12 साल बाद भी न घर मिला न पैसा: हाईकोर्ट ने फेथ बिल्डर्स के डायरेक्टर अभिषेक भदौरिया को तलब किया
Neel Tiwari | Feb 03, 2026, 18:36 IST
Photograph: (the sootr)
भोपाल के "इंपीरियल हाइट" प्रोजेक्ट की 12 साल लंबी कानूनी लड़ाई, जहां बिल्डर ने न तो फ्लैट दिया और न ही पैसे वापस किए। अब हाईकोर्ट ने बिल्डर्स के डायरेक्टर को तलब किया।
NEWS IN SHORT
- 2013 में 30 महीने में फ्लैट देने का वादा, 12 साल बाद भी खरीदार खाली हाथ।
- RERA और अपीलीय प्राधिकरण ने बिल्डर को दोषी माना।
- 6 लाख 94 हजार रुपए 16.75% ब्याज सहित लौटाने का आदेश।
- जुर्माना और वाद खर्च देने से बचने हाईकोर्ट पहुंचा बिल्डर।
- हाईकोर्ट ने फटकार लगाकर डायरेक्टर अभिषेक भदौरिया को तलब किया।
INTRO
अब जबलपुर हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए फेथ बिल्डर्स के डायरेक्टर अभिषेक भदोरिया को जुर्माना भरने के आदेश के साथ ही व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहने का आदेश किया है। इस मामले की अगली सुनवाई 23 फरवरी को तय की गई है।
NEWS IN DEATILS
2013 में बेचा “इंपीरियल हाइट” के नाम पर सपनों का घर
मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए यह प्रोजेक्ट एक सुरक्षित भविष्य का सपना बनकर सामने आया, लेकिन समय बीतता गया और यह सपना धीरे-धीरे एक अंतहीन इंतजार और कानूनी लड़ाई में बदल गया। 12 साल बीत जाने के बावजूद न तो निर्माण पूरा हुआ और न ही खरीदार को उनकी जमा पूंजी वापस की गई।
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पति की मौत के बाद जमा पूंजी से खरीदा था फ्लैट
साल 2011 में उनके पति का निधन हो चुका था और पति की रिटायरमेंट में मिली पूरी राशि ही उनका एकमात्र सहारा थी। इसी रकम से उन्होंने फेथ बिल्डर्स पर भरोसा कर फ्लैट बुक कराया। सीमा शर्मा के लिए यह सिर्फ एक मकान नहीं, बल्कि जीवन की सुरक्षा और सम्मान से जुड़ा फैसला था।
70 फीसदी भुगतान, फिर भी कोई दस्तावेज नहीं
फ्लैट की डिलीवरी की समय-सीमा 13 जनवरी 2013 से 30 महीने तय की गई थी। लेकिन इसके बाद हालात ऐसे बने कि न तो बिल्डर ने कोई पक्का एग्रीमेंट साइन किया और न ही फ्लैट की स्थिति को लेकर कोई ठोस जानकारी दी। हर बार नई तारीख, नया बहाना और नई उम्मीद दी जाती रही। पीड़िता लगातार मानसिक तनाव में फंसी रही।
RERA से राहत, ब्याज सहित पैसा लौटाने का आदेश
अपील में भी नहीं मिली राहत, जुर्माना और बढ़ा
इसमें 50 हजार रुपए मानसिक प्रताड़ना और 5 हजार रुपए मुकदमे के खर्च के रूप में तय किए गए। इसके बावजूद भी बिल्डर ने भुगतान की बजाय आगे की कानूनी लड़ाई का रास्ता चुना।
HC में भी टालमटोल, लेकिन इस बार कोर्ट सख्त
इसके बाद 3 फरवरी को हुई सुनवाई में बिल्डर की ओर से पिछले आदेश को रद्द कराने का आवेदन लगाया गया और यह दलील दी गई कि मामला दोबारा RERA भेजा जाए। इस पर कोर्ट ने साफ संकेत दिए कि यह सिर्फ समय टालने की कोशिश है।
12 साल में न फ्लैट दिया, न पैसा लौटाया-HC की कड़ी टिप्पणी
कोर्ट ने निर्देश दिया कि अगली सुनवाई से पहले अपीलीय प्राधिकरण द्वारा तय 55 हजार रुपए और हाईकोर्ट द्वारा तय 50 हजार रुपए वाद खर्च का भुगतान अनिवार्य रूप से किया जाए।
अब डायरेक्टर को कोर्ट में खुद देना होगा जवाब
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“सुप्रीम कोर्ट तक जाएंगे, पैसा नहीं देंगे”
यह मामला सिर्फ एक महिला के साथ हुई धोखाधड़ी नहीं, बल्कि रियल एस्टेट सेक्टर में वर्षों से चली आ रही जवाबदेही की कमी और आम नागरिकों के साथ हो रहे अन्याय की एक गंभीर मिसाल बन गया है।
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