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News In Short
- भोपाल में अवैध कॉलोनियों के खिलाफ प्रशासन ने कार्रवाई तेज कर दी है।
- बीते 48 घंटों में 11 अवैध कॉलोनियों पर एफआईआर दर्ज की गई है।
- 12 और कॉलोनियों पर केस दर्ज कराने की प्रक्रिया चल रही है।
- कलेक्टर के निर्देश पर सड़क और बाउंड्रीवॉल तोड़ने की तैयारी की जा रही है।
- कार्रवाई के दायरे में फिलहाल ज़मीन मालिक किसान ही आ रहे हैं।
- कॉलोनाइजरों के नाम दस्तावेजों में न होने से वे कार्रवाई से बचे हुए हैं।
News In Detail
राजधानी भोपाल में अवैध कॉलोनियों के खिलाफ जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए कार्रवाई तेज कर दी है। पिछले 48 घंटों के भीतर 11 से अधिक अवैध कॉलोनियों पर FIR दर्ज कराई जा चुकी है। इसके साथ ही गुरुवार को 12 नई कॉलोनियों के मामलों में केस दर्ज कराने के लिए जरूरी दस्तावेज जुटाए गए हैं।
हालांकि देर शाम तक इन मामलों में FIR दर्ज नहीं हो सकी, लेकिन प्रशासन का कहना है कि शुक्रवार या शनिवार तक ये प्रकरण भी दर्ज हो सकते हैं। कलेक्टर की सख्ती के बाद अब अवैध कॉलोनियों में बनी सड़कों, बाउंड्री वॉल और अन्य निर्माणों को तोड़ने के लिए पुलिस बल की मांग भी की गई है। प्रशासन ने कुल 113 अवैध कॉलोनियों की सूची तैयार की है।
FIR किसानों पर, कॉलोनाइजर पर क्यों नहीं?
इस पूरे अभियान को लेकर सबसे बड़ा सवाल यही खड़ा हो रहा है कि जिन लोगों पर FIR दर्ज की जा रही है, उनमें अधिकांश किसान हैं। जबकि असल में कॉलोनियां काटने और प्लॉटिंग कराने वाले लोग अलग हैं।
दस्तावेजों में कॉलोनाइजरों के नाम दर्ज नहीं होने के कारण प्रशासन की कार्रवाई ज़मीन मालिक किसानों तक ही सीमित रह जा रही है। ऐसे में सवाल उठता है कि अवैध कॉलोनियों का कारोबार करने वाले कॉलोनाइजर आखिर कानून के शिकंजे से कैसे बच रहे हैं।
जल्द चलेगा तोड़फोड़ अभियान
प्रशासन की योजना के अनुसार आने वाले दिनों में अवैध कॉलोनियों में बने रास्तों, बाउंड्री वॉल और अन्य निर्माणों को तोड़ने का अभियान शुरू किया जाएगा। इसके लिए पुलिस बल की मदद मांगी गई है ताकि किसी तरह का विरोध या अव्यवस्था न हो।
अधिग्रहण और विकास के दावे हकीकत से दूर
पिछले वर्ष जिला प्रशासन ने दावा किया था कि अवैध कॉलोनियों की सुनवाई के बाद जमीनों का अधिग्रहण कर कॉलोनाइजरों पर FIR दर्ज की जाएगी। साथ ही बची हुई जमीनों को बेचकर कॉलोनी का विकास किया जाएगा।
लेकिन ज़मीनी हकीकत यह है कि अब तक न तो किसी जमीन का अधिग्रहण हो सका है और न ही किसी कॉलोनी का विकास। अब तक 294 FIR दर्ज होने के बावजूद ज्यादातर मामलों में कोई ठोस नतीजा सामने नहीं आया है।
एग्रीमेंट के खेल में बच निकलते हैं कॉलोनाइजर
अवैध कॉलोनियों के मामलों में कॉलोनाइजर अक्सर जमीन अपने नाम पर नहीं कराते। पूरा कारोबार एग्रीमेंट के जरिए किया जाता है, जबकि रजिस्ट्री किसान के नाम ही रहती है।
मुनाफे के लालच में कई किसान इस प्रक्रिया में शामिल हो जाते हैं, लेकिन जब कार्रवाई होती है तो कॉलोनाइजर बच निकलते हैं और किसान कानूनी पचड़े में फंस जाते हैं। मौजूदा कार्रवाई में भी हालात कुछ ऐसे ही नजर आ रहे हैं।
राजनीतिक रसूख भी बना बाधा
राजधानी में शायद ही कोई ऐसा इलाका हो, जहां अवैध कॉलोनियों का जाल न फैला हो। प्रशासन FIR तो दर्ज करता है, लेकिन कई मामलों में राजनीतिक रसूख के चलते कार्रवाई आगे नहीं बढ़ पाती।
इसी वजह से सस्ती कृषि भूमि पर अवैध प्लॉटिंग कर महंगे दामों पर बेचने का खेल लगातार जारी है। इसका सबसे बड़ा नुकसान आम खरीदार को उठाना पड़ता है।
बिना वारंट कार्रवाई का प्रावधान
मध्य प्रदेश पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम, 1993 की धारा 61-घ (3) के तहत अवैध कॉलोनी निर्माण और गैरकानूनी भूमि डायवर्जन को गंभीर अपराध माना गया है। इसमें दोषी को 3 से 7 साल तक की सजा और न्यूनतम 10 हजार रुपये जुर्माने का प्रावधान है। यह संज्ञेय अपराध है, जिसमें पुलिस बिना वारंट कार्रवाई कर सकती है।
भोपाल में अवैध कॉलोनियों पर कार्रवाई ने एक बार फिर सिस्टम की कमजोर कड़ी को उजागर कर दिया है। जब तक कॉलोनाइजरों पर सीधी कार्रवाई नहीं होगी, तब तक इस समस्या का स्थायी समाधान मुश्किल है। जरूरत है कि प्रशासन किसानों के साथ-साथ अवैध प्लॉटिंग के असली मास्टरमाइंड तक भी पहुंचे।
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