भोपाल में नर्सिंग कॉलेज-अस्पताल नेटवर्क की जांच तेज, सीएमएचओ कार्यालय भी घेरे में

भोपाल में अवैध नर्सिंग कॉलेजों और संदिग्ध अस्पताल संचालन पर जांच तेज हो गई है। सीएमएचओ कार्यालय भी शक के घेरे में है। मामले में फर्जी निरीक्षण रिपोर्ट का आरोप लगा है।

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Ramanand Tiwari
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News In Short

  • भोपाल में अवैध नर्सिंग कॉलेज और अस्पतालों पर गंभीर जांच शुरू हुई है।

  • भोपाल साइबर पुलिस ने जांच पूरी कर डीसीपी क्राइम को सौंप दी है।

  • फर्जी निरीक्षण रिपोर्ट तैयार करने के आरोप में सीएमएचओ कार्यालय के अधिकारी शामिल है।

  • शिकायत के बाद 12 दिसंबर 2025 को अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।

  • एनएसयूआई नेताओं ने इसे पूरे स्वास्थ्य और शिक्षा तंत्र की विश्वसनीयता से जोड़ा है।

News In Detail

BHOPAL. भोपाल में अवैध नर्सिंग कॉलेजों और संदिग्ध अस्पताल संचालन से जुड़ा एक गंभीर मामला सामने आया है। इस बार मामला सिर्फ शिकायत तक सीमित नहीं रहा। राज्य साइबर पुलिस मुख्यालय ने इसे संज्ञान में लेकर औपचारिक जांच के निर्देश जारी कर दिए हैं। यह कार्रवाई भोपाल के स्वास्थ्य तंत्र पर कई अहम सवाल खड़े कर रही है।

साइबर सेल का बड़ा कदम, डीसीपी क्राइम को जांच के निर्देश

राज्य साइबर पुलिस मुख्यालय, भोपाल ने मामले की शुरुआत जांच पूरी कर ली है। इसके बाद, पुलिस उपायुक्त (क्राइम), भोपाल को जांच सौंप दी गई है। साफ निर्देश दिए गए हैं कि यदि फर्जी दस्तावेज या कूटरचना पाई जाती है, तो कार्रवाई होगी। वहीं, यदि प्रशासन को गुमराह करने के तथ्य सामने आए, तो एफआईआर दर्ज की जाएगी।

क्या है पूरा मामला? फर्जी निरीक्षण रिपोर्ट की कहानी

यह विवाद एनआरआई इंस्टीट्यूट ऑफ नर्सिंग, भोपाल और उससे संबद्ध अस्पताल की वैधता से जुड़ा है। संस्थान की मान्यता और वास्तविक सुविधाओं को लेकर शिकायत दर्ज कराई गई थी।

इसके बाद मध्यप्रदेश नर्सेस रजिस्ट्रेशन काउंसिल ने सीएमएचओ भोपाल को स्पष्ट निर्देश दिए थे। इसमें कहा गया कि मौके पर भौतिक निरीक्षण कर प्रमाण सहित रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए।

निरीक्षण हुआ या सिर्फ कागजों पर खानापूर्ति?

सीएमएचओ कार्यालय ने जिला टीकाकरण अधिकारी डॉ. रितेश रावत और चिकित्सा अधिकारी डॉ. अभिषेक सेन को निरीक्षण की जिम्मेदारी दी है। आरोप है कि इन दोनों अधिकारियों ने बिना सही तरीके से निरीक्षण किए रिपोर्ट तैयार कर दी थी। यही रिपोर्ट बाद में शासन और नर्सिंग काउंसिल को सौंपी गई थी।

प्रशासन को गुमराह करने का आरोप, सबूत भी पेश

इस कथित फर्जीवाड़े से जुड़े दस्तावेज और तथ्य वरिष्ठ अधिकारियों के समक्ष रखे गए हैं। शिकायत में यह भी कहा गया कि निरीक्षण रिपोर्ट वास्तविक स्थिति से मेल नहीं खाती और इससे अवैध संस्थानों को संरक्षण मिला है।

कार्रवाई क्यों अटकी? संरक्षण के आरोप गहराए

मामले में 12 दिसंबर 2025 को संबंधित डॉक्टरों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। वहीं, एक महीने से अधिक समय बीत जाने के बावजूद ठोस कार्रवाई नहीं होने से सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि देरी के पीछे सिस्टम के भीतर से ही संरक्षण दिया जा रहा है।

एनएसयूआई नेता का पक्ष

एनएसयूआई प्रदेश उपाध्यक्ष रवि परमार का कहना है कि यह मामला सिर्फ एक कॉलेज या अस्पताल का नहीं है, बल्कि पूरे स्वास्थ्य और शिक्षा तंत्र की विश्वसनीयता से जुड़ा है। उनके अनुसार, यदि समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो ऐसे फर्जी संस्थान छात्रों और मरीजों दोनों के भविष्य से खिलवाड़ करते रहेंगे।

आगे क्या? एफआईआर की तैयारी या फिर जांच का इंतजार

अब निगाहें डीसीपी क्राइम की जांच पर टिकी हैं। यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो सीएमएचओ कार्यालय के अधिकारियों से लेकर नर्सिंग कॉलेज और अस्पताल प्रबंधन तक पर आपराधिक कार्रवाई तय मानी जा रही है। यह मामला आने वाले दिनों में स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर बड़ा असर डाल सकता है।

क्यों अहम है यह मामला?

यह सिर्फ एक शिकायत नहीं, बल्कि सिस्टम के भीतर संभावित मिलीभगत की ओर इशारा करता है। नर्सिंग छात्रों का भविष्य, मरीजों की सुरक्षा और सरकारी निगरानी की साख-तीनों इस जांच के नतीजों पर निर्भर हैं। अब देखना यह है कि जांच सिर्फ फाइलों तक सीमित रहती है या जमीन पर भी असर दिखाती है।

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भोपाल साइबर पुलिस नर्सिंग कॉलेज सीएमएचओ कार्यालय
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