मध्यावधि 2026 : चंबल संभाग के 13 विधायकों में किसे मिला जनता का भरोसा?

The Sootr | Jun 15, 2026, 14:29 IST
Share
चंबल संभाग
चंबल संभाग

चंबल संभाग: 13 जून 2026 को मध्यप्रदेश की मोहन यादव सरकार का आधा सफर पूरा हो गया। ढाई साल बीत गए। अब उल्टी गिनती शुरू है। और ठीक इसी दौरान thesootr लेकर आया है मध्यप्रदेश के इतिहास का सबसे बड़ा और विश्वसनीय सर्वे…

मध्यप्रदेश की हर विधानसभा से डेटा लेकर तैयार किए गए इस सर्वे में जानिए... चंबल संभाग के लोगों के मन की बात… और हां! ये सर्वे किसी तरह की घोषणा नहीं करता सिर्फ प्राप्त आंकड़ों से परसेप्शन बताता है।

हमने पूछे सिर्फ तीन सवाल

  1. क्या आप अपने विधायक से संतुष्ट हैं?
  2. BJP और डॉ. मोहन यादव की सरकार से संतुष्ट हैं या नहीं?
  3. क्या कांग्रेस प्रदेश में active दिखती है?

तो पहली बार हर नागरिक जान सकेगा

  • उसके अपने जिले का मूड क्या है
  • उसके विधायक को जनता पास करती है या फेल
  • मोहन यादव सरकार के बारे में उसके इलाके की राय क्या है
  • कांग्रेस जनता को active दिखती है या नहीं
madhyavdhi-2026
madhyavdhi-2026


मध्यावधि 2026: चंबल संभाग thesootr Survey

चंबल संभाग मध्य प्रदेश की राजनीति में हमेशा से एक अहम भूमिका निभाता रहा है। मुरैना (6 सीटें), भिंड (5 सीटें) और श्योपुर (2 सीटें) जिलों को मिलाकर यहां कुल 13 विधानसभा सीटें हैं। अब एक ताजा सर्वे ने इन सीटों का पूरा सियासी तापमान सामने रख दिया है।

e63a1e8a-f1f
e63a1e8a-f1f


चंबल संभाग का सियासी मिजाज

संभाग के तीन बड़े नंबर देखें- अपने विधायक से खुश हैं 43.6% लोग, सरकार से खुश हैं 36.3% और कांग्रेस को एक्टिव मानते हैं 35.3% लोग।

इन तीनों आंकड़ों से सबसे पहली और साफ बात यह निकलती है कि विधायक की रेटिंग सरकार की रेटिंग से करीब सात पॉइंट ऊपर है। मतलब साफ है कि वोटर अपने लोकल नेता को अलग नजर से देखता है। जो विधायक मिलता है, जो दिखता है, जो काम करता दिखता है उसकी साख सरकार के कामकाज की कुल छवि से ज्यादा मजबूत है।

दूसरी बड़ी बात ये है कि तीनों नंबर 50% से नीचे हैं। यानी किसी भी मोर्चे पर आधे से ज्यादा लोग खुश नहीं हैं। इसका मतलब यह है कि संभाग में कोई एकतरफा लहर नहीं है। हर सीट पर मेहनत, जनसंपर्क और सही मैसेजिंग से नतीजा बदला जा सकता है।

तीसरी बात ये है कि कांग्रेस को एक्टिव मानने वाले (35.3%) और सरकार से खुश रहने वाले (36.3%) लगभग बराबर हैं। यानी विपक्ष की मौजूदगी और सत्ता की स्वीकार्यता दोनों एक ही पायदान पर खड़े हैं। यही चीज इस संभाग को कड़ी टक्कर वाला बनाती है।



तीनों प्रश्नों पर गहन विश्लेषण

A. विधायक से संतुष्टि — घटते क्रम

क्रम

विधानसभा

विधायक

पार्टी

संतुष्टि

1

सुमावली

ऐंदल सिंह कंसाना

बीजेपी

48.3%

2

गोहद (एससी)

