5f36ef21-c2f
भोपाल के मैरियट होटल की लिफ्ट में फंसी ACS की पत्नी, 20 मिनट चला रेस्क्यू, मचा हड़कंप
Sourabh Bhatnagar | Sept 21, 2026, 11:27 IST
bhopal marriott lift accident acs wife
भोपाल के मैरियट होटल में लिफ्ट बीच में रुकने से एसीएस की पत्नी 20 मिनट तक फंसी रहीं। जांच में लापरवाही मिलने पर निगम ने तीन लिफ्ट सील कर दीं। सरकार अब पूरे प्रदेश के लिए नया लिफ्ट एक्ट बना रही है।
भोपाल के चर्चित होटल कोर्टयार्ड बाय मैरियट में रविवार सुबह उस समय हड़कंप मच गया, जब होटल की लिफ्ट अचानक बीच रास्ते में बंद हो गई। यह घटना डीबी मॉल स्थित होटल में सुबह करीब 10:40 बजे हुई।
बताया जा रहा है कि उस समय लिफ्ट में एक आईएएस अधिकारी की पत्नी मौजूद थीं। अधिकारी वर्तमान में अपर मुख्य सचिव (ACS) पद पर तैनात हैं। लिफ्ट रुकने के बाद उनकी पत्नी करीब 20 मिनट तक अंदर ही फंसी रहीं।
काफी देर तक बाहर नहीं निकल पाने से वह घबरा गईं। उन्होंने लिफ्ट के अंदर से मदद के लिए आवाज लगाई। इसके बाद होटल स्टाफ को इसकी जानकारी मिली और उन्हें बाहर निकालने की कोशिश शुरू की गई। घटना के बाद होटल की लिफ्ट व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठने लगे।
![5f36ef21-c2f]()
यह जानकारी मिलते ही प्रशासनिक हलकों में हलचल मच गई। एसीएस के निर्देश पर टीम तुरंत भोपाल मैरियट होटलपहुंची। भोपाल नगर निगम कमिश्नर संस्कृति जैन खुद मौके पर गईं। उनके साथ फायर ब्रिगेड, बिजली और स्वास्थ्य विभाग की टीमें भी थीं।
टीम ने काफी कोशिशों के बाद लिफ्ट को खोला और अधिकारी की पत्नी को सुरक्षित बाहर निकाला। राहत की बात रही कि उन्हें किसी तरह की गंभीर चोट नहीं आई।
इस घटना के बाद होटल की लिफ्ट व्यवस्था पर सवाल उठने लगे। मामले की जानकारी मिलते ही नगर निगम ने जांच शुरू कर दी है। अधिकारी अब यह पता लगाने में जुटे हैं कि लिफ्ट में खराबी किस वजह से आई और सुरक्षा व्यवस्था में कोई लापरवाही तो नहीं हुई।
निगम की टीम ने होटल पहुंचकर लिफ्ट और उसकी व्यवस्था की जांच की। जांच में पता चला कि लिफ्ट में एआरडी (Automatic Rescue Device) लगा ही नहीं था। यह डिवाइस लिफ्ट के बीच में रुकने पर उसे अपने आप पास की मंजिल तक पहुंचाने में मदद करता है।
नियमों के मुताबिक लिफ्ट का हर महीने मेंटेनेंस होना जरूरी है, लेकिन होटल में यह काम समय पर नहीं कराया गया था। जांच में सामने आया कि लिफ्ट का आखिरी निरीक्षण 29 मई को हुआ था। इसके बाद 31 अगस्त से होने वाला मासिक मेंटेनेंस भी पेंडिंग था।
यानी लिफ्ट की नियमित जांच और देखरेख में करीब एक महीने से लापरवाही बरती जा रही थी। निगम की टीम अब इस मामले में आगे की जांच कर रही है।
जांच के दौरान होटल में फायर सेफ्टी के इंतजाम भी मानकों के मुताबिक नहीं मिले। इसके अलावा इमरजेंसी एग्जिट की स्थिति भी ठीक नहीं पाई गई।
निगम की टीम के मुताबिक, इससे पहले भी होटल प्रबंधन को सुरक्षा व्यवस्था सुधारने के लिए नोटिस दिए गए थे। लेकिन इन नोटिसों पर गंभीरता से ध्यान नहीं दिया गया।
