2158d9da-694
बैतूल में बनेगा देश का पहला लैंडस्केप प्रोजेक्ट, बदलेगी आदिवासियों की किस्मत
Aman Vaishnav | Jul 02, 2026, 10:19 IST
बैतूल में बनेगा देश का पहला लैंडस्केप प्रोजेक्ट
बैतूल में 100 करोड़ की लागत से देश का पहला लैंडस्केप प्रोजेक्ट शुरू हो रहा है। प्रोजेक्ट का मुख्य उद्देश्य जंगलों और वन्यजीवों को सुरक्षित रखना है। साथ ही वनाधिकार पाने वाले हजारों परिवारों की कमाई को बढ़ाना है।
समझें क्या है पूरा मामला...
- बैतूल में 100 करोड़ रुपए का लैंडस्केप प्रोजेक्ट तैयार हो रहा है।
- इसमें जंगल, वन्यजीव, जल और वनाधिकार वाले परिवारों को एक साथ जोड़ा जाएगा।
- सतपुड़ा से मेलघाट तक का पूरा वन क्षेत्र एक इकाई माना जाएगा।
- मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र मिलकर यह मॉडल तैयार करेंगे।
- सफल रहने पर इसे पूरे देश में लागू किया जा सकता है।
इस योजना में पहली बार जंगल, वन्यजीव, नदियां और वनाधिकार पाने वाले हजारों परिवार एक ही ढांचे में शामिल किए जाएंगे। अभी तक जंगलों का प्रबंधन अलग-अलग वन मंडलों के हिसाब से होता रहा है। लेकिन जंगल किसी सीमा को नहीं मानते।
आखिर है क्या यह मॉडल
इसका मकसद साफ है। जंगल और गांव को अलग-अलग नहीं, बल्कि एक-दूसरे के पूरक के तौर पर देखा जाएगा।
99b9fbe3-d16
वनवासियों की सबसे बड़ी चुनौती
दो राज्यों की साझा योजना
इसलिए मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र मिलकर समन्वित रणनीति बनाएंगे। अभी तक दोनों राज्यों की योजनाएं अलग-अलग बनती रही हैं। अब साझा कार्यप्रणाली पर काम होगा।
पूरा प्रशासन होगा शामिल
कृषि, उद्यानिकी, पशुपालन, ग्रामीण विकास और जल संसाधन विभाग भी इसमें भागीदार बनेंगे। मकसद है सरकारी योजनाओं को जोड़कर ग्रामीणों तक ज्यादा फायदा पहुंचाना।
5db51beb-af1
तीन वैश्विक संधियों पर आधार
- पहली है जलवायु परिवर्तन से जुड़ी यूएनएफसीसीसी
- दूसरी है भूमि क्षरण रोकने वाली यूएनसीसीडी
- तीसरी है जैव विविधता से जुड़ी सीबीडी
अभी कहां तक पहुंचा काम
इसके बाद वाशिंगटन स्थित कार्यालय से मंजूरी मिलने पर विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन यानी डीपीआर (DPR – Detailed Project Report) तैयार होगा। नवंबर तक डीपीआर पेश करने का लक्ष्य रखा गया है।
हाल ही में बैतूल में इसे लेकर राष्ट्रीय स्तर की बैठक हुई। इसमें वन लैंडस्केप प्रबंधन से जुड़े विशेषज्ञों और अधिकारियों ने भाग लिया।
76756670-0b1
कौन कर रहा है नेतृत्व
राकेश भूषण सिन्हा का कहना है कि वन अधिकार कानून लागू होने के बाद जंगलों के आसपास रहने वाले हजारों परिवारों को वन जमीन पर अधिकार मिला है।
राकेश भूषण ने बताया कि इसका मकसद था कि उन्हें सम्मान के साथ रोजगार और बेहतर जिंदगी मिले। अब सबसे बड़ी चुनौती यह है कि इन परिवारों की कमाई बढ़े, लेकिन इसके लिए जंगलों पर ज्यादा दबाव भी न पड़े।
वहीं दक्षिण बन मंडल के डीएफओ अरिहंत ने बताया कि इस प्रोजेक्ट का क्रियान्वयन मध्यप्रदेश के नर्मदापुरम, बैतूल और छिंदवाड़ा जिलों के साथ महाराष्ट्र के मेलघाट तक फैले वन्यजीव कॉरिडोर क्षेत्र में प्रस्तावित है।
अगर यह पायलट प्रोजेक्ट सफल रहता है, तो इसे पूरे देश में लागू करने की तैयारी होगी। इससे न सिर्फ जंगल और वन्यजीव सुरक्षित रहेंगे, बल्कि वनाधिकार वाले परिवारों को भी बेहतर जिंदगी मिल सकेगी।
ये खबरें भी पढ़िए...
भोपाल में 15 जुलाई से शुरू होगी इलेक्ट्रिक बसें, 2 रुपए में तय होगा 1.5 KM का सफर
महंगाई पर लगा ब्रेक, नहीं बढ़ेंगे रोजमर्रा की चीजों के दाम
नाम की आर्थिक राजधानी रह गया इंदौर! कमाई के मामले में भोपाल ने मारी बाजी
कांग्रेस समाज में फूट डालकर सत्ता की लूट करना चाहती है, सुधांशु बोले, भूपेश बघेल को पंजाब से भगाकर गुवाहाटी में पटका
By Arun Tiwari
मंत्रालय से बाहर फिर हो सकती है मोहन कैबिनेट की बैठक, गांधी सागर में 17 नवंबर की तारीख प्रस्तावित
By Amresh Kushwaha
अफसरों की गलती से मध्यप्रदेश के युवाओं की नौकरी पर संकट! कहीं मान्य, कहीं अमान्य जाति प्रमाणपत्र, आखिर जिम्मेदार कौन?
By Atul Dwivedi
शिखर अग्रवाल मामले में गहलोत की CBI-ED जांच की मांग, CM भजनलाल से पूछा- चुप क्यों हैं?
By Mukesh Sharma
बीजेपी विधायक डोमनलाल कोर्सेवाड़ा का निधन, हैदराबाद में चल रहा था इलाज, लंबे समय से थे बीमार
By Harrison Masih
प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों में EWS आरक्षण पर HC सख्त, केंद्र से MP सरकार तक पर लटकी अवमानना की तलवार
By Neel Tiwari
छत्तीसगढ़ के वन कर्मचारियों के लिए खरीदी जा रही 29 हजार की लाठी, बाजार से दोगुनी कीमत पर उठे सवाल
By Arun Tiwari