घर बदला तो नहीं भरना होगा फॉर्म-6, SIR को लेकर मतदाताओं के हक में बॉम्बे हाईकोर्ट का बड़ा फैसला
Amresh Kushwaha | Nov 06, 2026, 16:03 IST
मतदाता सूची के SIR को लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट ने मतदाताओं के अधिकारों पर अहम टिप्पणी की।
बॉम्बे हाईकोर्ट ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति पहले से मतदाता है और केवल अपना घर या पता बदलता है, तो उसे फॉर्म-8 भरना होगा। ऐसे व्यक्ति को फॉर्म-6 या पुराने पते वाला SIR गणना फॉर्म भरने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता।
बॉम्बे हाईकोर्ट की गोवा पीठ ने कहा कि ऐसा करने से मतदाता को गलत जानकारी देने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है। गलत घोषणा करने पर उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी हो सकती है।
जस्टिस वाल्मीकि मेनेजेस और जस्टिस अमित जामसंदेकर की खंडपीठ ने दोनों फॉर्म के बीच अंतर समझाया। कोर्ट ने बताया कि फॉर्म-6 नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए है। इसमें व्यक्ति को घोषणा करनी होती है कि उसका नाम पहले से किसी मतदाता सूची में दर्ज नहीं है और वह पहली बार अपना नाम जुड़वा रहा है।
वहीं, फॉर्म-8 उन लोगों के लिए है, जिनका नाम पहले से मतदाता सूची में है और वे अपना पता बदलना चाहते हैं। कोर्ट ने कहा कि SIR के तहत दिए जाने वाले पहले से भरे गणना फॉर्म में मतदाता को यह पुष्टि करनी होती है कि वह उसी पते पर रह रहा है, जो फॉर्म में लिखा है।
यह मामला गोवा के सांताक्रूज विधानसभा क्षेत्र के सालगांवकर परिवार से जुड़ा है। परिवार के छह सदस्यों के नाम हाल ही में पूरी हुई SIR प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची से हटा दिए गए थे।
परिवार के सदस्य उसी विधानसभा क्षेत्र में एक जगह से दूसरी जगह रहने चले गए थे। उन्होंने नए पते की जानकारी देने के लिए फॉर्म-8 जमा किया, लेकिन चुनाव अधिकारियों ने इसे स्वीकार नहीं किया।
अधिकारियों का कहना था कि फॉर्म-8 के साथ गणना फॉर्म भी जमा करना जरूरी है। उन्होंने परिवार को फॉर्म-6 भरने के लिए कहा। इसके बाद परिवार ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की।
मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा कि जो व्यक्ति अपना पुराना घर छोड़ चुका है, उससे पुराने पते वाले गणना फॉर्म पर हस्ताक्षर नहीं कराए जा सकते। यदि वह ऐसा करता है, तो उसे गलत घोषणा करनी पड़ेगी कि वह अब भी पुराने पते पर रहता है।
इसी तरह, पहले से पंजीकृत मतदाता अगर फॉर्म-6 भरता है, तो उसे गलत जानकारी देनी होगी कि उसका नाम पहले किसी मतदाता सूची में नहीं था। कोर्ट ने चुनाव अधिकारियों के इस रवैये को पूरी तरह अनुचित बताया।
हाईकोर्ट ने कहा कि गलत घोषणा करने वाले मतदाता के खिलाफ जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 31 के तहत मुकदमा चलाया जा सकता है। अदालत ने यह भी पाया कि नए पते पर रहने वाले मतदाताओं को बिना पहले से भरे विवरण वाला गणना फॉर्म उपलब्ध कराने की कोई व्यवस्था नहीं थी।
ऐसी स्थिति में परिवार के सदस्यों के पास फॉर्म-8 भरने का ही विकल्प था और उन्होंने उसी प्रक्रिया का पालन किया था।
हाईकोर्ट ने चुनाव आयोग को निर्देश दिया कि सालगांवकर परिवार के सभी छह सदस्यों के नाम मतदाता सूची में दोबारा शामिल किए जाएं। अदालत ने अपने Court Order में स्पष्ट किया कि पहले से पंजीकृत मतदाता का पता बदलना और नए व्यक्ति का मतदाता के रूप में पंजीकरण होना दो अलग प्रक्रियाएं हैं। इन्हें एक जैसा नहीं माना जा सकता।
इस फैसले से साफ है कि घर बदलने वाले मौजूदा मतदाताओं के लिए Form-8 ही निर्धारित फॉर्म है। उन्हें नए मतदाता की तरह फॉर्म-6 भरने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता।
फॉर्म-6 और फॉर्म-8 में क्या अंतर है?
वहीं, फॉर्म-8 उन लोगों के लिए है, जिनका नाम पहले से मतदाता सूची में है और वे अपना पता बदलना चाहते हैं। कोर्ट ने कहा कि SIR के तहत दिए जाने वाले पहले से भरे गणना फॉर्म में मतदाता को यह पुष्टि करनी होती है कि वह उसी पते पर रह रहा है, जो फॉर्म में लिखा है।
गोवा के एक परिवार से जुड़ा है मामला
परिवार के सदस्य उसी विधानसभा क्षेत्र में एक जगह से दूसरी जगह रहने चले गए थे। उन्होंने नए पते की जानकारी देने के लिए फॉर्म-8 जमा किया, लेकिन चुनाव अधिकारियों ने इसे स्वीकार नहीं किया।
अधिकारियों का कहना था कि फॉर्म-8 के साथ गणना फॉर्म भी जमा करना जरूरी है। उन्होंने परिवार को फॉर्म-6 भरने के लिए कहा। इसके बाद परिवार ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की।
गलत घोषणा करने के लिए मजबूर नहीं कर सकते
इसी तरह, पहले से पंजीकृत मतदाता अगर फॉर्म-6 भरता है, तो उसे गलत जानकारी देनी होगी कि उसका नाम पहले किसी मतदाता सूची में नहीं था। कोर्ट ने चुनाव अधिकारियों के इस रवैये को पूरी तरह अनुचित बताया।
गलत जानकारी देने पर हो सकती है कानूनी कार्रवाई
ऐसी स्थिति में परिवार के सदस्यों के पास फॉर्म-8 भरने का ही विकल्प था और उन्होंने उसी प्रक्रिया का पालन किया था।
हाईकोर्ट ने नाम बहाल करने का दिया आदेश
इस फैसले से साफ है कि घर बदलने वाले मौजूदा मतदाताओं के लिए Form-8 ही निर्धारित फॉर्म है। उन्हें नए मतदाता की तरह फॉर्म-6 भरने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता।
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