ग्वालियर में बॉम्बे ब्लड ग्रुप की प्रसूता को मिली नई जिंदगी: देशभर से मंगाया गया दुर्लभ खून

Pawan Modiya | Mar 08, 2026, 24:24 IST
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Photograph: (the sootr)

ग्वालियर में बॉम्बे ब्लड ग्रुप की प्रसूता के लिए देशभर में खोज शुरू हुई। विशाखापत्तनम और लखनऊ से दुर्लभ रक्त मंगाकर डॉक्टरों ने बचाई महिला की जान।

मध्य प्रदेश के ग्वालियर में एक अनोखा और मानवीय संवेदनाओं से जुड़ा मामला सामने आया है, जिसने स्वास्थ्य सेवाओं की तत्परता और मानवीय सहयोग की मिसाल पेश की है। बॉम्बे ब्लड ग्रुप (Bombay Blood Group) जैसे दुनिया के सबसे दुर्लभ रक्त समूह वाली एक प्रसूता के लिए देशभर में रक्त की तलाश शुरू हुई। आखिरकार विशाखापत्तनम और लखनऊ से दुर्लभ रक्त मंगाकर डॉक्टरों ने महिला की जान बचाई।

यह मामला जयारोग्य चिकित्सालय समूह (JAH Hospital Gwalior) के ब्लड बैंक से जुड़ा है, जहां छतरपुर की रहने वाली मालती पाल को गंभीर स्थिति में भर्ती कराया गया था। प्रसव के बाद आई जटिलताओं के कारण उन्हें तत्काल रक्त चढ़ाने की जरूरत पड़ी, लेकिन जांच में पता चला कि उनका ब्लड ग्रुप बेहद दुर्लभ है।

प्रसूता की हालत गंभीर होने पर सामने आया दुर्लभ ब्लड ग्रुप

छतरपुर निवासी मालती पाल को प्रसव के बाद स्वास्थ्य संबंधी गंभीर जटिलताओं का सामना करना पड़ा। स्थानीय अस्पताल में स्थिति बिगड़ने के बाद उन्हें तुरंत ग्वालियर के जयारोग्य चिकित्सालय (JAH Hospital Gwalior) में रेफर किया गया।

यहां जनरल मेडिसिन विभाग में इलाज के दौरान जब डॉक्टरों ने ब्लड ट्रांसफ्यूजन (Blood Transfusion) की जरूरत बताई, तो ब्लड बैंक में उनकी रक्त जांच की गई। जांच में पता चला कि उनका ब्लड ग्रुप सामान्य नहीं बल्कि दुर्लभ बॉम्बे ब्लड ग्रुप है। यह जानकारी मिलते ही अस्पताल प्रशासन और ब्लड बैंक की टीम के सामने बड़ी चुनौती खड़ी हो गई, क्योंकि इस प्रकार का रक्त आसानी से उपलब्ध नहीं होता।

देशभर में शुरू हुई दुर्लभ रक्त की तलाश

जैसे ही यह पता चला कि मरीज को बॉम्बे ब्लड ग्रुप (Bombay Blood Group) का रक्त चाहिए, अस्पताल प्रशासन ने देशभर के ब्लड बैंक नेटवर्क से संपर्क करना शुरू किया।

ब्लड बैंक की टीम ने कई राज्यों में मौजूद रेयर ब्लड डोनर नेटवर्क (Rare Blood Donor Network) और मेडिकल संस्थानों से मदद मांगी। इसके बाद विशाखापत्तनम और लखनऊ में ऐसे रक्तदाता मिलने की जानकारी मिली। तत्काल समन्वय स्थापित कर वहां से रक्त यूनिट्स मंगाई गईं और विशेष प्रबंधन के साथ ग्वालियर पहुंचाई गईं।

विशाखापत्तनम और लखनऊ से पहुंची जीवनदायी मदद

विशेष मेडिकल प्रोटोकॉल के तहत विशाखापत्तनम और लखनऊ से बॉम्बे ब्लड ग्रुप की यूनिट्स ग्वालियर भेजी गईं। यह प्रक्रिया बेहद संवेदनशील होती है क्योंकि दुर्लभ रक्त को सुरक्षित तरीके से ट्रांसपोर्ट करना पड़ता है।

जब रक्त की यूनिट्स ग्वालियर पहुंचीं तो डॉक्टरों ने तुरंत मरीज को ब्लड ट्रांसफ्यूजन दिया। उपचार के बाद महिला की स्थिति में सुधार देखा गया और उसकी जान बचाई जा सकी। यह पूरी प्रक्रिया चिकित्सा टीम, ब्लड बैंक स्टाफ और देशभर के डोनर नेटवर्क के समन्वय का बेहतरीन उदाहरण बन गई।

ब्लड बैंक की तत्परता बनी जीवनरक्षक

जयारोग्य चिकित्सालय के ब्लड बैंक ने इस पूरे मामले में तेजी और संवेदनशीलता के साथ काम किया। डॉक्टरों और तकनीकी विशेषज्ञों की टीम ने लगातार संपर्क बनाए रखा और समय पर रक्त उपलब्ध कराने में सफल रहे। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि यदि समय पर यह रक्त उपलब्ध नहीं होता तो मरीज की जान को गंभीर खतरा हो सकता था।

क्या है बॉम्बे ब्लड ग्रुप (Bombay Blood Group)?

बॉम्बे ब्लड ग्रुप (Bombay Blood Group) दुनिया के सबसे दुर्लभ रक्त समूहों में से एक माना जाता है। यह सामान्य ब्लड ग्रुप सिस्टम जैसे A, B, AB या O से अलग होता है। इस रक्त समूह में H एंटीजन (H Antigen) की कमी होती है, जिसके कारण इसे साधारण O ब्लड ग्रुप से भी अलग माना जाता है। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार यह ब्लड ग्रुप लगभग 10,000 से 1,000,000 लोगों में से केवल एक व्यक्ति में पाया जाता है। भारत में इसकी पहचान सबसे पहले मुंबई (तत्कालीन बॉम्बे) में हुई थी, इसलिए इसे बॉम्बे ब्लड ग्रुप कहा जाता है।

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