दुकान सीलिंग पर फूटा व्यापारियों का गुस्सा, भोपाल बंद और सीएम हाउस घराव की दी चेतावनी
Amresh Kushwaha | Aug 19, 2026, 11:15 IST
दुकान सीलिंग पर फूटा व्यापारियों का गुस्सा
भोपाल में रहवासी इलाकों में दुकानों पर नगर निगम की सीलिंग कार्रवाई से व्यापारी नाराज हैं। अब तक साढ़े सात हजार से ज्यादा नोटिस दिए जा चुके हैं। व्यापारियों ने भोपाल बंद और सीएम हाउस घेराव की चेतावनी दी है। मास्टर प्लान 2005 से पेंडिंग है।
समझें क्या है पूरा मामला...
- भोपाल में रहवासी इलाकोंमेंदुकानों पर सीलिंग की कार्रवाई शुरू हुईहै।
- नगर निगमअब तक साढ़े सात हजार से ज्यादा नोटिस देचुका है।
- गुस्साए व्यापारियों ने रोशनपुरा चौराहेपर बड़ाप्रदर्शन किया है।
- व्यापारियों ने भोपालबंद और सीएम हाउसघेराव की चेतावनी दी है।
- भोपाल में 2005से मास्टर प्लान लागू नहीं हो पाया है।
व्यापारियों ने रखे तीन विकल्प
अध्यक्ष आनंद सोनी ने कहा कि यदि सरकार ने इन पर अमल नहीं किया तो भोपाल को अनिश्चितकाल के लिए बंद कर दिया जाएगा। उन्होंने सड़कें जाम करने और सीएम हाउस के घेराव की भी चेतावनी दी। अध्यक्ष सोनी ने कहा कि व्यापारियों को चैन से सोने दिया जाए और उनके पेट पर लात न मारी जाए।
आनंद सोनी के मुताबिक यदि कार्रवाई जारी रही तो लाखों लोग बेरोजगार हो जाएंगे। उन्होंने बताया कि मास्टर प्लान साल 2005 से पेंडिंग पड़ा है। अगर यह समय पर आ जाता तो आज ऐसे हालात नहीं बनते। सोनी का दावा है कि भोपाल में अगर कार्रवाई जारी रही तो करीब 90 फीसदी कारोबार बंद हो जाएगा। इसका सीधा असर आम जनता की जिंदगी पर भी पड़ेगा।
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व्यापारियों की आपबीती
पहली बार सड़क पर उतरीं ब्यूटिशियन
कोर्ट का आदेश और वकील की राय
कुरैशी ने कहा कि मास्टर प्लान लाने की जिम्मेदारी राज्य सरकार की है। उनके मुताबिक चीफ सेक्रेटरी को हाईकोर्ट में मजबूती से पक्ष रखना चाहिए था। मुख्यमंत्री को भी सही समय पर सलाह दी जानी चाहिए थी। कुरैशी का मानना है कि अगर सरकार का पक्ष मजबूत होता तो यह नौबत नहीं आती। उन्होंने कहा कि सरकार चाहे तो मौजूदा गतिविधियों को नियमित कर सकती है। इसके लिए मास्टर प्लान या मिक्स लैंड यूज सिस्टम लागू करना होगा।
अब तक कितने नोटिस
उपायुक्त भुवन गुप्ता ने बताया कि इसके बाद अगला कदम उठाया जाएगा। हर मामले की गुण-दोष के आधार पर जांच होगी। इसके बाद अंतिम आदेश जारी किया जाएगा। संबंधित दुकानदारों को अंतिम सूचना पत्र भी भेजे जाएंगे। सुनवाई पूरी होने के बाद फाइनल ऑर्डर पास होगा। इसके बाद जरूरत पड़ने पर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई होगी।
