12 साल बाद भी न घर मिला न पैसा: हाईकोर्ट ने फेथ बिल्डर्स के डायरेक्टर अभिषेक भदौरिया को तलब किया

भोपाल के "इंपीरियल हाइट" प्रोजेक्ट की 12 साल लंबी कानूनी लड़ाई, जहां बिल्डर ने न तो फ्लैट दिया और न ही पैसे वापस किए। अब हाईकोर्ट ने बिल्डर्स के डायरेक्टर को तलब किया।

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Neel Tiwari
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High Court summoned Faith Builders director Abhishek Bhadoria

Photograph: (the sootr)

NEWS IN SHORT

  • 2013 में 30 महीने में फ्लैट देने का वादा, 12 साल बाद भी खरीदार खाली हाथ।
  • RERA और अपीलीय प्राधिकरण ने बिल्डर को दोषी माना।
  • 6 लाख 94 हजार रुपए 16.75% ब्याज सहित लौटाने का आदेश।
  • जुर्माना और वाद खर्च देने से बचने हाईकोर्ट पहुंचा बिल्डर।
  • हाईकोर्ट ने फटकार लगाकर डायरेक्टर अभिषेक भदौरिया को तलब किया।

INTRO 

Jabalpur. भोपाल में 2013 में लॉन्च हुए एक हाउसिंग प्रोजेक्ट ने एक विधवा महिला की जीवन भर की जमा पूंजी डुबो दी। न तो 12 साल में फ्लैट मिला और न ही पैसे वापस हुए, उल्टा बिल्डर ने कोर्ट में भी टालमटोल का रास्ता अपनाया।

अब जबलपुर हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए फेथ बिल्डर्स के डायरेक्टर अभिषेक भदोरिया को जुर्माना भरने के आदेश के साथ ही व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहने का आदेश किया है। इस मामले की अगली सुनवाई 23 फरवरी को तय की गई है।

NEWS IN DEATILS

2013 में बेचा “इंपीरियल हाइट” के नाम पर सपनों का घर

फेथ बिल्डर्स ने वर्ष 2013 में भोपाल के कोलार रोड क्षेत्र में “इंपीरियल हाइट” नाम से एक आवासीय परियोजना शुरू की थी। इस प्रोजेक्ट के प्रचार में ग्राहकों को भरोसा दिलाया गया कि 30 महीनों के भीतर फ्लैट का कब्जा दे दिया जाएगा।

मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए यह प्रोजेक्ट एक सुरक्षित भविष्य का सपना बनकर सामने आया, लेकिन समय बीतता गया और यह सपना धीरे-धीरे एक अंतहीन इंतजार और कानूनी लड़ाई में बदल गया। 12 साल बीत जाने के बावजूद न तो निर्माण पूरा हुआ और न ही खरीदार को उनकी जमा पूंजी वापस की गई।

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पति की मौत के बाद जमा पूंजी से खरीदा था फ्लैट

मुस्कान चौक भोपाल में रहने वाली सीमा शर्मा इस मामले की मुख्य पीड़िता हैं। उन्होंने अपने बेटे की पढ़ाई और भविष्य को सुरक्षित करने के इरादे से इस प्रोजेक्ट में फ्लैट बुक कराया था।

साल 2011 में उनके पति का निधन हो चुका था और पति की रिटायरमेंट में मिली पूरी राशि ही उनका एकमात्र सहारा थी। इसी रकम से उन्होंने फेथ बिल्डर्स पर भरोसा कर फ्लैट बुक कराया। सीमा शर्मा के लिए यह सिर्फ एक मकान नहीं, बल्कि जीवन की सुरक्षा और सम्मान से जुड़ा फैसला था।

70 फीसदी भुगतान, फिर भी कोई दस्तावेज नहीं

सीमा शर्मा ने 9 लाख 99 हजार रुपए कीमत के फ्लैट के एवज में 70 फीसदी या 6 लाख 94 हजार 900 रुपए फेथ बिल्डर्स को चेक के माध्यम से भुगतान किए।

फ्लैट की डिलीवरी की समय-सीमा 13 जनवरी 2013 से 30 महीने तय की गई थी। लेकिन इसके बाद हालात ऐसे बने कि न तो बिल्डर ने कोई पक्का एग्रीमेंट साइन किया और न ही फ्लैट की स्थिति को लेकर कोई ठोस जानकारी दी। हर बार नई तारीख, नया बहाना और नई उम्मीद दी जाती रही। पीड़िता लगातार मानसिक तनाव में फंसी रही।