लापरवाही सामने आने के बाद निगम ने कार्रवाई करते हुए होटल की तीन लिफ्ट को अस्थायी रूप से सील कर दिया। इसके साथ ही स्वास्थ्य शाखा की टीम ने होटल के फूड लाइसेंस की भी जांच की।
कार्रवाई के दौरान दोपहर करीब 2 बजे तक निगम के लगभग 30 अधिकारी और कर्मचारी मौके पर मौजूद रहे। टीम ने होटल की सुरक्षा व्यवस्था और अन्य जरूरी मानकों की जांच की।
![5a120cb0-7fd]()
![64439f93-401]()
इस घटना के बाद नगर निगम ने पूरे शहर की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर बड़ा कदम उठाने का फैसला किया है। निगमायुक्त संस्कृति जैन ने बताया कि अब विशेष टीमें बनाई जाएंगी। ये टीमें शहर की सभी बहुमंजिला इमारतों की जांच करेंगी।
जांच के दायरे में होटल, व्यावसायिक परिसर और अस्पताल भी शामिल रहेंगे। आईएएस संस्कृति जैन के मुताबिकटीमों द्वारा लिफ्ट के रखरखाव, एआरडी (Automatic Rescue Device) सिस्टम और सुरक्षा प्रमाण पत्रों की जांच की जाएगी।
निगम यह भी देखेगा कि इमारतों में सुरक्षा नियमों का पालन हो रहा है या नहीं। जांच के दौरान अगर किसी जगह लापरवाही मिली तो निगम सीधे सीलिंग की कार्रवाई करेगा। अधिकारियों का कहना है कि लोगों की सुरक्षा को देखते हुए यह अभियान चलाया जाएगा।
दरअसल, मैरियट होटल में लिफ्ट रुकने की यह घटना पहली नहीं है। मध्य प्रदेश में पहले भी लिफ्ट से जुड़े हादसे सामने आते रहे हैं। इन्हीं घटनाओं को देखते हुए सरकार अब नया लिफ्ट एक्ट लाने की तैयारी कर रही है।
नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने इसके लिए ड्राफ्ट तैयार कर लिया है। प्रस्तावित कानून के तहत सभी तरह की लिफ्ट का पंजीयन जरूरी किया जाएगा। इसमें व्यावसायिक, औद्योगिक, हैवी ड्यूटी लिफ्ट और एस्केलेटर भी शामिल होंगे।
वहीं घरों में लगी निजी लिफ्ट को अलग से अनुमति लेने की जरूरत नहीं होगी। हालांकि, उनकी जानकारी स्थानीय निकाय को देना अनिवार्य रहेगा। नए कानून का उद्देश्य लिफ्ट की सुरक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाना और नियमित जांच सुनिश्चित करना है।
मध्य प्रदेश में लिफ्ट से जुड़े हादसे पहले भी सामने आ चुके हैं। अगस्त 2026 में रीवा के एक अस्पताल में लिफ्ट अचानक गिर गई थी। इस हादसे में मरीज सुरेश सेन की मौत हो गई थी।
इससे पहले फरवरी 2026 में भोपाल के चिनार डीम सिटी में भी लिफ्ट गिरने की घटना हुई थी। इसमें सोसायटी के दो रहवासी गंभीर रूप से घायल हुए थे। बताया गया था कि इस सोसायटी में लिफ्ट हादसे की यह दूसरी घटना थी।
वहीं जनवरी 2026 में भोपाल की एक हाउसिंग कॉलोनी में हादसा और भी गंभीर था। यहां 77 साल के बुजुर्ग प्रीतम गिर लिफ्ट के खुले डक्ट में गिर गए थे। हादसे के बाद उनका शव करीब 10 दिनों तक वहीं पड़ा रहा।
जब लिफ्ट को दोबारा चालू किया गया तो वहां से बदबू आने लगी। इसके बाद मामले की जानकारी मिली और शव को बाहर निकाला गया। इन घटनाओं के बाद लिफ्ट की सुरक्षा और नियमित जांच को लेकर सवाल उठते रहे हैं।