केशव देसाई जाटव

कांग्रेस

48.1%

3

विजयपुर

मुकेश मल्होत्रा

कांग्रेस

47.1%

4

मुरैना

दिनेश गुर्जर

कांग्रेस

46.9%

5

श्योपुर

बाबू जंडेल

कांग्रेस

46.6%

6

दिमनी

नरेंद्र सिंह तोमर

बीजेपी

45.7%

7

जौरा

पंकज उपाध्याय

कांग्रेस

45.2%

8

लहार

अम्बरीश शर्मा

बीजेपी

44.7%

9

अंबाह (एससी)

देवेंद्र रामनारायण सखबार

कांग्रेस

44.4%

10

मेहगांव

राकेश शुक्ला

बीजेपी

42.9%

11

अटेर

हेमंत कटारे

कांग्रेस

35.8%

12

सबलगढ़

सरला रावत

बीजेपी

34.5%

13

भिंड

नरेंद्र सिंह कुशवाह

बीजेपी

33.9%

विधायक से संतुष्टि के मामले में सबसे ऊपर हैं सुमावली (48.3%) और गोहद-एससी (48.1%)। यानी इन दोनों सीटों पर विधायक की अपनी पकड़ सबसे मजबूत है। लोग उन्हें पर्सनली पसंद करते हैं।

दूसरी तरफ सबसे नीचे हैं भिंड (33.9%), सबलगढ़ (34.5%) और अटेर (35.8%)। इन तीनों जगहों पर विधायक को अभी लोगों के बीच ज्यादा जाना होगा, ज्यादा दिखना होगा। जनसंपर्क में साफ कमी नजर आ रही है।

सबसे दिलचस्प बात यह है कि ऊपर भी बीजेपी-कांग्रेस दोनों हैं, और नीचे भी दोनों हैं। यानी यह कोई पार्टी का खेल नहीं है। लोग पार्टी देखकर नहीं, बल्कि यह देखकर रेटिंग दे रहे हैं कि उनका विधायक जमीन पर कितना काम कर रहा है, कितना दिख रहा है।

bd100b6d-5ee
bd100b6d-5ee


B. सरकार से संतुष्टि - घटते क्रम

क्रम

विधानसभा

संतुष्टि

क्रम

विधानसभा

संतुष्टि

1

मुरैना

42.2%

8

अंबाह (एससी)

35.0%

2

जौरा

41.1%

9

लहार

33.0%

3

सबलगढ़

40.0%

10

गोहद (एससी)

32.7%

4

विजयपुर

38.6%

11

दिमनी

31.0%

5

श्योपुर

38.4%

12

सुमावली

29.7%

6

अटेर

38.2%

13

भिंड

29.4%

7

मेहगांव

38.1%

8178ef16-806
8178ef16-806


सरकार संतुष्टि में मुरैना मॉडल

सरकार से संतुष्टि में सबसे आगे हैं मुरैना (दिनेश गुर्जर, 42.2%) और जौरा (पंकज उपाध्याय, 41.1%)। यानी इन दोनों इलाकों में लोगों को लग रहा है कि सरकार का काम जमीन पर दिख रहा है।

सबसे नीचे हैं भिंड (29.4%) और सुमावली (29.7%)।

अब सबसे मजेदार बात- सुमावली का पैटर्न। यह वही सीट है जो विधायक से संतुष्टि में पूरे संभाग में नंबर एक थी, लेकिन सरकार से संतुष्टि में नीचे से दूसरे नंबर पर है। यानी वहां के लोग अपने विधायक को तो पसंद करते हैं, लेकिन सरकार के काम से खुश नहीं हैं।

ऐसी सीटें जहां विधायक की साख अच्छी है पर सरकार की छवि कमजोर है। ये असल में सबसे बड़ा मौका है। यहां विधायक की पॉपुलैरिटी को इस्तेमाल करके सरकारी योजनाओं को लोगों तक बेहतर तरीके से पहुंचाया जा सकता है। बस जरूरत है डिलीवरी को जमीन पर दिखाने की।

f0150c22-d5e
f0150c22-d5e


C. कांग्रेस की सक्रियता की धारणा — घटते क्रम

क्रम

विधानसभा

सक्रिय मानते हैं

क्रम

विधानसभा

सक्रिय मानते हैं

1

भिंड

44.0%

8

मेहगांव

35.7%

2

अंबाह (एससी)

