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BHOPAL: आखिरकार लंबी जद्दोजहद, अंदरूनी खींचतान और कई दौर की बातचीत के बाद रविवार को भोपाल भाजपा की 25 सदस्यीय जिला कार्यकारिणी घोषित कर दी गई।
विधायकों से मांगे गए 3–3 नामों में से 2–2 पर सहमति बनने के बाद सूची जारी हुई। सूत्रों के मुताबिक, एक दिन पहले मुख्यमंत्री ने पूरी सूची तलब की थी। उसके बाद ही नामों पर अंतिम सहमति बनी और औपचारिक घोषणा की गई।
राजधानी का मामला होने से यह सूची सामान्य संगठनात्मक प्रक्रिया नहीं रही। पिछली बार 15 मिनट में रद्द हुई सूची की फजीहत से सबक लेते हुए इस बार हर नाम पर गहन मंथन किया गया।
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3–3 नामों से शुरू हुआ समीकरण, 2–2 पर बनी बात...
संगठन ने जिले के सभी विधायकों से 3–3 नामों का पैनल मांगा था। इसके बाद कई दौर की चर्चा, आपत्तियां और संतुलन बैठाने की कवायद चली। आखिरकार हर पैनल में से 2–2 नामों पर सहमति बनी। बिना सहमति कोई नाम आगे नहीं बढ़ाया गया। यही वजह रही कि घोषणा में अपेक्षा से ज्यादा समय लगा।
CM की बैठक के बाद आया निर्णायक मोड़
सूत्रों के अनुसार, सूची को लेकर शीर्ष स्तर पर भी चर्चा हुई। बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री ने सूची तलब कर नामों की जानकारी ली। इसके बाद अंतिम रूप दिया गया। हालांकि आधिकारिक तौर पर संगठन इसे अपनी आंतरिक प्रक्रिया बता रहा है, लेकिन राजधानी भोपाल की संवेदनशीलता को देखते हुए उच्च स्तर की सहमति अहम मानी जा रही है।
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15 मिनट में रद्द हुई थी पहली सूची
भोपाल भाजपा इससे पहले भी कार्यकारिणी घोषित कर चुकी थी। लेकिन वह सूची महज 15 मिनट के भीतर रद्द करनी पड़ी थी। उस समय आरोप लगे थे कि विधायकों से पूरी रायशुमारी नहीं की गई। कुछ विधानसभा क्षेत्रों को अधिक प्रतिनिधित्व मिला। संगठन की गाइडलाइन का पालन नहीं हुआ। सामाजिक संतुलन गड़बड़ा गया। इस घटनाक्रम से संगठन की किरकिरी हुई और जिलाध्यक्ष रविंद्र यति की कार्यशैली पर भी सवाल उठे।
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क्या जल्दबाजी बनी थी विवाद की वजह?
पिछली सूची को लेकर जिलाध्यक्ष रविंद्र यति पर आरोप लगे कि उन्होंने जल्दबाजी में घोषणा कर दी। चुनिंदा विधायकों को साधने और कुछ नामों को प्राथमिकता देने की चर्चा भी चली। योग्यता और संगठनात्मक संतुलन को नजरअंदाज करने के आरोप लगे। हालांकि उस समय उन्होंने इसे तकनीकी कारण बताया था, लेकिन विवाद शांत नहीं हुआ था।
इस बार देरी क्यों हुई?
- विधानसभा सत्र की व्यस्तता।
- विधायकों के बीच अंदरूनी खींचतान।
- पुराने और नए कार्यकर्ताओं के बीच संतुलन।
- पिछली फजीहत से बचने की रणनीति।
- शीर्ष नेतृत्व स्तर पर अंतिम सहमति।
स्पष्ट है कि इस बार “पहले सहमति, फिर घोषणा” का रास्ता अपनाया गया।
नई 25 सदस्यीय टीम में क्या संदेश?
हर विधानसभा को प्रतिनिधित्व मिला है। एक पद पर एक व्यक्ति की गाइडलाइन लागू की गई है। अनुभव और सक्रिय कार्यकर्ताओं को प्राथमिकता दी गई है। विवादित नामों से दूरी रखी गई है। हालांकि राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि खींचतान पूरी तरह खत्म नहीं हुई है।
जिला प्रभारी हाड़ा का बड़ा बयान
भाजपा के भोपाल जिला प्रभारी जसवंत सिंह हाड़ा ने कहा कि घोषित सूची पूरी तरह संगठनात्मक प्रक्रिया के तहत तैयार की गई है। उन्होंने कहा, भोपाल जिला कार्यकारिणी की जो सूची घोषित की गई है, उसमें योग्यता का पूरा ध्यान रखा गया है। संगठन ने आपसी सहमति से मंथन-चिंतन कर नियमों के अनुरूप ही सूची की घोषणा की है। जिला प्रभारी के मुताबिक, हर नाम पर विस्तार से विचार किया गया और संगठन की गाइडलाइन का पालन सुनिश्चित किया गया।
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आगे क्या?
रविवार को 25 नामों की घोषणा के साथ एक चरण जरूर पूरा हुआ है, लेकिन सवाल अब भी बाकी हैं। क्या यह सूची पूरी तरह सर्वसम्मति से बनी है? क्या CM की भूमिका केवल औपचारिक थी या निर्णायक? क्या पिछली 15 मिनट वाली गलती से वास्तव में सबक लिया गया है? फिलहाल इतना तय है कि भोपाल भाजपा की यह कार्यकारिणी सिर्फ संगठनात्मक सूची नहीं, बल्कि सियासी संतुलन का परिणाम है। राजधानी की राजनीति में इसकी गूंज आगे भी सुनाई देगी।
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