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News in Short
- पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने इंदौर के भागीरथपुरा मामले पर अपनी चुप्पी तोड़ी।
- दिग्विजय ने कहा कि इस मामले में जिम्मेदारी तय नहीं की गई है और कार्रवाई की कमी रही है।
- दिग्विजय ने कहा कि भागीरथपुरा कांड में 24 परिवारों की मौत हुई, लेकिन दोषियों पर कार्रवाई नहीं हुई।
- दिग्विजय सिंह ने आरोप लगाया कि पाइपलाइन बदलने के लिए टेंडर तो निकाले गए थे।
- दिग्विजय सिंह ने पब्लिक हियरिंग की मांग की। शासकीय दस्तावेज और तथ्य जनता के सामने आएंगे।
News in Detail
इंदौर भागीरथपुरा में 17 जनवरी की राहुल गांधी आ रहे हैं। इसके पहले इस मामले में पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह की चुप्पी लगातार सवालों के घेरे में रही है। सिंह की ओर से इस मामले में लंबे समय तक बयान नहीं आया। ना ही वह 11 जनवरी की न्याय यात्रा के पहले आए, लेकिन अब वह हमलावर हो रहे हैं।
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निर्णय करने वाली शक्तियों पर कार्रवाई नहीं हुई- सिंह
सिंह ने बयान जारी करते हुए कहा कि जो भी इंदौर के भागीरथपुरा कांड, जिसमें 24 परिवारों में मौतें हुई हैं। दूषित पेयजल पीने के कारण, उस पर कोई जिम्मेदारी तय नहीं हो पाई है। ​मेरा यह स्पष्ट मत है कि पब्लिक हियरिंग और न्यायिक जांच के बिना ज़िम्मेदारी तय नहीं की जा सकती। कुछ छोटे-छोटे कर्मचारियों को निलंबित किया गया है, तबादला किया गया है। लेकिन जो निर्णय करने वाली शक्तियां हैं, उन पर क्या कार्रवाई हुई? कोई कार्रवाई नहीं।
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चहेते ठेकेदारों को काम देने की बात
सिंह ने आगे कहा कि इस मामले में ​अब अलग-अलग लोगों के बारे में आज चर्चा होती है। पहला वर्ग कहता है कि मुख्यमंत्री का आदेश है कि अधिकारी जो ठीक समझें, वही करें। महापौर और स्थानीय नेताओं की बात सुनने की आवश्यकता नहीं है।
दूसरी बात यह आई है कि महापौर और बीजेपी पार्षद व बड़े-बड़े नेता शिकायत करते हैं कि अधिकारी सुनते नहीं है।
तीसरी बात आती है कि अधिकारी-कर्मचारियों का। जो कहते हैं कि साल 2022 में फैसला हो गया था कि ये पाइपलाइन चेंज होना चाहिए।
बजट भी था, ठेका देने के लिए टेंडर निकाला, टेंडर भी निकल गया। लेकिन टेंडर मंजूर क्यों नहीं हुआ? क्योंकि वार्ड मेंबर के चहेते अलग ठेकेदार हैं। महापौर जी के ठेकेदार और हैं, और बड़े नेताओं के चहेते ठेकेदार और हैं।
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इसके लिए बीजेपी शासन के लोग जिम्मेदार है
दिग्विजय सिंह ने आगे कहा कि ​बात यही है कि ये पूरा जो घटनाक्रम है, उसके लिए पूरी भारतीय जनता पार्टी के शासन के जिम्मेदार लोग उसके लिए दोषी हैं। ये तब तक साबित नहीं होगा जब तक किसी भी उच्च न्यायालय के अध्यक्षता में ज्यूडिशियल इंक्वायरी नहीं होगी और पब्लिक हियरिंग नहीं होगी। ​
पब्लिक हियरिंग होनी चाहिए, जिसमें शासकीय दस्तावेज पब्लिक किए जाएं। तभी तय होगा कि जिम्मेदार कौन है। अगर महापौर या मेयर-इन-काउंसिल की गलती है, तो उन्हें इस्तीफा देना चाहिए।
अगर प्रशासकीय अधिकारियों की गलती है, तो उन्हें दंडित किया जाए। यह साफ होना चाहिए। एकमात्र विकल्प है न्यायिक जांच। पब्लिक हियरिंग से सरकारी दस्तावेज और तथ्य जनता के सामने आएंगे। मुख्यमंत्री साहस दिखाएंगे, ऐसी उम्मीद है।
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