RERA से राहत, ब्याज सहित पैसा लौटाने का आदेश

लगातार उपेक्षा और धोखे से परेशान होकर सीमा शर्मा ने आखिरकार मध्य प्रदेश रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (RERA) का दरवाजा खटखटाया। लंबी सुनवाई के बाद 2 मई 2025 को RERA ने फेथ बिल्डर्स को दोषी ठहराते हुए स्पष्ट आदेश जारी किया कि बिल्डर को 6 लाख 94 हजार 900 रुपए 16.75% वार्षिक ब्याज के साथ लौटाने होंगे। RERA ने यह भी साफ किया कि यदि दो माह की अवधि में भुगतान नहीं किया गया तो 2 प्रतिशत अतिरिक्त ब्याज भी देना होगा।

अपील में भी नहीं मिली राहत, जुर्माना और बढ़ा

RERA के आदेश के खिलाफ फेथ बिल्डर्स ने अपीलीय प्राधिकरण में अपील दायर की, लेकिन वहां भी उसकी दलीलों को स्वीकार नहीं किया गया। अपीलीय प्राधिकरण ने न सिर्फ RERA के आदेश को यथावत रखा, बल्कि बिल्डर पर 55 हजार रुपए का अतिरिक्त जुर्माना भी लगाया।

इसमें 50 हजार रुपए मानसिक प्रताड़ना और 5 हजार रुपए मुकदमे के खर्च के रूप में तय किए गए। इसके बावजूद भी बिल्डर ने भुगतान की बजाय आगे की कानूनी लड़ाई का रास्ता चुना।

HC में भी टालमटोल, लेकिन इस बार कोर्ट सख्त

अपीलीय प्राधिकरण से झटका लगने के बाद फेथ बिल्डर्स मध्य प्रदेश हाईकोर्ट पहुंचा। 14 जनवरी 2025 को हाईकोर्ट ने भी बिल्डर को राहत देने से इनकार करते हुए 50 हजार रुपए वाद खर्च सीमा शर्मा को देने का आदेश दिया।

इसके बाद 3 फरवरी को हुई सुनवाई में बिल्डर की ओर से पिछले आदेश को रद्द कराने का आवेदन लगाया गया और यह दलील दी गई कि मामला दोबारा RERA भेजा जाए। इस पर कोर्ट ने साफ संकेत दिए कि यह सिर्फ समय टालने की कोशिश है।

12 साल में न फ्लैट दिया, न पैसा लौटाया-HC की कड़ी टिप्पणी

चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की डिविजनल ने बिल्डर के आवेदन को सिरे से खारिज करते हुए कड़ी फटकार लगाई। कोर्ट ने कहा कि 12 साल बीत जाने के बावजूद न फ्लैट दिया गया और न ही खरीदार की रकम लौटाई गई, जो न्याय प्रक्रिया का दुरुपयोग है।

कोर्ट ने निर्देश दिया कि अगली सुनवाई से पहले अपीलीय प्राधिकरण द्वारा तय 55 हजार रुपए और हाईकोर्ट द्वारा तय 50 हजार रुपए वाद खर्च का भुगतान अनिवार्य रूप से किया जाए।

अब डायरेक्टर को कोर्ट में खुद देना होगा जवाब

हाईकोर्ट ने इस मामले में सख्त रुख अपनाते हुए फेथ बिल्डर्स के डायरेक्टर अभिषेक भदोरिया को अगली सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में उपस्थित होने का आदेश दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि अभिषेक भदोरिया को खुद यह जवाब देना होगा कि जब RERA, अपीलीय प्राधिकरण और हाईकोर्ट तीनों स्तरों पर आदेश पारित हो चुके हैं, तो अब तक सीमा शर्मा को उनकी राशि क्यों नहीं लौटाई गई।

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“सुप्रीम कोर्ट तक जाएंगे, पैसा नहीं देंगे”

खुद अपनी पैरवी कर रहीं सीमा शर्मा ने कोर्ट को बताया कि बिल्डर उन्हें लगातार यह कहता रहा कि वह हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक जाएगा, लेकिन पैसा वापस नहीं करेगा। उन्होंने यह भी बताया कि भुगतान के पूरे सबूत मौजूद हैं क्योंकि रकम चेक से दी गई थी।

यह मामला सिर्फ एक महिला के साथ हुई धोखाधड़ी नहीं, बल्कि रियल एस्टेट सेक्टर में वर्षों से चली आ रही जवाबदेही की कमी और आम नागरिकों के साथ हो रहे अन्याय की एक गंभीर मिसाल बन गया है।

धोखाधड़ी फेथ बिल्डर्स RERA रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी जबलपुर हाईकोर्ट
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