इंदौर मां देवी अहिल्याबाई के होलकर राजवंश की विरासत को लेकर खड़ा हुआ विवाद, असली वंशज कौन?

Sanjay Gupta | Jan 12, 2026, 15:39 IST
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holkar rajwansh virasat controversy indore
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इंदौर के होलकर राजवंश के वंशवृक्ष को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। यह राजवंश महारानी मां देवी अहिल्याबाई के कारण अलग पहचान रखता है। इस राजवंश में अंतिम महारानी का दर्जा उषा देवी को मिला था। वहीं, इसके आगे वंशावली क्या है, इसे लेकर विवाद खड़ा हो गया है।

News In Short

  • होलकर राजवंश इंदौर और महेश्वर रीजन में रहा है।
  • अंतिम राजा यशवंतराव होलकर थे, इसके बाद उषा देवी को महारानी माना गया।
  • इस राजवंश में ही रानी अहिल्याबाई होलकर थीं, जो अपनी न्यायप्रियता और प्रशासन के लिए पहचानी जाती हैं।
  • इस राजवंश का खास ट्रस्ट है, जिसके तहत देश भर में कई संपत्तियां हैं।

News In Detail

INDORE. प्रतिष्ठित होलकर राजवंश की वंशावली को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। इस मामले में स्वर्गीय श्रीमंत मल्हारराव तात्या साहेब होलकर के पुत्र जगदीपेंद्र, अंशुमंत और गौतमराव ने महेश्वर कोर्ट में केस दायर किया है।

इसमें रिचर्ड (शिवाजीराव) पिता यशवंतराव होलकर, यशवंतराव रेण्डोल पिता रिचर्ड होलकर और महारानी उषा देवी को पक्षकार बनाया गया है। इसमें मुख्य बात यह रखी गई है कि रिचर्ड और उनके पुत्र यशवंतराव दोनों का ही होलकर राजवंश से कोई वास्ता नहीं है।

वे होलकर राजवंश और साथ ही भारत सरकार के नियमों के तहत राजवंश का हिस्सा नहीं हैं। ना ही इनका कभी भी राजवंश की वंशावली में जिक्र हुआ है, लेकिन इसके बाद भी यह होलकर राजवंश का उपयोग करते हैं। साथ ही, उनकी संपत्ति खासकर महेश्वर किले को अपने पास रखे हुए हैं।

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इस दावे के लिए यह रखे गए आधार

इस दावे के लिए तर्क यह दिए गए कि होलकर राजवंश के अंतिम महाराज यशवंतराव होलकर (1926 से 1961 तक) की हिंदू महिला से विधिक विवाह से संतान केवल उषा देवी थी। वह यशवंतराव और संयोगिता देवी की बेटी थीं।

यशवंतराव की दूसरी शादी एक अमेरिकन महिला से हुई, लेकिन उनका तलाक हो गया। तीसरी शादी अमेरिकन महिला यूफेरिया से हुई, जिससे संतान रिचर्ड होलकर है।

वहीं, होलकर राजवंश की परंपरा के अनुसार यह विवाह मान्य नहीं किया गया, ना ही भारत सरकार ने रिचर्ड को राजवंश का उत्तराधिकारी माना, जिसके चलते उषा देवी को महारानी का दर्जा दिया गया था।

इसके बाद भी रिचर्ड होलकर और उनके पुत्र यशवंतराव रेण्डोल द्वारा राजवंश का दर्जा लिया जाता है। साथ ही, वे होलकर की संपत्तियों पर काबिज हैं। इसलिए उनके दावे खारिज किए जाएं।

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राजवंश की वंशावली में इनका नाम

इसके साथ ही राजवंश की वंशावली को बताया गया है। इसमें यशवंतराव होलकर द्वितीय के जरिए इसमें मल्हारराव तात्यासाहेब होलकर के खर्चों को मान्य किया गया है। गर्वनमेंट आफ हिज हाईनेस द महाराजा होलकर ऑफ इंदौर के खर्चों के अनुसार बजट एस्टीमेट में रिचर्ड होलकर का नाम नहीं है।

उनके वंशज जगदीपेंद्र भोपाल में रहते हैं और वहीं उनके भाई अंशुमंत और गौतमराव इंदौर में रहते हैं। तीनों भाइयों द्वारा दावा किया गया है कि ऐसे में इस होलकर राजवंश के सही उत्तराधिकारी उषा देवी और उनके साथ हम हैं।

वहीं उषा देवी, शादी के बाद होलकर राजवंश की जगह सतीशचंद्र मल्होत्रा परिवार की हैं। इसलिए संपत्ति व राजवंश पर पूरा वैधानिक अधिकार उषा देवी के साथ हम तीनों (जगदीपेंद्र, अंशुमंत, गौतमराव) का है।

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उधर उदयसिंह ने गाजियाबाद में कराया राजतिलक

यह मामला केवल उषा देवी और स्वर्गीय मल्हारराव के तीन पुत्रों के बीच तक सीमित नहीं रहा। उधर उदय सिंह पाल ने भी दावा किया है कि वह होलकर राजवंश के उत्तराधिकारी हैं।

पाल समाज ने 28 दिसंबर 2025 को गाजियाबाद में उनका राजतिलक तक कर दिया था। साथ ही, उन्हें सही वंशज बताया गया है। उदयसिंह ने एसडीएम राउ रजिस्ट्रार पब्लिक ट्रस्ट में भी वाद लगाकर अपना दावा जताया था।

वहीं, उनका यह दावा दस्तावेजों के आधार पर सिरे से नकार दिया गया कि कहीं भी किसी भी दस्तावेज में उनका नाम वंशावली में दर्ज नहीं है। केवल होलकर सरनेम के चलते उनका दावा नहीं बनता है।

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सुप्रीम कोर्ट में केस समझौते से हुआ था खत्म

इन्हीं के बीच में संपत्ति को लेकर विवाद सुप्रीम कोर्ट भी पहुंचा था। वहीं, इस दौरान इस केस को राजीनामे से खत्म कर दिया गया। इसके बावजूद, इस आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि केस भले ही राजीनामे से खत्म हो रहा है।

इससे किसी के अधिकार खत्म नहीं होते हैं। इस केस से सुलह में तीनों भाईयों को उम्मीद थी कि संपत्ति को लेकर उषा देवी के साथ सामंजस्य से मामला खत्म हो जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इसके बाद फिर केस लगा है।

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खासगी ट्रस्ट की संपत्तियां विवाद में

इसी राजवंश की संपत्तियों में 200 से ज्यादा बहुमूल्य संपत्तियां हैं। इनके रखरखाव के लिए खासगी ट्रस्ट है। इसमें सेटलर के तौर पर महारानी उषा देवी हैं। वहीं उनके जरिए सतीश चंद्र मल्होत्रा और यशवंतराव को ट्रस्टी नियुक्त किया हुआ है।

मध्यप्रदेश सरकार द्वारा संभागायुक्त व पीडब्ल्यूडी इंजीनियर सदस्य हैं, तो वहीं भारत सरकार की ओर से रिटायर आईएएस अवनी वैश्य सदस्य हैं। इसमें भी उषा देवी ने यशवंतराव को सेटल बनाने के लिए पत्र लिखा था, जिसे मान्य नहीं किया गया।

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