भोपाल में सहजयोग ध्यान केंद्र का शुभारंभ आज, आत्मसाक्षात्कार का मिलेगा अनुभव
The Sootr | Jun 06, 2026, 10:15 IST
sahajayoga bhopal center inauguration
भोपाल के मुगालिया छाप में आज 'चैतन्य धाम' सहजयोग ध्यान केंद्र का भव्य शुभारंभ हो रहा है। इस धार्मिक और आध्यात्मिक महोत्सव में भजन संध्या, आत्मसाक्षात्कार और भोजन प्रसाद की भी व्यवस्था है।
भोपाल के मुगालिया छाप में एक नया सहजयोग ध्यान केंद्र (चैतन्य धाम) शुरू होने जा रहा है। यह ध्यान केंद्र माताजी निर्मला देवी की याद में बनाया गया है। इस खास अवसर पर एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया है। इसमें सुंदर भजनों की प्रस्तुति होगी और लोगों को आत्मसाक्षात्कार (self-realization) का अनुभव कराया जाएगा। इस कार्यक्रम में शामिल होने वाले सभी श्रद्धालुओं और मेहमानों के लिए भजन संध्या के बाद स्वादिष्ट भोजन प्रसाद की भी विशेष व्यवस्था की गई है।
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यह कार्यक्रम आज यानी शनिवार, 6 जून को शाम 5 बजे से सहजयोग ध्यान केंद्र, मुगालिया छाप में आयोजित किया जाएगा। सहजयोग परिवार भोपाल और मुगालिया छाप के समस्त ग्रामीणों ने सभी लोगों से यह विनम्र अनुरोध किया है कि वे अपने पूरे परिवार के साथ इस कार्यक्रम में जरूर आएं। आयोजकों का कहना है कि यहां आकर लोग श्रीमाताजी के दिव्य संदेशों को सुन सकते हैं। साथ ही, ध्यान (मेडिटेशन) के जरिए मन की शांति का अनुभव कर अपने जीवन को संतुलित और सफल बना सकते हैं।
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मध्य प्रदेश के एक छोटे से शहर छिंदवाड़ा में 21 मार्च 1923 को एक ऐसी बच्ची का जन्म हुआ, जिसे दुनिया बाद में श्री माताजी के नाम से जानने लगी। इनका पूरा नाम निर्मला साल्वे था, जो बाद में विवाह के बाद निर्मला श्रीवास्तव हो गया।
उनके पिता प्रसाद साल्वे एक प्रतिभाशाली वकील थे। वे 14 भाषाएं जानते थे और उन्होंने कुरान का हिंदी में अनुवाद भी किया था। माता कोर्नेलिया साल्वे की अपनी अलग पहचान थी। वे भारत की पहली महिला थीं जिन्होंने गणित में ऑनर्स डिग्री हासिल की थी
5 मई 1970 का दिन श्री माताजी के जीवन का सबसे महत्वपूर्ण दिन था। 47 साल की उम्र में उन्होंने एक ऐसी विधि विकसित की जिससे वे हजारों लोगों को एक साथ आत्मसाक्षात्कार दे सकती थीं। इसी विधि को उन्होंने "सहज योग" (Sahaja Yoga) का नाम दिया।
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सहज योग की बुनियाद में कुंडलिनी ऊर्जा की अवधारणा है। श्री माताजी का मानना था कि हर इंसान के भीतर यह सूक्ष्म ऊर्जा मौजूद है। इस ऊर्जा के जागरण से ही सच्चा आत्मसाक्षात्कार संभव है। उन्होंने इसे हर इंसान का जन्मसिद्ध अधिकार बताया। इसीलिए उन्होंने कभी भी इसके लिए कोई शुल्क नहीं लिया।
1980 के दशक में श्री माताजी ने यूरोप, ऑस्ट्रेलिया और उत्तरी अमेरिका का लगातार दौरा किया। 1990 के दशक में उनके कदम दक्षिण अमेरिका, अफ्रीका, रूस, पूर्वी यूरोप और एशिया तक पहुंचे। हर जगह उन्होंने बिना पैसे लिए सहज योग सिखाया।
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23 फरवरी 2011 को श्री माताजी निर्मला देवी ने इटली के जिनोआ में 87 वर्ष की आयु में शांतिपूर्वक इस दुनिया को अलविदा कहा। लेकिन उनका काम आज भी जारी है। दुनिया के 100 से भी अधिक देशों में सहज योग के ध्यान केंद्र चल रहे हैं। वहां आज भी यह योग बिल्कुल मुफ्त सिखाया जाता है।
एक छोटे से शहर छिंदवाड़ा में जन्मी निर्मला ने पूरी दुनिया को एक नई राह दिखाई। उनका संदेश सरल था: सच्ची शांति अंदर से आती है और यह हर इंसान का हक है।
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आज शाम 5 बचे होगा कार्यक्रम
माताजी निर्मला देवी के बारे में जानें
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- माताजी निर्मला देवी का जन्म 1923 में छिंदवाड़ा में हुआ था।
- उन्होंने 1970 में सहज योग की स्थापना की थी।
- उन्होंने कभी भी आत्मसाक्षात्कार के लिए पैसे नहीं लिए।
- वे महात्मा गांधी से लेकर संयुक्त राष्ट्र तक जुड़ी रहीं।
- 23 फरवरी 2011 को इटली के जिनोआ में उनका निधन हुआ था।
छिंदवाड़ा की बेटी जो बनी दुनिया की 'माताजी'
उनके पिता प्रसाद साल्वे एक प्रतिभाशाली वकील थे। वे 14 भाषाएं जानते थे और उन्होंने कुरान का हिंदी में अनुवाद भी किया था। माता कोर्नेलिया साल्वे की अपनी अलग पहचान थी। वे भारत की पहली महिला थीं जिन्होंने गणित में ऑनर्स डिग्री हासिल की थी
सहज योग की शुरुआत कैसे हुई?
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सहज योग की बुनियाद में कुंडलिनी ऊर्जा की अवधारणा है। श्री माताजी का मानना था कि हर इंसान के भीतर यह सूक्ष्म ऊर्जा मौजूद है। इस ऊर्जा के जागरण से ही सच्चा आत्मसाक्षात्कार संभव है। उन्होंने इसे हर इंसान का जन्मसिद्ध अधिकार बताया। इसीलिए उन्होंने कभी भी इसके लिए कोई शुल्क नहीं लिया।
दुनिया भर में फैला सहज योग
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विरासत जो आज भी जीवित है
एक छोटे से शहर छिंदवाड़ा में जन्मी निर्मला ने पूरी दुनिया को एक नई राह दिखाई। उनका संदेश सरल था: सच्ची शांति अंदर से आती है और यह हर इंसान का हक है।
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