नए लिफ्ट एक्ट के तहत सरकार एक ऑनलाइन सिस्टम तैयार करने की योजना बना रही है। इस सिस्टम में लिफ्ट की अनुमति, निरीक्षण और मेंटेनेंस से जुड़ी पूरी जानकारी दर्ज की जाएगी।
हर नगरीय निकाय में एक अधिकारी को इसके लिए जिम्मेदारी दी जाएगी। लिफ्ट मालिकों को तय फॉर्मेट में लिफ्ट से जुड़ी सभी जानकारी देनी होगी। इसके बाद नगरीय निकायों के लिफ्ट इंस्पेक्टर समय-समय पर इनकी जांच करेंगे।
नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का प्रावधान भी रखा गया है। पुरानी इमारतों में लगी लिफ्ट और एस्केलेटर का भी पंजीयन कराना जरूरी होगा। अधिकारियों के अनुसार, तैयार ड्राफ्ट को जल्द वरिष्ठ सचिव समिति के सामने रखा जाएगा। वहां से मंजूरी मिलने के बाद इसे कैबिनेट में पेश किया जाएगा।
फिलहाल प्रदेश में लिफ्ट को लेकर पूरी जानकारी उपलब्ध नहीं है। नगरीय विकास विभाग के पास भी यह आंकड़ा नहीं है कि मध्य प्रदेश में कुल कितनी लिफ्ट लगी हुई हैं। अभी सिर्फ मध्य प्रदेश नगर पालिका कॉलोनी विकास नियम में लिफ्ट से जुड़ा एक छोटा प्रावधान मौजूद है।
लिफ्ट संचालन और सुरक्षा के लिए अब तक कोई अलग और मजबूत कानून नहीं बनाया गया था। दूसरी ओर, शहरों में लगातार बहुमंजिला इमारतों की संख्या बढ़ रही है। इसके साथ ही लिफ्ट की जरूरत भी तेजी से बढ़ रही है।
मैरियट होटल जैसी घटनाओं ने एक बार फिर लिफ्ट सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सरकार नए कानून के जरिए लिफ्ट की नियमित जांच, रखरखाव और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की तैयारी में है।
ACS ऋचा शर्मा के बाद अब लिफ्ट में फंसीं IAS की पत्नी, रायपुर में मचा हड़कंप
ससुर की आरटीआई ने खोला बहू तृप्ति सिंह के फर्जी आईएएस होने का राज, 13 लोगों से ठगे डेढ़ करोड़
आईएएस निधि निवेदिता के आदेश पर मचा बवाल, सरकार नाराज, पलटा पूरा फैसला
राज्य प्रशासनिक सेवा के तीन अफसर बनेंगे आईएएस, DPC बैठक में मिली हरी झंडी
बताया जा रहा है कि उस समय लिफ्ट में एक आईएएस अधिकारी की पत्नी मौजूद थीं। अधिकारी वर्तमान में अपर मुख्य सचिव (ACS) पद पर तैनात हैं। लिफ्ट रुकने के बाद उनकी पत्नी करीब 20 मिनट तक अंदर ही फंसी रहीं।
काफी देर तक बाहर नहीं निकल पाने से वह घबरा गईं। उन्होंने लिफ्ट के अंदर से मदद के लिए आवाज लगाई। इसके बाद होटल स्टाफ को इसकी जानकारी मिली और उन्हें बाहर निकालने की कोशिश शुरू की गई। घटना के बाद होटल की लिफ्ट व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठने लगे।
मैरियट में लिफ्ट हादसा
20 मिनट फंसी रहीं ACS की पत्नी
इस घटना के बाद होटल की लिफ्ट व्यवस्था पर सवाल उठने लगे। मामले की जानकारी मिलते ही नगर निगम ने जांच शुरू कर दी है। अधिकारी अब यह पता लगाने में जुटे हैं कि लिफ्ट में खराबी किस वजह से आई और सुरक्षा व्यवस्था में कोई लापरवाही तो नहीं हुई।
जांच में मिली लापरवाही
