छोटे शहरों में बढ़ा ब्रांडेड शॉपिंग का क्रेज, कंपनियां भी इन्हें बना रही अपनी पसंद
Amresh Kushwaha | Sept 13, 2026, 09:48 IST
भारत के छोटे शहरों में बढ़ा ब्रांडेड शॉपिंग का क्रेज
भारत के छोटे शहरों में ब्रांडेड खरीदारी का क्रेज तेजी से बढ़ा है। कंज्यूमर लोन और D2C ऑर्डर्स में टियर-2 व टियर-3 शहरों की हिस्सेदारी 60% के पार पहुंच चुकी है।
समझें क्या है पूरा मामला...
- इस फेस्टिव सीजन में बड़े ब्रांड्स की नजर अब छोटे शहरों पर ज्यादा है।
- टीवी, फ्रिज, मोबाइल के आधे कंज्यूमर लोन अब टॉप-100 शहरों के बाहर मिल रहे हैं।
- डायरेक्ट टू कंज्यूमर ब्रांड्स को तीन में से दो नए ऑर्डर छोटे शहरों से मिल रहे हैं।
- ऑनलाइन बाजार में भी टियर-2, टियर-3 शहरों की हिस्सेदारी तेजी से बढ़ रही है।
- कंपनियां अब स्टॉक, स्टोर और मार्केटिंग की रणनीति स्थानीय मांग के हिसाब से बदल रही हैं।
छोटे शहरों में बढ़ी खरीदारी
डी2सी (D2C) यानी सीधे ग्राहक को सामान बेचने वाले ब्रांड्स की स्थिति भी कुछ ऐसी ही है। इन ब्रांड्स को मिलने वाले हर तीन नए ऑर्डर में से दो टियर-2 और टियर-3 शहरों से आ रहे हैं। इस बदलाव ने कंपनियों को अपनी रणनीति बदलने पर मजबूर किया है। अब कंपनियां स्थानीय मांग के हिसाब से स्टॉक तय कर रही हैं। क्षेत्रीय भाषाओं में प्रचार भी बढ़ाया जा रहा है। छोटे शहरों में नए स्टोर और डिलीवरी नेटवर्क पर भी जोर दिया जा रहा है।
टॉप-100 शहरों के बाहर बढ़ा लोन
वहीं टॉप 51 से 100 शहरों की तस्वीर थोड़ी अलग है। यहां लोन की हिस्सेदारी लगभग स्थिर रही है। 2025 में लोन राशि की हिस्सेदारी 12.9 प्रतिशत थी, जो 2027 में मामूली गिरावट के साथ 12.8 प्रतिशत रही। लोन की संख्या की हिस्सेदारी भी 12.3 प्रतिशत से घटकर 11.9 प्रतिशत रह गई। हालांकि औसत लोन राशि जरूर बढ़ी है। यह 21 हजार 295 रुपए से बढ़कर 23 हजार 929 रुपए हो गई। यानी इन शहरों में लोगों ने महंगे उत्पाद खरीदना शुरू किया है।
ऑटो और पर्सनल लोन में भी उछाल
ऑनलाइन बाजार में भी छोटे शहर आगे
देशभर में डायरेक्ट टू कंज्यूमर ऑर्डर सालाना आधार पर 33 प्रतिशत बढ़े। इनकी बिक्री मूल्य में हिस्सेदारी 60 प्रतिशत तक पहुंच गई। खास बात यह है कि यह बढ़त सिर्फ महंगे ऑर्डर की वजह से नहीं है। बिक्री की मात्रा में भी छोटे शहरों की हिस्सेदारी 72 प्रतिशत रही, जो इस बदलाव को और मजबूत करती है।
मौजूदा फेस्टिव सीजन में भी यही रुझान साफ दिख रहा है। मीशो (Meesho) के मुताबिक रक्षाबंधन पर उसके 73 प्रतिशत ऑर्डर गैर-महानगरीय बाजारों से आए। इस दौरान कुल ऑर्डर सालाना 36 प्रतिशत और बिक्री मूल्य 38 प्रतिशत बढ़ा।
फ्लिपकार्ट (Flipkart) की रिपोर्ट के मुताबिक अगस्त 2025 में प्री-नवरात्र डायरेक्ट टू कंज्यूमर ऑर्डर सालाना आधार पर 16 प्रतिशत बढ़े थे। कंपनियों को उम्मीद है कि 2026 में दिवाली के आसपास बिक्री में 35 से 40 प्रतिशत तक अतिरिक्त बढ़त देखने को मिल सकती है।
ब्रांड्स बदल रहे रणनीति
मेटा (Meta) के एक अध्ययन में भी यह बदलाव साफ दिखता है। टियर-2 और टियर-3 शहरों के 63 प्रतिशत फेस्टिव खरीदार स्थानीय ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर खरीदारी करना पसंद करते हैं। इसके बावजूद दुकान से खरीदारी की पसंद भी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। यही वजह है कि ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों बाजारों में कंपनियां अपनी पकड़ मजबूत करना चाहती हैं। कुल मिलाकर, यह पूरा डेटा बताता है कि आने वाले सालों में छोटे शहर ही देश के फेस्टिव बाजार की दिशा तय करेंगे।
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