सुमित्रा महाजन के बेटे मिलिंद महाजन के शोरूम विवाद में सीपी संतोष सिंह, डीसीपी मीणा, एसीपी पटेल को राहत
Sanjay Gupta | Sootr Creatives | Oct 12, 2026, 20:03 IST
सुमित्रा महाजन के बेटे मिलिंद महाजन के शोरूम विवाद में सीपी संतोष सिंह सहित अधिकारियों को राहत
पूर्व स्पीकर सुमित्रा महाजन के बेटे मिलिंद महाजन के शोरूम पर दो साल पहले हुए हमले के मामले में जिला कोर्ट का बड़ा फैसला हुआ है। इस मामले में सीपी संतोष सिंह, तत्कालीन डीसीपी, एसीपी, टीआई सहित सभी को राहत मिल गई है। करोसिया ने पुलिस अधिकारियों के खिलाफ परिवाद दायर किया था।
पूर्व स्पीकर सुमित्रा महाजन के बेटे मिलिंद महाजन के ऑटो शोरूम व सर्विस सेंटर मिडवेस्ट ऑटोमोबाइल प्रा. लि. विवाद में पुलिस अधिकारियों को राहत मिल गई है। इस शोरूम पर हमला और तोड़फोड़ करने पर 6 दिसंबर 2024 को सफाई कर्मचारी आयोग के अध्यक्ष प्रताप करोसिया के रिश्तेदार सौरभ करोसिया व अन्य पर एफआईआर हुई थी। बाद में मामला तूल पकड़ा, तब आरोपियों पर कठोर धाराएं लगीं। इनका जुलूस निकाला गया। इसके बाद करोसिया ने इसमें पुलिस अधिकारियों के खिलाफ परिवाद दायर किया था।
करोसिया ने इसमें इंदौर सीपी संतोष सिंह, तत्कालीन डीसीपी विनोद मीणा, एसीपी आशीष पटेल, टीआई आजादनगर नीरज मेढ़ा, पुलिस कर्मचारी जावेद खान, कृष्णा पटेल, प्रदीप पटेल, शोरूम मैनेजर भूषण, सुमित्रा महाजन के पोते सिद्धार्थ महाजन इन सभी पर परिवाद लगाया था। जिला कोर्ट में लगाए गए परिवाद में इन सभी पर एससी-एसटी एक्ट के तहत केस करने की मांग की गई थी।
करोसिया ने इस परिवाद में आरोप लगाया था कि शोरूम पर बेवजह टैंकर सर्विसिंग के लिए राशि मांगी गई, जबकि वह गारंटी पीरियड में था। वहां घेरकर बंधक बनाया गया। बाद में हम पर ही आजादनगर में केस कर दिया। साथ ही 9 दिसंबर 2024 को 300 सवर्ण जाति के लोग सीपी सिंह से मिले और हमारा जुलूस निकालने, कड़ी सजा दिलाने, धाराएं बढ़ाने की मांग की गई।
इसके बाद धाराएं बढ़ाई गईं। फिर गिरफ्तार कर सीपी सिंह और डीसीपी मीणा के आदेश पर हथकड़ी में शोरूम ले गए और वहां कमोड से मूत्र का पानी पीने के लिए मजबूर किया। जातिसूचक शब्द कहे और गंदी गालियां दीं।
वहीं स्पेशल एससी-एसटी कोर्ट में इस मामले में सुनवाई चली, जिसमें दो सुनवाई से खुद करोसिया नहीं पहुंचे। लेकिन कोर्ट ने करोसिया द्वारा दिए गए बयान और पुलिस प्रतिवेदन व अन्य मेरिट के आधार पर इसमें फैसला किया। कोर्ट ने पाया कि करोसिया के कथन और परिवाद में अंतर है। कथन में कमोड में मूत्र पिलाने वाली बात, जातिसूचक शब्दों वाली बात और बंधक बनाने वाली बातें नहीं हैं।
साथ ही यह भी कोर्ट ने पाया कि कार्रवाई करने वाले पुलिसकर्मी भी खुद एससी-एसटी वर्ग से आते हैं। वहीं हथकड़ी पहनाने की बात पर कोर्ट ने पाया कि करोसिया पर कई थानों में केस दर्ज हैं और वह आदतन अपराधी है। ऐसे मामले में पुलिस हथकड़ी पहना सकती है। इसमें गलत नहीं है। इन सभी तथ्यों के आधार पर कोर्ट ने करोसिया द्वारा पेश परिवाद को खारिज कर दिया।
परिवाद में सीपी, डीसीपी, एसीपी, टीआई ये सभी
ये आरोप लगाए थे करोसिया ने
इसके बाद धाराएं बढ़ाई गईं। फिर गिरफ्तार कर सीपी सिंह और डीसीपी मीणा के आदेश पर हथकड़ी में शोरूम ले गए और वहां कमोड से मूत्र का पानी पीने के लिए मजबूर किया। जातिसूचक शब्द कहे और गंदी गालियां दीं।
लेकिन जिला कोर्ट में यह सामने आया
साथ ही यह भी कोर्ट ने पाया कि कार्रवाई करने वाले पुलिसकर्मी भी खुद एससी-एसटी वर्ग से आते हैं। वहीं हथकड़ी पहनाने की बात पर कोर्ट ने पाया कि करोसिया पर कई थानों में केस दर्ज हैं और वह आदतन अपराधी है। ऐसे मामले में पुलिस हथकड़ी पहना सकती है। इसमें गलत नहीं है। इन सभी तथ्यों के आधार पर कोर्ट ने करोसिया द्वारा पेश परिवाद को खारिज कर दिया।
- सुमित्रा महाजन के बेटे मिलिंद महाजन के ऑटो शोरूम विवाद में क्या हुआ?
इस विवाद में मिलिंद महाजन के ऑटो शोरूम पर 6 दिसंबर 2024 को हमला हुआ था, जिसके बाद सफाई कर्मचारी आयोग के अध्यक्ष प्रताप करोसिया के रिश्तेदार सौरभ करोसिया समेत अन्य पर एफआईआर दर्ज की गई थी। - करोसिया ने पुलिस अधिकारियों के खिलाफ क्या आरोप लगाए थे?
करोसिया ने पुलिस अधिकारियों पर बेवजह राशि मांगने, बंधक बनाने, जातिसूचक शब्दों का प्रयोग करने, और उनके साथ गाली-गलौज करने के आरोप लगाए थे। - जिला कोर्ट ने करोसिया के आरोपों पर क्या फैसला सुनाया?
जिला कोर्ट ने करोसिया के आरोपों को खारिज करते हुए पाया कि करोसिया के बयानों में अंतर है और वह आदतन अपराधी हैं, इसलिए पुलिस की कार्रवाई सही थी।
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