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5 प्वाइंट में समझें क्या है पूरा मामला
1. भोपाल की भाजपा पार्षद के जाति प्रमाण पत्र पर सवाल उठे हैं।
2. टीटी नगर एसडीएम ने प्रमाण पत्र को संदिग्ध माना है।
3. शिकायत पार्षद चुनाव लड़ चुके उम्मीदवार ने की है।
4. इस मामले में पहले भी दो बार नोटिस जारी हो चुके हैं।
5. जवाब नहीं मिला तो सदस्यता पर असर पड़ सकता है।
भोपाल की भाजपा पार्षद का जाति प्रमाण पत्र क्यों चर्चा में है
Bhopal नगर निगम की एक पार्षद विवादों में आ गई हैं। वार्ड क्रमांक 31 से भाजपा पार्षद ब्रजुला सचान पर सवाल उठे हैं। मामला उनके जाति प्रमाण पत्र से जुड़ा हुआ है। प्रशासन ने इसे गंभीर मानते हुए जांच शुरू की है।
SDM टीटी नगर ने क्यों जारी किया नोटिस
टीटी नगर एसडीएम कार्यालय ने नोटिस जारी किया है। एसडीएम अर्चना शर्मा ने नोटिस की पुष्टि की है। प्रमाण पत्र को प्रथम दृष्टया संदिग्ध माना गया है। इसी कारण पार्षद को तलब किया गया है।
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23 जनवरी को कार्यालय में पेश होना जरूरी
नोटिस में साफ निर्देश दिए गए हैं। बीजेपी पार्षद को 23 जनवरी को उपस्थित होना होगा। उन्हें अपना पक्ष और दस्तावेज रखने होंगे। अनुपस्थित रहने पर एकतरफा कार्रवाई हो सकती है।
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शिकायतकर्ता कौन है और क्या आरोप हैं
इस मामले की शिकायत शैलेश सेन ने की है। शैलेश सेन कोलार इलाके के निवासी हैं। वे उसी वार्ड से पार्षद का चुनाव लड़ चुके हैं। उनका आरोप है कि गलत प्रमाण पत्र का इस्तेमाल हुआ।
चुनाव जीतने के बाद बढ़ा विवाद
शिकायत में कहा गया है कि चुनाव जीतने के लिए प्रमाण पत्र उपयोग हुआ। यह मामला चुनाव परिणाम के बाद तेज हुआ। प्रशासन को लिखित शिकायत दी गई थी। इसके बाद जांच की प्रक्रिया शुरू हुई।
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पहले भी दो बार जारी हो चुका है नोटिस
यह पहला नोटिस नहीं बताया जा रहा है। इससे पहले भी दो नोटिस जारी हो चुके हैं। दोनों बार संतोषजनक जवाब नहीं मिला। इसी कारण अब सख्त रुख अपनाया गया है।
प्रशासन क्यों ले रहा है मामले को गंभीरता से
जाति प्रमाण पत्र चुनाव में अहम भूमिका निभाता है। गलत प्रमाण पत्र लोकतांत्रिक प्रक्रिया को प्रभावित करता है।
इसलिए प्रशासन सतर्कता से जांच कर रहा है। हर तथ्य को दस्तावेजों से परखा जा रहा है।
आरोप सही पाए गए तो क्या हो सकता है
अगर आरोप सही साबित होते हैं तो मुश्किल बढ़ सकती है। पार्षद की सदस्यता पर खतरा आ सकता है। कानूनी कार्रवाई की संभावना भी बन सकती है। फैसला जांच पूरी होने के बाद लिया जाएगा।
भाजपा संगठन की भी बढ़ी नजर
मामले की जानकारी पार्टी स्तर पर भी है। संगठन पूरे घटनाक्रम पर नजर रखे हुए है। फिलहाल पार्टी की ओर से कोई बयान नहीं आया। जांच के नतीजों के बाद स्थिति साफ होगी।
स्थानीय राजनीति में क्यों अहम है यह मामला
नगर निगम स्तर पर यह मामला अहम माना जा रहा है। जाति प्रमाण पत्र विवाद अक्सर राजनीति गरमाते हैं। इससे वार्ड की राजनीति भी प्रभावित हो सकती है। आने वाले दिनों में हलचल बढ़ने की संभावना है।
अब आगे क्या होगा
अब सभी की नजर 23 जनवरी पर टिकी है। उसी दिन पार्षद का पक्ष सामने आएगा। दस्तावेजों की जांच के बाद निर्णय होगा। प्रशासन निष्पक्ष कार्रवाई का दावा कर रहा है।
जाति प्रमाण पत्र का केस
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