भोपाल मास्टर प्लान 2047 पर बवाल: 66 गांवों के किसान क्यों नाराज? BIZ-1 और BIZ-2 का पूरा विवाद समझिए

Atul Dwivedi | Oct 23, 2026, 20:13 IST
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भोपाल मास्टर प्लान के खिलाफ 66 गांवों के किसान उतरे
भोपाल मास्टर प्लान के खिलाफ 66 गांवों के किसान उतरे

भोपाल मास्टर प्लान 2047 के ड्राफ्ट पर विवाद बढ़ गया है। 66 गांवों के किसानों ने जमीन के लैंड यूज पर सवाल उठाए हैं। किसानों का आरोप है कि कृषि भूमि पर नए प्रतिबंध लगेंगे। वहीं TNCP का कहना है कि BIZ-2 में खेती जारी रहेगी। विवाद में अधिकारियों की जमीनों को छूट देने के आरोप भी हैं।

किसानों ने नीलबड़ के पास धरना प्रदर्शन भी किया

भोपाल के मास्टर प्लान (master plan) का अभी सिर्फ ड्राफ्ट जारी हुआ है। लेकिन जब से ड्राफ्ट जारी हुआ है, तब से इसका सिर्फ विरोध हो रहा है। कभी किसान तो कभी व्यापारी तो कभी आम नागरिक आपत्ति दर्ज कराने टीएनसीपी दफ्तर पहुंच रहे हैं। मामले ने और तूल तब पकड़ा जब भोपाल में 22 अक्टूबर को 66 गांवों के किसानों का आंदोलन हुआ। किसानों का आरोप था कि भोपाल के नए मास्टर प्लान 2047 के ड्राफ्ट में जो प्रावधान किए गए हैं, उसकी वजह से उनकी कृषि जमीन का लैंड यूज बदल जाएगा।

किसानों ने नीलबड़ के पास धरना प्रदर्शन भी किया और अपनी आपत्ति भी दर्ज कराई। किसानों का आरोप था कि जहां अधिकारियों की जमीनें हैं वहां तो लैंड यूज नहीं बदला, फिर कृषि भूमि का लैंड यूज क्यों बदला जा रहा है ? इसके बाद द सूत्र ने पड़ताल की कि क्या वाकई ड्राफ्ट में ऐसा प्रावधान है ? भोजताल प्रभाव क्षेत्र 1 और 2 क्या है जिस पर सबसे ज्यादा विवाद है ? सबसे पहले आपको किसानों का पक्ष बताते हैं।

भोपाल मास्टर प्लान 2047: 66 गांवों के किसानों की जमीन पर भू-उपयोग प्रतिबंधों से विवाद गहराया | Bhopal Master Plan 2047: Dispute Deepens Over Land Use Restrictions on Farmland in 66 Villages
भोपाल मास्टर प्लान 2047 पर विवाद, 66 गांवों के किसानों की जमीन के इस्तेमाल पर उठे सवाल
22 Oct 2026 ,
By Ramanand Tiwari
भोपाल मास्टर प्लान 2047 में जमीन के जमीन के उपयोग को लेकर विवाद सामने आया है। शहर के विस्तार और बड़े तालाब के संरक्षण की प्रस्तावित व्यवस्था से किसान चिंतित हैं। किसानों का आरोप है कि उनकी पुश्तैनी जमीनों के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लग सकते हैं। इससे जमीन के मालिकाना अधिकार और उसके भविष्य को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
भोपाल मास्टर प्लान 2047 में जमीन के जमीन के उपयोग को लेकर विवाद सामने आया है। शहर के विस्तार और बड़े तालाब के संरक्षण की प्रस्तावित व्यवस्था से किसान चिंतित हैं। किसानों का आरोप है कि उनकी पुश्तैनी जमीनों के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लग सकते हैं। इससे जमीन के मालिकाना अधिकार और उसके भविष्य को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

किसानों ने क्या कहा ?