नियमों के मुताबिक लिफ्ट का हर महीने मेंटेनेंस होना जरूरी है, लेकिन होटल में यह काम समय पर नहीं कराया गया था। जांच में सामने आया कि लिफ्ट का आखिरी निरीक्षण 29 मई को हुआ था। इसके बाद 31 अगस्त से होने वाला मासिक मेंटेनेंस भी पेंडिंग था।
यानी लिफ्ट की नियमित जांच और देखरेख में करीब एक महीने से लापरवाही बरती जा रही थी। निगम की टीम अब इस मामले में आगे की जांच कर रही है।
तीन लिफ्ट की गई सील
निगम की टीम के मुताबिक, इससे पहले भी होटल प्रबंधन को सुरक्षा व्यवस्था सुधारने के लिए नोटिस दिए गए थे। लेकिन इन नोटिसों पर गंभीरता से ध्यान नहीं दिया गया।
लापरवाही सामने आने के बाद निगम ने कार्रवाई करते हुए होटल की तीन लिफ्ट को अस्थायी रूप से सील कर दिया। इसके साथ ही स्वास्थ्य शाखा की टीम ने होटल के फूड लाइसेंस की भी जांच की।
कार्रवाई के दौरान दोपहर करीब 2 बजे तक निगम के लगभग 30 अधिकारी और कर्मचारी मौके पर मौजूद रहे। टीम ने होटल की सुरक्षा व्यवस्था और अन्य जरूरी मानकों की जांच की।
5a120cb0-7fd
64439f93-401
अब चलेगा सख्ती अभियान
जांच के दायरे में होटल, व्यावसायिक परिसर और अस्पताल भी शामिल रहेंगे। आईएएस संस्कृति जैन के मुताबिकटीमों द्वारा लिफ्ट के रखरखाव, एआरडी (Automatic Rescue Device) सिस्टम और सुरक्षा प्रमाण पत्रों की जांच की जाएगी।
निगम यह भी देखेगा कि इमारतों में सुरक्षा नियमों का पालन हो रहा है या नहीं। जांच के दौरान अगर किसी जगह लापरवाही मिली तो निगम सीधे सीलिंग की कार्रवाई करेगा। अधिकारियों का कहना है कि लोगों की सुरक्षा को देखते हुए यह अभियान चलाया जाएगा।
क्यों पड़ी नए कानून की जरूरत
नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने इसके लिए ड्राफ्ट तैयार कर लिया है। प्रस्तावित कानून के तहत सभी तरह की लिफ्ट का पंजीयन जरूरी किया जाएगा। इसमें व्यावसायिक, औद्योगिक, हैवी ड्यूटी लिफ्ट और एस्केलेटर भी शामिल होंगे।
वहीं घरों में लगी निजी लिफ्ट को अलग से अनुमति लेने की जरूरत नहीं होगी। हालांकि, उनकी जानकारी स्थानीय निकाय को देना अनिवार्य रहेगा। नए कानून का उद्देश्य लिफ्ट की सुरक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाना और नियमित जांच सुनिश्चित करना है।
पहले हो चुके हैं हादसे
इससे पहले फरवरी 2026 में भोपाल के चिनार डीम सिटी में भी लिफ्ट गिरने की घटना हुई थी। इसमें सोसायटी के दो रहवासी गंभीर रूप से घायल हुए थे। बताया गया था कि इस सोसायटी में लिफ्ट हादसे की यह दूसरी घटना थी।
वहीं जनवरी 2026 में भोपाल की एक हाउसिंग कॉलोनी में हादसा और भी गंभीर था। यहां 77 साल के बुजुर्ग प्रीतम गिर लिफ्ट के खुले डक्ट में गिर गए थे। हादसे के बाद उनका शव करीब 10 दिनों तक वहीं पड़ा रहा।
जब लिफ्ट को दोबारा चालू किया गया तो वहां से बदबू आने लगी। इसके बाद मामले की जानकारी मिली और शव को बाहर निकाला गया। इन घटनाओं के बाद लिफ्ट की सुरक्षा और नियमित जांच को लेकर सवाल उठते रहे हैं।
कैसे बनेगा नया सिस्टम
