अजाक्स विवाद में पुलिस पर उठे सवाल: FIR के बाद भी ‘एक्शन जीरो’, भवन में जारी भंडारा
Ramanand Tiwari | Mar 29, 2026, 23:26 IST
Photograph: (the sootr)
भोपाल के टीटी नगर इलाके में अजाक्स विवाद के बाद पुलिस की निष्क्रियता पर सवाल उठ रहे हैं। FIR दर्ज होने के बावजूद भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई और भवन में भंडारा जारी है। यह मामला अब पुलिस की कार्यप्रणाली और प्रशासनिक निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर रहा है।
भोपाल के टीटी नगर इलाके में अजाक्स (AJAX) विवाद लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। 22 मार्च को दर्ज हुई FIR के बाद भी पुलिस की कार्रवाई ठंडी नजर आ रही है। इस बीच, जिस भवन को लेकर विवाद है, वहां अब भी लोग खुलेआम भंडारा कर रहे हैं, जिससे पुलिस की भूमिका पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
अजाक्स के प्रदेश अध्यक्ष मुकेश मौर्य ने टीटी नगर थाने में शिकायत दर्ज करवाई थी। आरोप था कि कुछ लोग संगठन के भवन पर अनाधिकृत कब्जा करने की कोशिश कर रहे हैं।
शिकायत में एक महिला समेत करीब 8 लोगों के नाम शामिल किए गए थे। आरोप यह भी था कि ये लोग जबरन भवन में घुसकर माहौल बिगाड़ने और नुकसान पहुंचाने की मंशा से इकट्ठा हुए थे।
पुलिस ने 22 मार्च को भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की धारा 333, 324(1) और 3(5) के तहत FIR दर्ज की। लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई अज्ञात आरोपियों की पहचान तक नहीं जोड़ी गई और ना ही किसी तरह की सख्त कार्रवाई नजर आई यानी FIR के बाद की प्रक्रिया लगभग ठप सी दिख रही है।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि जिस भवन को लेकर विवाद है, वहां अब भी लोग खाना बना रहे हैं और भंडारा कर रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक, इसके वीडियो भी मौजूद हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि अगर यह अनाधिकृत कब्जा है, तो पुलिस इसे रोक क्यों नहीं रही?
टीटी नगर थाने के TI गौरव दोहरे से जब इस मामले पर सवाल किया गया, तो उन्होंने कहा
23 मार्च को संबंधित पक्षों को बयान दर्ज कराने के लिए बुलाया गया था। इसके बावजूद जमीनी स्थिति जस की तस बनी हुई है।
इस पूरे विवाद में दूसरा पक्ष भी पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रहा है। आईएएस संतोष वर्मा ने भी आरोप लगाया है कि उनके द्वारा दिए गए आवेदन पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है। यानी दोनों ही पक्ष कहीं न कहीं पुलिस की निष्क्रियता पर सवाल उठा रहे हैं।
शिकायत में जिन लोगों के नाम सामने आए, उनमें— संतोष वर्मा (IAS),एस.एन. सूर्यवंशी,एम.सी. अहिरवार,गौतम पाटिल,घनश्याम मकोरिया,राकलेश साकेत राजबीर अग्निहोत्री,के.बी. दोहरे निर्मला पाटिल शामिल हैं।
अब इस मामले में एक बड़ा सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या प्रशासनिक या राजनीतिक रसूख के चलते कार्रवाई धीमी है? क्योंकि मामला ऐसे नामों से जुड़ा है, जिनका सिस्टम में प्रभाव माना जाता है। ऐसे में पुलिस की धीमी चाल कई तरह के संदेह खड़े कर रही है।
सवाल जो जवाब मांग रहे हैं
अजाक्स के प्रदेश अध्यक्ष मौर्य ने कहा कि वर्तमान में कार्यालय में कोई धार्मिक आयोजन जैसे ‘नवदुर्गा’ भी नहीं चल रहा है। इसके बावजूद अनाधिकृत लोग छात्र-छात्राओं को बुलाकर भंडारा आयोजित कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इस गतिविधि के कारण अजाक्स कार्यालय के नियमित कामकाज में गंभीर व्यवधान पैदा हो रहा है।
मौर्य ने मांग की कि पूरे मामले का जल्द से जल्द समाधान किया जाए, ताकि संगठन का कार्य सुचारु रूप से चल सके। अजाक्स विवाद अब सिर्फ संगठन का अंदरूनी मामला नहीं रह गया है, बल्कि यह पुलिस की कार्यप्रणाली और प्रशासनिक निष्पक्षता पर भी सवाल खड़े कर रहा है। FIR के बावजूद अगर हालात नहीं बदलते, तो यह पूरे सिस्टम की विश्वसनीयता पर असर डाल सकता।
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क्या है पूरा मामला?
शिकायत में एक महिला समेत करीब 8 लोगों के नाम शामिल किए गए थे। आरोप यह भी था कि ये लोग जबरन भवन में घुसकर माहौल बिगाड़ने और नुकसान पहुंचाने की मंशा से इकट्ठा हुए थे।
FIR दर्ज, लेकिन आगे क्या हुआ?
भवन में जारी है भंडारा, कार्रवाई क्यों नहीं?
TI गौरव दोहरे का क्या कहना है?
- “धाराएं जमानती (bailable) हैं”
- “अभी किसी ने जमानत नहीं करवाई है”
- “आरोपियों को नोटिस तामील किए जाएंगे”
- “हर कोई अपनी-अपनी बात बता रहा है, जांच के बाद ही स्पष्ट होगा।”
- नोटिस भी जारी, लेकिन असर नहीं
23 मार्च को संबंधित पक्षों को बयान दर्ज कराने के लिए बुलाया गया था। इसके बावजूद जमीनी स्थिति जस की तस बनी हुई है।
दूसरा पक्ष भी पुलिस पर सवाल उठा रहा
इन नामों का जिक्र शिकायत में
क्या रसूख आड़े आ रहा है?
सवाल जो जवाब मांग रहे हैं
- FIR के बाद भी पुलिस एक्शन क्यों नहीं ले रही?
- क्या रसूखदार नामों के चलते जांच धीमी है?अनाधिकृत भंडारा कब तक चलता रहेगा?
- लंबे समय से चल रहे अजाक्स विवाद पर सरकार चुप क्यों है?
मुकेश मौर्य का आरोप
मौर्य ने मांग की कि पूरे मामले का जल्द से जल्द समाधान किया जाए, ताकि संगठन का कार्य सुचारु रूप से चल सके। अजाक्स विवाद अब सिर्फ संगठन का अंदरूनी मामला नहीं रह गया है, बल्कि यह पुलिस की कार्यप्रणाली और प्रशासनिक निष्पक्षता पर भी सवाल खड़े कर रहा है। FIR के बावजूद अगर हालात नहीं बदलते, तो यह पूरे सिस्टम की विश्वसनीयता पर असर डाल सकता।
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