिल्याबाई ने साल 1771 में कराया था। इसके बाद साल 1791 में जीर्णोद्धार भी कराया गया था।
इस घाट को विकास के नाम पर तोड़ने से समाज में भारी नाराजगी है। समाजजन का कहना है कि मां अहिल्याबाई की विरासत के साथ ऐसा करना आहत करने वाला है।
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खासगी ट्रस्ट की संपत्ति में शामिल
यह घाट होलकर राजवंश की संपत्तियों की देखभाल करने वाले खासगी ट्रस्ट की संपत्ति की सूची में भी शामिल है। ट्रस्ट की ओर से भी काशी प्रशासन को पत्र लिखा गया है। साथ ही, उनसे वह टूटी हुई मां अहिल्या और भगवान शिव की मूर्तियों की मांग की गई है।
ट्रस्टी यशवंत राव होलकर ने कहा कि विकास जरूरी है लेकिन विरासत को सुरक्षित रखा जाना चाहिए। इसमें लापरवाही पर अधिकारियों पर कार्रवाई होनी चाहिए और मूर्तियां ट्रस्ट को सौंपी जानी चाहिए।
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84 घाटों में शामिल है ये घाट
यह घाट गंगा नदी के किनारे काशी में बने 84 घाटों में से एक अहम घाट है। पौराणिक कथानुसार इसी घाट पर माता पार्वती की कर्णिका (कान की मणि) गिरी थी, इसलिए यह नाम पड़ा। माता अहिल्याबाई ने यहां श्रद्धालुओं के लिए कई सुविधाएं विकसित की थीं।
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Sootr Knowledge
सुप्रीम कोर्ट का भी स्टे है
इंदौर में खासगी ट्रस्ट को लेकर एक बड़ा विवाद चल रहा है। यह विवाद हरिद्वार के कुशावर्त घाट के बिकने के बाद शुरू हुआ था। जांच में पता चला कि ट्रस्ट की कई संपत्तियां बेच दी गईं थी। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला भी सुनाया है।
इसके बाद मामला हाईकोर्ट, सुप्रीम कोर्ट तक गया। इसमें सुप्रीम कोर्ट ने रजिस्ट्रार पब्लिक ट्रस्ट को कई निर्देश दिए हैं। इसमें कहा गया कि इसका नए सिरे से पंजीयन करने और फिर संपत्तियों की बिक्री की जांच करने व यथास्थिति बनाए आदि निर्देश दिए गए हैं। ऐसे में ट्रस्ट की संपत्ति पर यह तोड़फोड़ सुप्रीम कोर्ट के आदेश का भी उल्लंघन है।
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आधुनिक शवदाह गृह बनेगा
बताया जा रहा है कि यहां पर अत्याधुनिक शवदाह गृह बनेगा। अधिकारियों का कहना है कि कोई मंदिर नहीं तोड़ा गया है, घाट के सभी मंदिरों का सुंदरीकरण होगा। विकास योजना में 18 करोड़ की लागत से काम होगा। इसका शिलान्यास पीएम के जरिए 17 जुलाई 2023 को हुआ था। यहां 29 हजार 350 वर्ग मीटर में काम होगा।
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