भोपाल में प्रदर्शन करने आए किसान अनोखी लाल से द सूत्र ने बात की। अनोखी लाल का कहना है कि सरकार हमारी जमीन का लैंड यूज क्यों बदलना चाहती है ? बिशनखेड़ी, भौंरी, खजूरी, फंदा, बरखेड़ा, मुगलिया छाप और इसके आस पास के 66 गांव की जमीन का लैंड यूज बदला जा रहा है ? फंदा ब्लॉक की बैरागढ़, चिरायु से फंदा टोल तक और बरखेड़ी, रातीबड़ की जमीनें भी इसमें शामिल हैं। सिर्फ मेंडोरा और मेंडोरी को बाहर रखा गया है, क्योंकि यहां अधिकारियों की जमीनें और बंगले हैं।

द सूत्र ने एक और किसान अवनीश भार्गव से भी बातचीत की। उनका कहना है कि कृषि भूमि को तो छोड़ दें। कोलांस नदी के 50 मीटर का एरिया संरक्षित किया जाए। ताकि कोलांस रुके नहीं। आपत्ति लगाने का वक्त भी कम दिया गया है। गांव वालों को पता ही नहीं है कि हो क्या रहा है।

ग्राम सभा का प्रस्ताव बुलाया जाना चाहिए, क्योंकि सरकार ने वादा किया था कि ग्राम सभा की अनुमति ली जाएगी। बड़े लोगों की जमीन मेंडोरा मेंडोरी में है। उसे कमर्शियल किया जा रहा है। ताज होटल भी तालाब के कैचमेंट में आता है। उसकी परमिशन है आपके पास ? किसान तो सिर्फ खेती करता है। अब आप खेती से उसे रोक रहे हैं। भार्गव का ये भी कहना है कि BIZ 1 और BIZ 2 को रद्द किया जाना चाहिए। क्योंकि अगर ऐसा होगा तो किसानों की जमीन पर सरकार का हुक्म चलेगा। सरकार जो चाहेगी वो करेगी।

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22 Oct 2026 ,
By Amresh Kushwaha
Bhopal. मध्य प्रदेश सरकार शहरों के विकास के लिए तीन नई नीतियां लाने की तैयारी में है। इनमें हाउसिंग पॉलिसी और रियूज्ड वाटर पॉलिसी शामिल है। इसके अलावा जमीन के विकास से जुड़े नियमों में भी बदलाव होगा। इन तीनों प्रस्तावों को 28 अक्टूबर को भोपाल में होने वाले <b>अर्बन कॉन्क्लेव</b> में पेश किया जा सकता है।
Bhopal. मध्य प्रदेश सरकार शहरों के विकास के लिए तीन नई नीतियां लाने की तैयारी में है। इनमें हाउसिंग पॉलिसी और रियूज्ड वाटर पॉलिसी शामिल है। इसके अलावा जमीन के विकास से जुड़े नियमों में भी बदलाव होगा। इन तीनों प्रस्तावों को 28 अक्टूबर को भोपाल में होने वाले <b>अर्बन कॉन्क्लेव</b> में पेश किया जा सकता है।

BIZ 1 और BIZ 2 क्या है ?

BIZ 1 और BIZ 2 का सीधा मतलब भोजताल प्रभाव क्षेत्र 1 और भोजताल प्रभाव क्षेत्र 2 है। भोपाल के बड़े तालाब से लगी जमीन और क्षेत्र भोजताल प्रभाव क्षेत्र 1 कहलाता है। जबकि भोजताल प्रभाव क्षेत्र 2 में गांव की वो जमीन शामिल है, जहां अभी खेती की जा रही है, या फिर वो जमीन जो तालाब से थोड़ी दूर है। किसानों की यही मांग है कि भोजताल प्रभाव क्षेत्र 2 की जमीन का लैंड यूज कृषि ही रहने दिया जाए, इसे बदला न जाए।

सीएम यादव निवेशकों से करेंगे सीधा संवाद: अर्बन कॉन्क्लेव-2026 में शहरी विकास पर मंथन | CM Yadav to directly interact with investors: Urban Conclave-2026 to brainstorm on urban development
इंदौर में अर्बन कॉन्क्लेव-2026: सीएम मोहन यादव करेंगे शहरी विकास पर चर्चा, इन्वेस्टर्स और एक्सपर्ट्स भी होंगे शामिल
20 Oct 2026 ,
By Arohi Raj
इंदौर में 28 अक्टूबर को अर्बन कॉन्क्लेव-2026 का आयोजन होगा। यह कार्यक्रम इंदौर के ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में होगा। इसमें मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव शहरी विकास से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करेंगे। कॉन्क्लेव में इंवेस्टर्स, स्टार्टअप्स, एक्सपर्ट्स और सरकारी विभागों के प्रतिनिधियों को भी बुलाया गया है। इसका फोकस निवेश, आधुनिक तकनीक, पर्यावरण संरक्षण और शहरों की जरूरतों पर रहेगा। इसका मकसद निवेश और नई तकनीक को बढ़ावा देना है।
इंदौर में 28 अक्टूबर को अर्बन कॉन्क्लेव-2026 का आयोजन होगा। यह कार्यक्रम इंदौर के ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में होगा। इसमें मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव शहरी विकास से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करेंगे। कॉन्क्लेव में इंवेस्टर्स, स्टार्टअप्स, एक्सपर्ट्स और सरकारी विभागों के प्रतिनिधियों को भी बुलाया गया है। इसका फोकस निवेश, आधुनिक तकनीक, पर्यावरण संरक्षण और शहरों की जरूरतों पर रहेगा। इसका मकसद निवेश और नई तकनीक को बढ़ावा देना है।

