भोपाल में बनेगा हाईटेक सेंट्रल विस्टा, एक हजार करोड़ और 12 नए टॉवर से बदलेगी प्रशासनिक व्यवस्था

Aman Vaishnav | Feb 23, 2026, 16:50 IST
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bhopal new central vista project details
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भोपाल में अब दिल्ली की तर्ज पर भव्य सेंट्रल विस्टा बनेगा। सामान्य प्रशासन विभाग ने इस प्रोजेक्ट के शुरुआती स्वरूप को मंजूरी दे दी है। इस प्रोजेक्ट को मेसर्स सीपी कुकरेजा फर्म डिजाइन करेगी।

भोपाल में बनने वाले नए सेंट्रल विस्टा/स्टेट कैपिटल कॉम्प्लेक्स प्रोजेक्ट ने रफ्तार पकड़ ली है। सामान्य प्रशासन विभाग ने इस योजना के शुरुआती रूप पर सहमति दे दी है। हाल ही में सामान्य प्रशासन विभाग की उच्च स्तरीय बैठक हुई थी। इसबैठक में हाउसिंग बोर्ड से 4 महीने के अंदर यानी 30 जून तक डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) को फाइनल करने को कहा गया है।

सेंट्रल विस्टा कॉम्प्लेक्स कौन डिजाइन करेगा?

बोर्ड ने सेंट्रल विस्टा की डिजाइन और डीपीआर (डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट) के लिए आर्किटेक्ट भी फाइनल कर दिया है। ये आर्किटेक्ट टेंडर के जरिए फाइनल हुआ है। मेसर्स सीपी कुकरेजा फर्म इसे डिजाइन करेगी। इन्होंने पहले वल्लभ भवन, हमीदिया हॉस्पिटल और जेएनयू दिल्ली जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स की डिजाइन की है। इस नए प्रोजेक्ट का अनुमानित खर्च लगभग एक हजार करोड़ रुपए होगा।

59 ऑफिस सेंट्रल विस्टा के इच्छुक

सामान्य प्रशासन विभाग ने सभी सरकारी विभागों से उनकी जानकारी मांगी थी। ये जानकारी ऑफिस की जरूरतों और जगह बदलने के बारे में थी। अब तक की जानकारी के मुताबिक 58 विभागों के 84 ऑफिस से पत्र प्राप्त हुए हैं। इनमें से 33 विभागों के 59 ऑफिस सेंट्रल विस्टा में शिफ्ट होने की इच्छा रखते हैं। इन विभागों ने कुल एक लाख तीन हजार वर्ग मीटर जगह की मांग की है।

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ऑफिस एकदम हाईटेक होगा

बाकी 6 ऑफिसों में रेनोवेशन और नए बिल्डिंग के निर्माण की वजह से सहमति नहीं बन पाई है। बाकी 19 ऑफिसों के पास अपने खुद के और पूरी तरह से तैयार ऑफिस हैं। हालांकि, जिन ऑफिसों में रेनोवेशन या निर्माण का काम अभी शुरू नहीं हुआ है, उनके काम को रोका जा सकता है।

किसी को भी नई जमीन नहीं दी जाएगी। सभी को सेंट्रल विस्टा में ही जगह मिलेगी। इस प्रोजेक्ट में नई और एडवांस तकनीक के साथ सारी सुविधाएं होंगी। ये ऑफिस एकदम हाईटेक होगा जैसे बड़े कंपनियों के होते हैं।

12 नए टॉवर बनेंगे

पुराने सतपुड़ा और विंध्याचल भवनों की जगह अब नया सेंट्रल विस्टा बनेगा। पहले दोनों भवनों का कुल क्षेत्रफल 76 हजार 500 वर्ग मीटर था। नए सेंट्रल विस्टा का क्षेत्रफल लगभग दोगुना यानी 1.60 लाख वर्ग मीटर होगा। इस नए प्रोजेक्ट में वल्लभ भवन की डिजाइन को ध्यान में रखते हुए 12 नए टॉवर बनाए जाएंगे।

12 टॉवर की छत जोड़कर एक परगोला

नए डिजाइन में सभी 12 टॉवर की छतों को जोड़कर एक परगोला (छत के ऊपर एक तरह की संरचना) बनाने का सुझाव दिया गया है। इससे पूरे परिसर का तापमान कम रहेगा। साथ ही सोलर पैनल से बिजली भी बनाई जा सकेगी। हालांकि, साधिकार समिति ने इस परगोला को बनाने में आने वाली लागत का पूरा विवरण मांगा है।

पार्किंग और ग्रीन एरिया पर विशेष ध्यान

प्रस्तावित नए प्रोजेक्ट में पार्किंग की सुविधा पर खास ध्यान दिया गया है। नए टॉवरों के लिए पार्किंग ऐसी बनाई जाएगी जो अगले 50 सालों तक पर्याप्त हो। वल्लभ भवन में जो पार्किंग अधिकारियों के लिए निर्धारित है, उसे तोड़कर टॉवर 1 और 2 का काम शुरू किया जाएगा। नए सेंट्रल विस्टा में हरे-भरे इलाके को 4 गुना ज्यादा बढ़ा दिया गया है। पहले यहां 5.84 हेक्टेयर ग्रीन एरिया था। अब इसे बढ़ाकर 22.46 हेक्टेयर किया जा रहा है।

सड़कों का चौड़ीकरण

इस प्रोजेक्ट में आसपास के मेट्रो स्टेशनों से कवर किए हुए पाथ-वे, हॉकर्स कॉर्नर और टॉयलेट बनाए जाएंगे। दूर-दराज से आने वाले लोगों के लिए पब्लिक ट्रांसपोर्ट की व्यवस्था भी की जाएगी। मौजूदा सड़कों को चौड़ा और सुंदर बनाया जाएगा। साथ ही इन पर फुटपाथ भी बनाए जाएंगे।

मध्यप्रदेश हाउसिंग बोर्ड के कमिश्नर गौतम सिंह ने बताया कि यह प्रोजेक्ट प्रशासनिक कार्यों को और ज्यादा प्रभावी बनाएगा। साथ ही विभागों के बीच बेहतर तालमेल बनाने और आम लोगों की सुविधा के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। मध्यप्रदेश सरकार की मंशा के अनुसार बोर्ड इस पर तेजी से काम कर रहा है।

क्या है सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट?

राजधानी में अभी ज्यादातर सरकारी दफ्तर अलग-अलग जगहों पर हैं। शासकीय विभागों की कामकाजी जरूरतों और नई भर्ती के लिए नए ऑफिस की जरूरत है। पुराने दफ्तरों के हाल भी खराब हो चुके हैं।

इसी को देखते हुए नया प्रशासनिक केंद्र बनाने की जरूरत है। मध्यप्रदेश शासन नई दिल्ली के सेंट्रल विस्टा की तरह ही केंद्र बनाने की योजना पर काम कर रहा है। ये प्रशासनिक केंद्र सतपुड़ा और विंध्याचल भवन की जगह पर बनेगा।

भोपाल के सेंट्रल विस्टा में ज्यादातर सरकारी दफ्तर एक ही जगह पर होंगे। इससे कामकाजी लोगों को बहुत आसानी होगी। इससे न सिर्फ सरकारी कामकाजी प्रक्रिया में सुविधा आएगी, बल्कि आम जनता के लिए भी यह बहुत सहज होगा।

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