बेगुनाह को सजा देने पर अड़े थे ट्रायल जज, हाई कोर्ट ने उम्रकैद के आरोपी को किया बाइज्जत बरी

Anjali Dwivedi | Jun 01, 2026, 16:01 IST
Share
bhopal murder case
bhopal murder case

भोपाल के 12 साल के मासूम नितिन की हत्या के मामले में हाई कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने निचली अदालत से उम्रकैद पा चुके आरोपी संजय गुप्ता को बाइज्जत बरी कर दिया। हाई कोर्ट ने सुनवाई के दौरान गवाहों के बयानों में कई कमियाँ पाईं।

समझें क्या है पूरा मामला

  • साल 2015 में भोपाल के बाहरी इलाके में 12 साल के नितिन की हत्या हुई थी।
  • निचली अदालत ने साल 2017 में आरोपी संजय गुप्ता को उम्रकैद की सजा सुनाई थी।
  • अब मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने संजय गुप्ता को सभी आरोपों से बरी कर दिया है।
  • हाई कोर्ट ने निचली अदालत के जज के फैसले पर बेहद तल्ख टिप्पणी की है।
  • गवाह के बदलते बयानों और पुख्ता सबूतों के कारण केस में यह नया मोड़ आया।
मध्य प्रदेश के भोपाल से एक बेहद चौंकाने वाला कानूनी मामला सामने आया है। यहां करीब 11 साल पुराने एक मर्डर केस में हाई कोर्ट ने बड़ा फैसला दिया है। अदालत ने उम्रकैद की सजा काट रहे एक व्यक्ति को तुरंत रिहा करने का आदेश जारी किया है।

यह पूरा मामला साल 2015 में भोपाल के बाहरी इलाके का है। वहां नितिन नाम के एक 12 साल के मासूम बच्चे की बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। इस केस में पुलिस ने संजय गुप्ता नाम के व्यक्ति को मुख्य आरोपी बनाया था।

निचली अदालत ने दी थी उम्रकैद

पुलिस की जांच के बाद यह मामला भोपाल की निचली अदालत में चला था। साल 2017 में अदालत ने संजय गुप्ता को नितिन की हत्या का दोषी माना। इसके बाद जज ने आरोपी संजय को उम्रकैद यानी जीवनभर जेल की सजा सुना दी।

संजय गुप्ता ने इस फैसले को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में चुनौती दी। अब जबलपुर बेंच के जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस ए.के. सिंह ने इस पर अंतिम सुनवाई की। हाई कोर्ट ने सबूतों को देखने के बाद निचली अदालत का फैसला पूरी तरह पलट दिया।

जज के काम पर उठाए गंभीर सवाल

हाईकोर्ट ने इस मामले की समीक्षा करते हुए बेहद सख्त रुख अपनाया। उन्होंने निचली अदालत के जज के काम करने के तरीके पर उंगली उठाई। हाई कोर्ट के जजों ने कहा कि निचली अदालत के जज केस की सही दिशा से पूरी तरह भटक गए थे।

हाई कोर्ट ने अपनी टिप्पणी में यहां तक कहा कि निचली अदालत के जज किसी भी हालत में आरोपी को दोषी साबित करने पर तुले हुए दिखाई दे रहे थे। अदालत ने कानूनी प्रक्रिया में हुई इस बड़ी चूक पर गहरी नाराजगी जताई है।

गवाह के बयानों में सामने आया झोल

यह पूरा मर्डर केस मुख्य रूप से नितिन के चाचा साहब सिंह की गवाही पर टिका हुआ था। साहब सिंह ने दावा किया था कि उन्होंने नितिन को आखिरी बार संजय गुप्ता के बेटे के साथ देखा था।

हाई कोर्ट ने पाया कि गवाह बार-बार अपने बयान बदल रहा था। पुलिस को दिए बयान में उसने कहा कि वह उस वक्त कार से जा रहा था। वहीं जब वह कोर्ट में आया तो उसने कहा कि वह मोटरसाइकिल पर सवार था।

सबूत भेजने में छह महीने की देरी

अदालत ने पुलिस की जांच के ढीले रवैये पर भी हैरानी व्यक्त की है। यह पूरी घटना अप्रैल 2015 की बताई गई थी। मगर पुलिस ने मौके से जब्त सामान को अक्टूबर 2015 में जांच के लिए भेजा।

फोरेंसिक लैब में सामान भेजने में पूरे छह महीने की देरी की गई। हाई कोर्ट ने कहा कि इतने लंबे समय तक सबूतों को बिना किसी ठोस वजह के पास रखना जांच पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

किसने बचाई आरोपी की जान

इस केस में संजय गुप्ता के वकीलों ने कोर्ट में एलीबाई का नियम पेश किया। इसका मतलब होता है कि घटना के समय आरोपी किसी दूसरी जगह पर मौजूद था। वकीलों ने इसके पुख्ता सबूत भी पेश किए।