43.6%

9

अटेर

33.3%

3

जौरा

40.3%

10

मुरैना

30.6%

4

सुमावली

39.8%

11

सबलगढ़

29.1%

5

श्योपुर

37.7%

12

दिमनी

27.6%

6

गोहद (एससी)

36.5%

13

लहार

23.3%

7

विजयपुर

36.4%

कांग्रेस को एक्टिव मानने के मामले में सबसे आगे हैं भिंड (44.0%) और अंबाह-एससी (43.6%)। यानी इन इलाकों में लोगों को लग रहा है कि विपक्ष मैदान में है। सबसे कम यह धारणा है लहार (23.3%) और दिमनी (27.6%) में... यहां लोग कांग्रेस को बहुत एक्टिव नहीं मानते।

अब इसमें एक साफ उल्टा पैटर्न दिखता है।

जहां विधायक से भी नाराजगी है और सरकार से भी...जैसे भिंड, वहीं कांग्रेस सबसे ज़्यादा एक्टिव नजर आती है। और जहां लोग अपेक्षाकृत खुश हैं- जैसे लहार और दिमनी...वहां कांग्रेस की मौजूदगी सबसे कमजोर दिखती है।

मतलब साफ है कि जहां असंतोष है, वहीं विपक्ष पैर जमाता है। यह कोई इत्तेफाक नहीं, बल्कि संभाग में एक साफ ट्रेंड है कि नाराजगी और विपक्षी सक्रियता साथ-साथ चलती हैं।

3. पार्टीवार तुलना

कांग्रेस के पास संभाग की 7 और बीजेपी के पास 6 सीटें हैं। जिन सीटों पर जिस दल का विधायक है, उनका औसत इस प्रकार है:

संकेतक

कांग्रेस-अधिकृत (7 सीटें)

बीजेपी-अधिकृत (6 सीटें)

विधायक संतुष्टि

45.0%

41.8%

सरकार संतुष्टि

38.3%

33.6%

कांग्रेस सक्रिय

36.7%

33.4%

तीनों संकेतकों पर देखें तो कांग्रेस वाली सीटों का औसत बीजेपी वाली सीटों से थोड़ा ऊपर है।

लेकिन इसे सीधे कांग्रेस आगे है न पढ़ें। असल में यह फर्क कुछ खास सीटों की वजह से आ रहा है, जैसे मुरैना, गोहद और विजयपुर। यहां विधायकों का निजी प्रदर्शन काफी मजबूत है। इन्हीं सीटों ने कांग्रेस का औसत ऊपर खींचा है।

चूंकि कुल सीटें कम हैं, इसलिए यह अंतर किसी बड़े दलीय ट्रेंड की तरफ इशारा नहीं करता। यह पार्टी की नहीं, कुछ व्यक्तिगत विधायकों की मेहनत का नतीजा है।

विधानसभावार समीक्षा और आगे की राह

सुमावली: ऐंदल सिंह कंसाना (बीजेपी)

सुमावली की तस्वीर काफी साफ है।

बीजेपी विधायक ऐंदल सिंह कंसाना को 48.3% संतुष्टि मिली है, जो पूरे संभाग में सबसे ज्यादा है। यानी व्यक्तिगत तौर पर उनकी पकड़ काफी मजबूत है।

लेकिन सरकार से संतुष्टि सिर्फ 29.7% है, जो कमजोर मानी जा सकती है। वहीं कांग्रेस को 39.8% लोग एक्टिव मान रहे हैं, यानी विपक्ष भी पूरी तरह मैदान में है।

सीधी बात ये है कि विधायक की पर्सनल पॉपुलैरिटी मजबूत है, लेकिन सरकारी कामकाज की छवि उतनी प्रभावी नहीं दिख रही। अब जरूरत इस बात की है कि इस व्यक्तिगत भरोसे को सरकारी योजनाओं की जमीनी डिलीवरी से जोड़ा जाए, ताकि यही समर्थन आगे चलकर सरकार के पक्ष में भी बदला जा सके।

गोहद (एससी): केशव देसाई जाटव (कांग्रेस)

