भागीरथपुरा में मौत महामारी से मानी, लेकिन मुआवजा नहीं, जबलपुर सड़क हादसे में 10-10 लाख दिए
Sanjay Gupta | Jan 20, 2026, 11:58 IST
bhagirathpura death epidemic compensation dispute
इंदौर भागीरथपुरा में दूषित पानी से मौतों पर मुआवजा अभी तक नहीं दिया गया है। यह चौंकाने वाली बात है। बड़े हादसों में सरकार तत्काल मुआवजा घोषित करती है, लेकिन इंदौर भागीरथपुरा कांड में अभी तक एक रुपए का मुआवजा नहीं दिया गया है।
News In Short
- भागीरथपुरा में दूषित पानी से अभी तक 23 मौत हो चुकी है और 447 अस्पताल में भर्ती हो चुके हैं।
- इस मामले में शासन खुद हाईकोर्ट में एपिडेमिक से 15 मौतों को मान चुका है।
- प्रशासन द्वारा 21 मृतकों के परिजन को दो-दो लाख दिए गए, लेकिन वह मुआवजा नहीं, केवल राहत राशि है।
- अस्पतालों के बिल के भुगतान का भी बोझ रेडक्रॉस पर ही आ रहा है। शासन स्तर पर राशि जारी नहीं हुई।
- कांग्रेस पीड़ितों को अपनी ओर से डेढ़-डेढ़ लाख दे चुकी है।
News in Detail
खुद जिला कलेक्टर शिवम वर्मा कह चुके हैं कि पीड़ित क्षेत्र में हुई मौतों पर हम राहत राशि दे रहे हैं। हाईकोर्ट में भागीरथपुरा मामले में मंगलवार 20 जनवरी को सुनवाई है। इसमें सीएस अनुराग जैन फिर अपनी बात रखेंगे।
राजस्व बुक सर्कुलर में यह नियम
इसमें दो बातें हैं: यदि इसे प्राकृतिक नहीं मानते तो फिर डेथ ऑडिट रिपोर्ट में एपिडेमिक से मौत क्यों माना गया है? एपिडेमिक यानी महामारी तो प्राकृतिक होती है।
यदि आप प्राकृतिक नहीं मान रहे तो सीधी बात है कि यह नगर निगम के अधिकारी-कर्मचारियों की गलती से हुआ मानववध यानी गैर-इरादतन हत्या है। फिर इन पर अभी तक केस क्यों नहीं कराया गया है? वहीं, मुआवजा मुख्यमंत्री फंड से भी दिया जाता है।
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जब चाइनीज मांझे में गैर-इरादतन हत्या केस
जबलपुर सड़क हादसे में 10-10 लाख रुपए
फिर इंदौर में भागीरथपुरा में मृतक के परिजनों को शासन ने 4 लाख का मुआवजा क्यों नहीं दिया। इसमें नगर निगम को भी राहत राशि देने के आदेश क्यों नहीं दिए गए? ना ही खुद नगर निगम ने अपनी ओर से कोई राहत राशि दी है।
जबलपुर जिले के गौर नदी के पास सड़क दुर्घटना में NHAI के सड़क निर्माण के श्रमिकों की मृत्यु का समाचार अत्यंत दुखद है।
दुःख की इस घड़ी में मृतकों के परिजनों को ₹4-4 लाख, गंभीर घायलों को ₹1-1 लाख तथा साधारण घायलों को ₹50-50 हजार की सहायता राशि स्वीकृत की है। कार्य एजेंसी को…
— Dr Mohan Yadav (@DrMohanYadav51) January 19, 2026
Sootr Knowledge
जानें क्या है इंदौर का भागीरथपुरा कांड?
इससे फीकल कोलिफॉर्म और ई-कोलाई जैसे खतरनाक बैक्टीरिया फैल गए। इसके अलावा, इलाके के बोरवेल का गंदा पानी नर्मदा की पाइपलाइन में घुसकर पीने के पानी को जहरीला बना रहा था।
इस वजह से उल्टी और दस्त जैसी बीमारियां फैल गईं, और 3500 से ज्यादा लोग इससे प्रभावित हुए। इसे भागीरथपुरा में दूषित पानी की घटना के मुख्य कारण के तौर पर बताया जा रहा है।
भागीरथपुरा में अभी तक 34631 घरों का सर्वे किया है। अब तक 23 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग शामिल हैं। एक 6 महीने का बच्चा भी इस संकट का शिकार हो गया। 447 लोग अस्पताल में भर्ती हुए हैं। इनमें से 400 अधिक को छुट्टी मिल गई है। अब तक (जनवरी 2026 तक ) भागीरथपुरा इलाके में नए मरीज निकल रहे हैं।
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