सबूतों के मुताबिक नितिन के गायब होने के वक्त संजय अपनी फैक्ट्री में काम कर रहा था। वह सुबह 8:30 बजे से शाम 5:00 बजे तक वहीं था। इसके बाद रात को वह अपने मालिक की बेटी की बर्थडे पार्टी में शामिल हुआ था।

हाई कोर्ट ने दिया तुरंत रिहाई का आदेश

हाई कोर्ट ने संजय गुप्ता के इस दावे को पूरी तरह सच और कानूनन सही माना। अदालत ने कहा कि जब आरोपी घटना के समय वहाँ था ही नहीं, तो वह हत्या कैसे कर सकता है।

सभी गवाहों और सबूतों को परखने के बाद अदालत ने संजय गुप्ता को बाइज्जत बरी कर दिया। इसके साथ ही जेल में बंद संजय को तुरंत रिहा करने के आदेश जारी कर दिए गए हैं।

FAQ

  1. कानून में एलीबाई क्या है?
    एलीबाई (Alibi) एक कानूनी बचाव है जिसका मतलब है कि अपराध के समय आरोपी घटना स्थल पर नहीं बल्कि किसी दूसरी जगह मौजूद था।
ये खबरें भी पढ़ें....

MP में फास्ट ट्रैक ग्रेजुएशन: अब 3 साल की डिग्री 2 साल में मिलेगी, जानें नया नियम

16 जून से खुलेंगे एमपी के सरकारी स्कूल, पहले दिन बच्चों को मिलेगा स्पेशल मील

एमपी में आदिवासी योजनाओं में गड़बड़ी, छात्रों की शिक्षा और गरीबों के हक से खिलवाड़

एमपी में अकेलेपन के साए में बुजुर्ग, अपनों से दूर होने पर बढ़ रही मुसीबतें



Tags:
  • मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
  • भोपाल
  • हत्या
  • जस्टिस विवेक अग्रवाल
  • मर्डर केस
  • जबलपुर बेंच
  • निचली अदालत का फैसला
गूगल पर द सूत्र चुनें ! Add as a preferredsource on Google
MP कर्मचारी प्रमोशन: 10 साल बाद पदोन्नति, अब 4 साल की छूट पर अटका मामला, राज्य कर्मचारी संघ ने सीएम मोहन यादव से की मांग

By Atul Dwivedi

MP कर्मचारी प्रमोशन: 10 साल बाद पदोन्नति, अब 4 साल की छूट पर अटका मामला, राज्य कर्मचारी संघ ने सीएम मोहन यादव से की मांग
एमपी भाजपा में 30 सितंबर को तीन दिग्गजों की एकसाथ आमद, 236 दिन बाद मिला प्रदेश संगठन महामंत्री

By Ramanand Tiwari

एमपी भाजपा में 30 सितंबर को तीन दिग्गजों की एकसाथ आमद, 236 दिन बाद मिला प्रदेश संगठन महामंत्री
मध्य प्रदेश भाजपा में अब लक्ष्मण रेखा कौन खींचेगा? चंद्रशेखर की होगी असली परीक्षा

By Ramanand Tiwari

मध्य प्रदेश भाजपा में अब लक्ष्मण रेखा कौन खींचेगा? चंद्रशेखर की होगी असली परीक्षा
मध्य प्रदेश के किसानों को बड़ी राहत: मिनी ट्रैक्टर पर मिलेगी 50 प्रतिशत तक सब्सिडी, ऑनलाइन पोर्टल पर ऐसे करें आवेदन

By Jitendra Shrivastava

मध्य प्रदेश के किसानों को बड़ी राहत: मिनी ट्रैक्टर पर मिलेगी 50 प्रतिशत तक सब्सिडी, ऑनलाइन पोर्टल पर ऐसे करें आवेदन
mp-top-news: खबरें काम की... ब्राह्मणों ने कभी शासन नहीं किया, नरोत्तम मिश्रा बोले खामोशी को कमजोरी न समझें

By Sanjay Dhiman

mp-top-news: खबरें काम की... ब्राह्मणों ने कभी शासन नहीं किया, नरोत्तम मिश्रा बोले खामोशी को कमजोरी न समझें
झाबुआ संयुक्त कलेक्टर अक्षय सिंह की नौकरी खतरे में, फर्जी जाति प्रमाणपत्र में ऐसे घिरे

By Sanjay Gupta

झाबुआ संयुक्त कलेक्टर अक्षय सिंह की नौकरी खतरे में, फर्जी जाति प्रमाणपत्र में ऐसे घिरे
बस्तर में बाढ़ का जायजा लेने पहुंचे CM साय, प्रभावित परिवारों से मिले, 10 हजार रुपए अतिरिक्त सहायता की घोषणा

By Arun Tiwari

बस्तर में बाढ़ का जायजा लेने पहुंचे CM साय, प्रभावित परिवारों से मिले, 10 हजार रुपए अतिरिक्त सहायता की घोषणा