गोहद (एससी) की स्थिति कांग्रेस के लिए काफी मजबूत दिख रही है।

विधायक केशव देसाई जाटव को 48.1% संतुष्टि मिली है, यानी लोगों की उनसे अच्छी-खासी संतुष्टि है। सरकार 32.7% पर है, जो औसत से नीचे माना जा सकता है। वहीं कांग्रेस की सक्रियता 36.5% है।

सीधी बात ये है कि विधायक की पकड़ मजबूत है, लेकिन सरकारी कामकाज का असर उतना संतोषजनक नहीं दिख रहा।

चूंकि यह आरक्षित सीट है, इसलिए अनुसूचित वर्ग की योजनाओं को ज़मीन पर उतारना सबसे अहम है। जरूरत इस बात की है कि योजनाओं का लाभ सीधे असली हितग्राहियों तक पहुंचे, तभी यह भरोसा लंबे समय तक बना रह पाएगा।

विजयपुर: मुकेश मल्होत्रा (कांग्रेस)

विधायक को 47.1% संतुष्टि मिली है, सरकार 38.6% पर है और कांग्रेस की सक्रियता 36.4% है। तीनों आंकड़े संतुलित हैं और औसत से ऊपर हैं। यानी सीट की स्थिति फिलहाल ठीक-ठाक और स्थिर मानी जा सकती है।

यह आदिवासी क्षेत्र है, इसलिए यहां पीने के पानी, सड़क और रोजगार जैसे मुद्दे सबसे अहम रहते हैं। इन पर लगातार काम और फॉलो-अप जरूरी है, ताकि जो बढ़त बनी हुई है, वह आगे भी कायम रह सके।

साथ ही, इस सीट को लेकर कानूनी स्थिति भी चर्चा में रही है। कोर्ट में मामले के चलते राजनीतिक स्थिति पर नजर बनी हुई है, इसलिए आगे हर अपडेट इस सीट के समीकरणों पर असर डाल सकता है।

बता दें कि मल्होत्रा की विधायकी पर कोर्ट में केस चल रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने मुकेश मल्होत्रा की विधायकी को बरकरार रखते हुए एमपी हाईकोर्ट की ग्वालियर बेंच के उस फैसले पर स्टे लगा दिया था, जिसमें रामनिवास रावत को विधायक घोषित किया गया था।

मुरैना: दिनेश गुर्जर (कांग्रेस)

मुरैना की तस्वीर काफी दिलचस्प है।

कांग्रेस विधायक दिनेश गुर्जर को 46.9% संतुष्टि मिली है, जो मजबूत स्थिति दिखाती है। सरकार की रेटिंग 42.2% है, जो पूरे संभाग में सबसे ऊंची है। वहीं कांग्रेस की सक्रियता 30.6% पर है, जो अपेक्षाकृत कम है।

सीधी बात ये है कि यहां सरकार के काम को लोग बेहतर तरीके से स्वीकार कर रहे हैं। यह सीट एक तरह से कामकाज का मॉडल बनती दिख रही है।

अब चुनौती यही है कि शहरी सेवाओं ,सफाई, पानी और ट्रैफिक की रफ्तार बनी रहे। यही निरंतरता इसे पूरे संभाग के लिए एक मजबूत उदाहरण बनाए रखेगी।

श्योपुर: बाबू जंडेल (कांग्रेस)

श्योपुर में हालात काफी अच्छे दिख रहे हैं। कांग्रेस विधायक बाबू जंडेल को 46.6% संतुष्टि मिली है, जो ठीक-ठाक मजबूत प्रदर्शन है। सरकार 38.4% पर है और कांग्रेस की सक्रियता 37.7% है। यानी तीनों ही मोर्चों पर स्थिति औसत से बेहतर बनी हुई है।

कुल मिलाकर सीट पर संतुलन और स्थिरता दिख रही है। अब फोकस इस पर होना चाहिए कि स्वास्थ्य और पोषण सेवाएं लगातार बेहतर रहें और दूर-दराज की पंचायतों तक पहुंच और मजबूत की जाए, ताकि यह पकड़ और पक्की हो सके।

दिमनी: नरेंद्र सिंह तोमर (बीजेपी)