अधिकारियों ने क्या कहा ?

मामले में जानकारी के लिए द सूत्र ने नगर तथा ग्राम नियोजन (TNCP) के आयुक्त सह संचालक कौशलेंद्र विक्रम सिंह से बातचीत की। कौशलेंद्र विक्रम सिंह का कहना है कि ड्राफ्ट में कैचमेंट जैसा शब्द ही नहीं है। कैचमेंट एक व्यापक शब्द है। मध्यप्रदेश गंगा बेसिन में आता है लेकिन गंगा मध्यप्रदेश से तो नहीं बहती। ऐसे ही भोजताल प्रभाव क्षेत्र 2 (BIZ 2) में हमने कृषि करने की अनुमति दी है। BIZ 2 में तो बस स्टॉप, बिजली सब स्टेशन, फॉर्म हाउस, पुलिस स्टेशन वॉटर ट्रिटमेंट प्लांट जैसी एक्टिविटी की जा सकती है। BIZ 1 में जरूर पाबंदियां लगाई गई हैं। क्योंकि ये तालाब का बफर जोन है। अब तालाब के अंदर तो खेती और बिलडिंग बनाने की परमिशन नहीं दे सकते।

यशवंत क्लब में 50 करोड़ के टेंडर पर घमासान: चेयरमैन-सचिव ने सदस्यों पर डाला बाधा डालने का आरोप | Yashwant Club's 50 Crore Tender Dispute: Chairman-Secretary Accuse Members of Obstruction
यशवंत क्लब में द सूत्र के खुलासे के बाद विवाद, चेयरमैन-सचिव ने कमेटी सदस्यों को लिखा, आप बाधा डाल रहे
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By Sanjay Gupta
INDORE. यशवंत क्लब में टेंडर विवाद ( Tender Dispute ) को लेकर 'द सूत्र' के खुलासे के बाद बवाल मच गया है। चेयरमैन, सचिव और बिल्डिंग कमेटी अपने बचाव में उतर आई है। वहीं ,सवाल उठाने वाले सदस्यों को पत्र लिखा है। उधर क्लब में विरोधी मैसेज चलने लगे हैं और वर्तमान कमेटी को खड़ाउ सरकार कहा जा रहा है।
INDORE. यशवंत क्लब में टेंडर विवाद ( Tender Dispute ) को लेकर 'द सूत्र' के खुलासे के बाद बवाल मच गया है। चेयरमैन, सचिव और बिल्डिंग कमेटी अपने बचाव में उतर आई है। वहीं ,सवाल उठाने वाले सदस्यों को पत्र लिखा है। उधर क्लब में विरोधी मैसेज चलने लगे हैं और वर्तमान कमेटी को खड़ाउ सरकार कहा जा रहा है।

कृषि भूमि है तो वहां दूसरी गतिविधियां क्यों ?

हालांकि भोजताल प्रभाव क्षेत्र 2 में दूसरी गतिविधियों का ही विरोध हो रहा है। किसानों की यही मांग है कि जमीन को कृषि योग्य ही रहने दिया जाए, दूसरी गतिविधियों की इजाजत न दी जाए। लेकिन प्रशासन का कहना है कि दूसरी गतिविधियां सीमित दायरे में की जा सकेंगी। ताकि तालाब में बरसात का पानी आता रहे। ऐसा न हो कि किसी के पास अगर 5 एकड़ जमीन है, तो वो 5 एकड़ पर ही निर्माण कर ले और पानी तालाब तक न पहुंचे।
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