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Photograph: (the sootr)
News in Short
- भागीरथपुरा कांड को लेकर हाईकोर्ट में डेढ़ घंटे तक बहस चली।
- इसमें याचिकाकर्ताओं ने उच्च स्तरीय कमेटी को आंखों में धूल झोंकने वाला बताया।
- साथ ही कहा कि अभी तक किसी पर भी आपराधिक केस नहीं हुआ, यही काम बावड़ी कांड में हुआ था।
- हाईकोर्ट में इस घटना का कारण शासन ने पुलिस चौकी के ट्वायलेट को बताया, हाईकोर्ट ने केमिकल की आशंका जताई।
- इसमें मौतों के आकंड़ों पर भी आपत्ति हुई और मुआवजा नहीं देने और केवल राहत राशि दो-दो लाख पर भी आपत्ति ली गई।
INDORE. भागीरथपुरा में दूषित पानी से हुई मौत को लेकर हाईकोर्ट में जनहित याचिकाओं पर 20 जनवरी मंगलवार को डेढ़ घंटे तक लंबी बहस चली। इसका घटना का कारण शासन ने पुलिस चौकी के ट्वायलेट को बताया।
इस पर हाईकोर्ट ने कहा कि क्या इससे पानी इतना दूषित हो सकता है, कहीं कोई केमिकल तो नहीं मिला। लेकिन पूरी बहस में कोई ठोस कारण सामने नहीं आ सका। उधर मौत, मुआवजे के साथ ही उच्च स्तरीय कमेटी पर भी याचिकाकर्ताओं ने तगड़ी बहस की। सीएस अनुराग जैन वीसी के जरिए उपस्थित रहे।
News in Details
भागीरथपुरा में गंदे पानी को लेकर जैसा कि सबसे पहले द सूत्र ने बड़ा कारण बताया था कि पुलिस चौकी के ट्वायलेट से लीकेज मैन लाइन में गया। यही बात शासन द्वारा औपचारिक तौर पर मंगलवार 20 जनवरी की सुनवाई में रखी गई।
इस पर हाईकोर्ट जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की बेंच ने कहा कि सीवरेज व वाटल लाइन कई जगह मिलती है, लेकिन क्या इतना अधिक इससे पानी दूषित हो सकता है कि जान चली जाए। कहीं कोई केमिकल तो नहीं मिला। क्या ठोस कारण रहा, क्या यह सामने आया।
इस पर शासकीय अधिवक्ता ने कहा कि यह कुछ कारणों में से एक रहा, बोरवेल में भी पानी दूषित आया, जो मैन लाइन में मिला। वरिष्ठ अधिवक्ता अजय बागड़िया ने कहा कि कान्ह नदी के किनारे यह भागीरथपुरा है. यहां से दूषित पानी बोरिंग में गया और फिर सीवेरज लाइन और नर्मदा लाइन में मिला, जिससे यह घटना हुई। ओवरआल अभी तक इस घटना का कोई ठोस कारण सामने नहीं आया है।
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उच्च स्तरीय कमेटी पर नहीं भरोसा
शासन द्वारा बताया गया का चार सदस्यीय उच्च स्तरीय कमेटी का गठन कर दिया है। यह एक माह में अधिकतम रिपोर्ट देगी। सीएस अनुराग जैन ने बताया कि कमेटी में संभागायुक्त को भी रखा है। साथ ही मानीटरिंग लेवल में निगम स्तर पर संभागायुक्त देख रहे हैं, फिर एसीएस संजय दुबे देख रहे हैं और उनसे डे टू डे बेस पर मैं जानकारी ले रहा हूं। कमेटी के काम की जानकारी देते हुए बताया कि यह भी देखेगी किस अधिकारी कर्मचारी की लापरवाही से यह हुआ है। इस पर बागडिया ने आपत्ति लेते हुए कहा कि कमेटी केवल अधिकारियों को बचाने के लिए बनी है।
उपहार सिनेमा हो या फिर दक्षिण में भगदड़ केस वहां तत्काल अधिकारियों को हटाया गया और गैर इरादतन हत्या के केस हुए। लेकिन यहां पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। जब सरकार ने कार्ऱवाई नहीं की तो फिर सीनियर अधिकारी क्या करेंगे। इन पर हमे कोई भरोसा नहीं है। इसलिए हाईकोर्ट के रिटायर जस्टिस की अध्यक्षता में जांच कमेटी बने या फिर जैसा हाईकोर्ट उचित समझे, उनकी मानीटरिंग में कमेटी रहे, जो सीधे उन्हें रिपोर्ट दे।
अभी तक किसी अधिकारी पर कोई केस नहीं
अधिवक्ता मनीष यादव ने कहा कि पहले जिम्मेदार पर एफआईआर होना चाहिए, जांच कमेटी काम करती रहे। इसके पहले बावड़ी हादसे में किसी अधिकारी कर्मचारी पर कार्रवाई नहीं हुई, जिन्हें सस्पेंड किया तो उन्हें बाद में बहाल कर दिया गया।
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मुआवजा में एक रुपए भी नहीं दिया गया
अधिवक्ता विभोर खंड़ेलवाल ने कहा कि अभी तक मुआवजा नहीं दिया गया है केवल दो-दो लाख की राहत राशि दी गई है। जबकि जबलपुर में दस लाख दिए, वहीं कहीं बस नहर में गिरती है तो पांच-पांच लाख देते हैं। बागडिया ने भी कहा कि केवल राहत राशि दी वह भी रेडक्रास द्वारा, शासन ने कुछ नहीं दिया।
रिपोर्ट दबा दी, ठेकेदार ने काम ही नहीं किया
बागडिया ने फिर से प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड की 2017 की रिपोर्ट रखते हुए कहा कि इसमें पहले ही आ चुका था कि पूरे शहर में दूषित पानी है लेकिन अधिकारी दबाकर रखे रहे और किसी ने कुछ नहीं किया। ऐसे अधिकारियों को तो टांग देना चाहिए। हर रिपोर्ट में ई कोलाई और फीकल कोलीफार्म बैक्टीरिया मिले हैं, लेकिन कुछ नहीं किया।
उन्होंने यह भी कहा कि फरवरी 2023 में मालवा इंजीनियर को भागीरथपुरा का ठेका मिला, एक साल में काम करना था इसमें लिखा था कि इससे दूषित पानी की समस्या दूर होगी। लेकिन ठेका होने के दो-ढाई साल बाद यह घटना आ जाती है, फिर ठेकेदार ने क्या किया और निगम ने उस ठेकेदार पर क्या एक्शन ली, पहले तो इंजीनियर पर केस होना चाहिए।
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हाईकोर्ट करेगा आदेश
हाईकोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के बाद कहा कि इस मामले में वह औपचारिक आदेश जारी करेंगे। हाईकोर्ट ने कहा कि कुछ तथ्य है, मुख्य बात है कि इन सभी शिकायतों पर मानीटरिंग कौन करेगा। वहीं जांच कमेटी पर भी आपत्ति की बात आई है। मुआवजा राशि को लेकर भी आपत्ति ली गई है। यह सभी हमारे संज्ञान में है।
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