दिमनी में स्थिति बीजेपी के लिए फिलहाल ठीक-ठाक मानी जा सकती है।

विधायक नरेंद्र सिंह तोमर को 45.7% संतुष्टि मिली है, जो संतोषजनक है। सरकार 31.0% पर है, जबकि कांग्रेस की सक्रियता 27.6% है, यानी विपक्ष यहां ज्यादा प्रभावी नहीं दिख रहा।

यह सीट हाई-प्रोफाइल होने की वजह से चर्चा में रहती है, इसलिए लोगों की उम्मीदें भी ज्यादा रहती हैं। सिर्फ बड़ी घोषणाओं से काम नहीं चलेगा, जमीन पर दिखने वाले काम और लगातार मौजूदगी ही भरोसा बनाए रखेगी।

जौरा: पंकज उपाध्याय (कांग्रेस)

जौरा में तस्वीर काफी टक्कर वाली दिख रही है।

कांग्रेस विधायक पंकज उपाध्याय को 45.2% संतुष्टि मिली है, जो ठीक-ठाक मजबूत स्थिति है। सरकार 41.1% पर है और कांग्रेस की सक्रियता 40.3% है। यानी विपक्ष भी यहां पूरी तरह एक्टिव है और मैदान में नजर आ रहा है।

सीधी बात ये है कि यहां मुकाबला बराबरी का बनता दिख रहा है। ऐसे में विकास के कामों की जानकारी लोगों तक लगातार पहुंचानी होगी और शिकायतों का निपटारा भी तेजी से करना होगा, वरना स्थिति किसी भी तरफ झुक सकती है।

लहार: अम्बरीश शर्मा (बीजेपी)

लहार की स्थिति बीजेपी के लिए फिलहाल काफी मजबूत दिख रही है।

विधायक अम्बरीश शर्मा को 44.7% संतुष्टि मिली है, जो अच्छा नंबर है। सरकार 33.0% पर है, जबकि कांग्रेस की सक्रियता सिर्फ 23.3% है, जो पूरे संभाग में सबसे कम है। यानी यहां विपक्ष फिलहाल कमजोर स्थिति में नजर आ रहा है।

सीधी बात ये है कि यह बीजेपी के लिए एक अच्छा मौका है। अगर सिंचाई और सड़क जैसी लंबित परियोजनाओं को समय पर पूरा कर लिया गया, तो इस बढ़त को और मजबूत किया जा सकता है और जनता का भरोसा और पक्का हो सकता है।

अंबाह (एससी): देवेंद्र रामनारायण सखबार (कांग्रेस)

अंबाह (एससी) की तस्वीर काफी दिलचस्प है।

कांग्रेस विधायक देवेंद्र रामनारायण सखबार को 44.4% संतुष्टि मिली है, जो ठीक-ठाक मजबूत स्थिति दिखाती है। सरकार 35.0% पर है, जबकि कांग्रेस की सक्रियता 43.6% है, यानी विपक्ष भी यहां काफी तेज़ी से काम करता दिख रहा है।

कुल मिलाकर यह दूसरी सबसे मजबूत सीटों में से एक मानी जा रही है, जहां मुकाबला कड़ा है।

आरक्षित सीट होने की वजह से यहां सामाजिक न्याय और कल्याण योजनाओं की सीधी डिलीवरी लोगों तक दिखना बहुत जरूरी है। साथ ही बूथ स्तर पर लगातार संवाद बढ़ाना होगा, तभी पकड़ और मजबूत रह पाएगी।

मेहगांव: राकेश शुक्ला (बीजेपी)

मेहगांव की स्थिति फिलहाल काफी संतुलित दिख रही है।

बीजेपी विधायक राकेश शुक्ला को 42.9% संतुष्टि मिली है, सरकार को 38.1% और कांग्रेस की सक्रियता 35.7% है। तीनों ही आंकड़े औसत के आसपास हैं, यानी न बहुत अच्छा माहौल है, न बहुत खराब। सीट अभी स्थिर बनी हुई है।

अब जरूरत इस बात की है कि खासकर खेती और गांवों के बुनियादी ढांचे पर ठोस काम किया जाए। अगर इन क्षेत्रों में सुधार दिखता है, तो यह सीट आसानी से औसत से ऊपर निकल सकती है।

अटेर : हेमंत कटारे (कांग्रेस)