निगम के मुताबिक शहर में 62 हजार से ज्यादा ऐसी प्रॉपर्टी चिन्हित हुई हैं। यहां रहवासी इलाके में कारोबार चल रहा है। पांच अगस्त से पहले तक सिर्फ 1018 नोटिस दिए गए थे। सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद निगम ने सर्वे का दायरा तेजी से बढ़ाया। पांच से 12 अगस्त के बीच 1163 नए नोटिस जारी हुए। 13 अगस्त को 1135 और 14 अगस्त को 1478 नोटिस और भेजे गए।
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किस इलाके में कितने नोटिस
अर्बन प्लानिंग विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर मास्टर प्लान आता तो यह स्थिति नहीं बनती। रहवासी और व्यावसायिक इलाके पहले से अलग चिन्हित हो जाते। अभी अवधपुरी, अयोध्या बायपास, गौतम नगर, अशोका गार्डन और लालघाटी जैसे इलाकों में दहशत है। यहां के कई दुकानदार अब कमर्शियल इलाकों में नई जगह तलाश रहे हैं।
निगम अब मुख्य मार्गों के साथ गलियों में भी सर्वे कर रहा है। नदी-तालाब किनारे, ग्रीन बेल्ट और बफर जोन के भवन प्राथमिकता से जांचे जा रहे हैं। अवैध मैरिज गार्डन को भी नोटिस भेजे जाएंगे।
मास्टर प्लान की अटकी कहानी
नर्मदापुरम रोड, भोजपुर रोड, कोलार, नीलबड़-रातीबड़ और रायसेन रोड तक बसाहट बढ़ती गई। कई जगह पहले कॉलोनियां बस गईं। बाद में सड़क, पानी और सीवर जैसी सुविधाएं पहुंचाई गईं। यही अनियोजित विस्तार अब तीसरे भोपाल के रूप में सामने खड़ा है।
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देश के दूसरे शहरों से तुलना
भोपाल के इंफ्रास्ट्रक्चर एक्सपर्ट सुयश कुलश्रेष्ठ के मुताबिक मध्य प्रदेश के सभी बड़े शहरों में मास्टर प्लान लागू है। हर शहर की समयावधि अलग-अलग है। लेकिन भोपाल में 2005 के बाद से कोई नया प्लान लागू नहीं हुआ। यही वजह है कि शहर अब भी 21 साल पुराने प्लान के हिसाब से चल रहा है।
कुलश्रेष्ठ बताते हैं कि न्यू मार्केट और पुराने शहर जैसे कुछ इलाकों में मिक्स लैंड यूज सिस्टम पहले से लागू है। लेकिन 10 नंबर मार्केट और रोहित नगर की मुख्य सड़क जैसे इलाकों में यह लागू नहीं है। उनके मुताबिक अगर मास्टर प्लान समय पर आता तो ये इलाके भी मिक्स लैंड यूज के दायरे में आ जाते। पड़ोसी राज्य गुजरात में भी मिक्स लैंड यूज सिस्टम लागू है, लेकिन वहां का मॉडल अलग है। वहां सरकार ने घर के कंपाउंडिंग के जरिए दुकान खोलने की अनुमति दे रखी है। कुलश्रेष्ठ के मुताबिक बाकी राज्यों में भी मास्टर प्लान और मिक्स लैंड यूज जैसा सिस्टम पहले से लागू है।
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यह खबर क्यों जरूरी है
FAQ
- भोपाल में दुकानों की सीलिंग की कार्रवाई क्यों हो रही है?
सुप्रीम कोर्ट ने रहवासी इलाकों में कमर्शियल गतिविधि को लेकर सख्त आदेश दिए हैं। इसके बाद भोपाल नगर निगम ने रहवासी इलाकों में चल रही दुकानों, ब्यूटी पार्लर और अन्य कारोबार पर नोटिस भेजना शुरू कर दिया। अब तक साढ़े 7 हजार से ज्यादा नोटिस जारी हो चुके हैं और आगे सीलिंग की कार्रवाई भी होगी।
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