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Photograph: (the sootr)
NEWS IN SHORT
- कैलाश विजयवर्गीय ने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि उन्हें राम के नाम से समस्या है और गांधी परिवार राजनीति करता है।
- मंत्री विजयवर्गीय ने गांधी परिवार की योजनाओं को नाम के आधार पर बताया और कहा कि यह विकास के लिए नहीं हैं।
- उन्होंने VB-G RAM G योजना के विजन 2047 तहत होने की बात कही, जो रोजगार और आजीविका को जोड़ती है।
- मनरेगा योजना में सुधार की जानकारी दी, जिसमें मजदूरों के जॉब कार्ड को तीन साल में रिन्यू करना होगा।
- मंत्री विजयवर्गीय ने कांग्रेस के विरोध को नकारते हुए इसे देश के विकास के रास्ते में एक और रुकावट बताया।
NEWS IN DETAIL
INDORE. विकसित भारत-रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) यानी (VB-G RAM G) योजना पर कांग्रेस के विरोध को देखते हुए बीजेपी भी मैदान में उतर गई है। गुरुवार को इंदौर में मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने इसे लेकर प्रेस कांफ्रेंस की और कहा कि कांग्रेस गांधी परिवार से आगे नहीं सोच पाती है, पता नहीं उन्हें राम के नाम से क्या समस्या है।
इधर लोकसभा प्रतिपक्ष नेता राहुल गांधी 17 जनवरी को इंदौर आ रहे हैं। इस दौरान मनरेगा को लेकर भी कांग्रेसी उपवास रखने और दिन भर विरोध करने की बात कह रही है। मनरेगा को लेकर राहुल गांधी और कांग्रेसी 17 जनवरी को उपवास भी रखेंगे। इस पर मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने तंज कसा कि एक दिन देश का अन्न भी बचेगा।
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गांधी परिवार के नाम पर 600 योजनाएं
मंत्री विजयवर्गीय ने कहा कि गांधी परिवार के नाम पर 600 योजनाएं हैं, कई पुरस्कार है। जैसे राजीव गांधी खेल पुरस्कार, उनका खेल से कभी कोई लेना-देना नहीं रहा है। इंदिरा जी के समय पहले राष्ट्रीय रोजगार गारंटी आई, फिर नाम नेहरू रोजगार हो गया फिर नरेगा और इसके बाद इसका नाम मनरेगा कर दिया। यह समय के साथ होता है। नई योजना में समय काल के अनुसार अहम बदलाव किया गया है।
फसल कटने, बोउनी के समय मजदूर नहीं मिलते हैं। ऐसे में कलेक्टर को अधिकार दिए हैं कि राज्य सरकार किसी समय विशेष पर योजना को रोका जा सकता है ताकि मजदूर मिले। यह देश के हिसाब से कल्पना की गई है। वहीं प्रेस कांफ्रेंस में मंत्री विजयवर्गीय ने जीरामजी योजना के अलावा अन्य राजनीतिक सवालों पर बात नहीं की।
विजन 2047 के तहत बनाई योजना
मंत्री विजयवर्गीय ने कहा कि यह योजना विजन 2047 के तहत बनी है। इसमें एक शब्द रोजगार के साथ ही आजीविका शब्द जुड़ा है। इसमें व्यक्ति इसके लिए भी काम कर सकता है। मनरेगा पर अभी तक 11.74 लाख करोड़ खर्च किए हैं। सबसे ज्यादा खर्चा मोदी सरकार ने ही 8.53 करोड़ खर्च किया है। जबकि दस साल यूपीए की सरकार भी थी वह नहीं कर सकी। इसकी रिव्यू मीटिंग के बाद इसमें जो कमियां थी वह देखा गया और बदलाव किया गया है।
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मनरेगा में हुआ सरकारी धन का दुरूपयोग
मनरेगा में इतने घपले थे कि गड्ढा खोदा और भरने को काम बताकर किया गया है। इसलिए संशोधन किए गए हैं जैसे मशीन से काम नहीं हो, मजदूर को तीन साल में जाब कार्ड रिन्यू कराना होगा। सरकारी धन के दुरुपयोग रोकने के लिए यह बल लगाया गया है सौ से बढ़ाकर सवा सौ दिन कर दिए। कांफ्रेंस के दौरान नगराध्यक्ष सुमित मिश्रा, विधायकगण उपस्थित थे।
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