हर नगरीय निकाय में एक अधिकारी को इसके लिए जिम्मेदारी दी जाएगी। लिफ्ट मालिकों को तय फॉर्मेट में लिफ्ट से जुड़ी सभी जानकारी देनी होगी। इसके बाद नगरीय निकायों के लिफ्ट इंस्पेक्टर समय-समय पर इनकी जांच करेंगे।
नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का प्रावधान भी रखा गया है। पुरानी इमारतों में लगी लिफ्ट और एस्केलेटर का भी पंजीयन कराना जरूरी होगा। अधिकारियों के अनुसार, तैयार ड्राफ्ट को जल्द वरिष्ठ सचिव समिति के सामने रखा जाएगा। वहां से मंजूरी मिलने के बाद इसे कैबिनेट में पेश किया जाएगा।
फिलहाल प्रदेश में लिफ्ट को लेकर पूरी जानकारी उपलब्ध नहीं है। नगरीय विकास विभाग के पास भी यह आंकड़ा नहीं है कि मध्य प्रदेश में कुल कितनी लिफ्ट लगी हुई हैं। अभी सिर्फ मध्य प्रदेश नगर पालिका कॉलोनी विकास नियम में लिफ्ट से जुड़ा एक छोटा प्रावधान मौजूद है।
लिफ्ट संचालन और सुरक्षा के लिए अब तक कोई अलग और मजबूत कानून नहीं बनाया गया था। दूसरी ओर, शहरों में लगातार बहुमंजिला इमारतों की संख्या बढ़ रही है। इसके साथ ही लिफ्ट की जरूरत भी तेजी से बढ़ रही है।
मैरियट होटल जैसी घटनाओं ने एक बार फिर लिफ्ट सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सरकार नए कानून के जरिए लिफ्ट की नियमित जांच, रखरखाव और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की तैयारी में है।
FAQ
- सवाल : मध्यप्रदेश सरकार नया लिफ्ट कानून क्यों ला रही है?
जवाब: प्रदेश में लिफ्ट हादसों के कई मामले सामने आ चुके हैं, जिनमें रीवा में एक मरीज की मौत भी शामिल है। अभी लिफ्ट प्रबंधन के लिए कोई ठोस अलग कानून नहीं है। इसलिए नगरीय विकास विभाग ने नया लिफ्ट एक्ट तैयार किया है। इसमें हर लिफ्ट का पंजीयन, नियमित मेंटेनेंस और सख्त निरीक्षण अनिवार्य किया जाएगा।
ये खबरें भी पढ़ें...
ससुर की आरटीआई ने खोला बहू तृप्ति सिंह के फर्जी आईएएस होने का राज, 13 लोगों से ठगे डेढ़ करोड़
आईएएस निधि निवेदिता के आदेश पर मचा बवाल, सरकार नाराज, पलटा पूरा फैसला
राज्य प्रशासनिक सेवा के तीन अफसर बनेंगे आईएएस, DPC बैठक में मिली हरी झंडी
स्पेशल PSC को लेकर सस्पेंस में उम्मीदवार, केवल बैकलॉग और OBC पद आएंगे या अनारक्षित वर्ग को भी मिलेगा मौका, जानें सब कुछ
By Sanjay Gupta
श्रीगंगानगर बॉर्डर पर RDX ड्रॉपिंग: 20 साल का कुलवंत निकला हैंडलर, 2 साल में 10 केस
By Jyoti Mahender Bhardwaj
पंचायत चुनाव में कांग्रेस के टिकटों पर घमासान, सीताराम लांबा ने कहा-दफ्तरों पर ताले लगा दो
By Ashish Bhardwaj
जयपुर में सांड की टक्कर से मौत, परिवार को मिलेगा 61.35 लाख मुआवजा; बस का इंतजार कर रहे थे गिर्राज प्रसाद
By Jyoti Mahender Bhardwaj
एमपी में कागजों पर सुधर गए पांच हजार स्कूल, जमीनी हकीकत ने खोली मंत्री के दावों की पोल
By Aman Vaishnav
एमपी में खौफनाक वारदात: तुम्हारी बलि दूंगा कहकर बच्चे पर चाकू से नौ वार, मरा समझ जंगल में छोड़ा
By Arohi Raj
जयपुर में भीषण सड़क हादसा, 4 दोस्तों की मौत; खाटूश्यामजी से लौट रहे थे
By Jyoti Mahender Bhardwaj