हाईकोर्ट को आशंका: भागीरथपुरा कांड केवल दूषित पानी से कैसे, कोई केमिकल तो नहीं, शासन ने पुलिस चौकी के टॉयलेट को बताई वजह
Sanjay Gupta | Jan 20, 2026, 18:22 IST
Photograph: (the sootr)
भागीरथपुरा कांड पर हाईकोर्ट में लंबी बहस हुई। शासन ने पुलिस चौकी के टॉयलेट को कारण बताया, लेकिन कोई ठोस कारण सामने नहीं आया। मुआवजे की मांग जारी है।
News in Short
- भागीरथपुरा कांड को लेकर हाईकोर्ट में डेढ़ घंटे तक बहस चली।
- इसमें याचिकाकर्ताओं ने उच्च स्तरीय कमेटी को आंखों में धूल झोंकने वाला बताया।
- साथ ही कहा कि अभी तक किसी पर भी आपराधिक केस नहीं हुआ, यही काम बावड़ी कांड में हुआ था।
- हाईकोर्ट में इस घटना का कारण शासन ने पुलिस चौकी के ट्वायलेट को बताया, हाईकोर्ट ने केमिकल की आशंका जताई।
- इसमें मौतों के आकंड़ों पर भी आपत्ति हुई और मुआवजा नहीं देने और केवल राहत राशि दो-दो लाख पर भी आपत्ति ली गई।
इस पर हाईकोर्ट ने कहा कि क्या इससे पानी इतना दूषित हो सकता है, कहीं कोई केमिकल तो नहीं मिला। लेकिन पूरी बहस में कोई ठोस कारण सामने नहीं आ सका। उधर मौत, मुआवजे के साथ ही उच्च स्तरीय कमेटी पर भी याचिकाकर्ताओं ने तगड़ी बहस की। सीएस अनुराग जैन वीसी के जरिए उपस्थित रहे।
News in Details
इस पर हाईकोर्ट जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की बेंच ने कहा कि सीवरेज व वाटल लाइन कई जगह मिलती है, लेकिन क्या इतना अधिक इससे पानी दूषित हो सकता है कि जान चली जाए। कहीं कोई केमिकल तो नहीं मिला। क्या ठोस कारण रहा, क्या यह सामने आया।
इस पर शासकीय अधिवक्ता ने कहा कि यह कुछ कारणों में से एक रहा, बोरवेल में भी पानी दूषित आया, जो मैन लाइन में मिला। वरिष्ठ अधिवक्ता अजय बागड़िया ने कहा कि कान्ह नदी के किनारे यह भागीरथपुरा है. यहां से दूषित पानी बोरिंग में गया और फिर सीवेरज लाइन और नर्मदा लाइन में मिला, जिससे यह घटना हुई। ओवरआल अभी तक इस घटना का कोई ठोस कारण सामने नहीं आया है।
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उच्च स्तरीय कमेटी पर नहीं भरोसा
उपहार सिनेमा हो या फिर दक्षिण में भगदड़ केस वहां तत्काल अधिकारियों को हटाया गया और गैर इरादतन हत्या के केस हुए। लेकिन यहां पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। जब सरकार ने कार्ऱवाई नहीं की तो फिर सीनियर अधिकारी क्या करेंगे। इन पर हमे कोई भरोसा नहीं है। इसलिए हाईकोर्ट के रिटायर जस्टिस की अध्यक्षता में जांच कमेटी बने या फिर जैसा हाईकोर्ट उचित समझे, उनकी मानीटरिंग में कमेटी रहे, जो सीधे उन्हें रिपोर्ट दे।
अभी तक किसी अधिकारी पर कोई केस नहीं
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मुआवजा में एक रुपए भी नहीं दिया गया
रिपोर्ट दबा दी, ठेकेदार ने काम ही नहीं किया
उन्होंने यह भी कहा कि फरवरी 2023 में मालवा इंजीनियर को भागीरथपुरा का ठेका मिला, एक साल में काम करना था इसमें लिखा था कि इससे दूषित पानी की समस्या दूर होगी। लेकिन ठेका होने के दो-ढाई साल बाद यह घटना आ जाती है, फिर ठेकेदार ने क्या किया और निगम ने उस ठेकेदार पर क्या एक्शन ली, पहले तो इंजीनियर पर केस होना चाहिए।
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हाईकोर्ट करेगा आदेश
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