अटेर से कांग्रेस विधायक हेमंत कटारे का हाल कुछ ऐसा है कि जनता ने सरकार को तो ठीक-ठाक नंबर दे दिए हैं, लेकिन विधायक के मामले में हाथ थोड़ा पीछे खींच लिया है।

सर्वे में विधायक को 35.8% ही संतुष्टि मिली है, जो नीचे से तीसरे नंबर पर आता है। वहीं सरकार को 38.2% मिले हैं, जो थोड़ा बेहतर है।

सीधी बात करें तो लोग सरकार से बहुत ज्यादा नाराज़ नहीं हैं, लेकिन अपने विधायक से उतने खुश भी नहीं दिख रहे। अब कटारे को चाहिए कि इलाके में ज्यादा सक्रिय रहें, लोगों से लगातार मिलें और जो शिकायतें हैं, उन्हें तेजी से निपटाएं।

सबलगढ़: सरला रावत (बीजेपी)

सबलगढ़ से बीजेपी विधायक सरला रावत का हाल कुछ ऐसा दिख रहा है कि सरकार को तो लोग ठीक-ठाक मान रहे हैं, लेकिन विधायक की पकड़ उतनी मजबूत नहीं दिख रही।

विधायक को 34.5% संतुष्टि मिली है और वे नीचे से दूसरे नंबर पर हैं। वहीं सरकार को 40.0% मिला है, जो थोड़ा बेहतर है।

मतलब साफ है कि लोग सरकार के काम से पूरी तरह नाराज़ नहीं हैं, लेकिन विधायक इलाके में उतने एक्टिव नहीं दिख रहे जितना होना चाहिए। अब जरूरत इस बात की है कि वे ज्यादा फील्ड में दिखें, लोगों से सीधे जुड़ें और अपनी मौजूदगी मजबूत करें, तभी सरकार की पॉजिटिव छवि को वोट में बदल पाएंगे।

भिंड: नरेंद्र सिंह कुशवाह (बीजेपी)

भिंड में हालात कुछ ज्यादा ही गंभीर दिख रहे हैं। बीजेपी विधायक नरेंद्र सिंह कुशवाह को 33.9% संतुष्टि मिली है, वहीं सरकार को सिर्फ 29.4%। दोनों ही आंकड़े पूरे संभाग में सबसे नीचे हैं।

उधर कांग्रेस की सक्रियता 44.0% पर है, यानी विपक्ष यहां ज्यादा एक्टिव नजर आ रहा है।

सीधी भाषा में कहें तो यह सीट अब तुरंत ध्यान मांग रही है। शहरी इलाकों में बुनियादी सुविधाओं को सुधारने की जरूरत है, जनसुनवाई नियमित करनी होगी और विधायक को लगातार मैदान में दिखना होगा। वरना नाराजगी और बढ़ सकती है।

जिलावार डिटेल समीक्षा

मुरैना जिले का ओवरऑल रिव्यू

मुरैना जिले में कुल 6 विधानसभा सीटें हैं। इनमें कांग्रेस और बीजेपी की बराबरी की टक्कर है—3 सीटें कांग्रेस के पास और 3 बीजेपी के पास।

औसत आंकड़े देखें तो विधायक संतुष्टि 44.4%, सरकार 36.7% और कांग्रेस की सक्रियता 35.1% है। यानी ओवरऑल माहौल संभाग के औसत के आसपास ही घूम रहा है, लेकिन अंदर से तस्वीर काफी मिली-जुली है।

एक तरफ सुमावली (बीजेपी) में विधायक की लोकप्रियता सबसे ज्यादा 48.3% तक पहुंच रही है, वहीं सबलगढ़ (बीजेपी) में यह घटकर 34.5% पर आ जाती है। यानी जिले के भीतर ही भरोसे का बड़ा फर्क दिखता है।

सरकारी कामकाज की बात करें तो मुरैना सीट (कांग्रेस) 42.2% के साथ पूरे संभाग में सबसे आगे है, जबकि दिमनी (बीजेपी) में कांग्रेस की सक्रियता सबसे कमजोर 27.6% दिख रही है।

रुझान

मुरैना शहर की सीट एक तरह से मॉडल बनकर उभर रही है, जहां विधायक और सरकार दोनों को लोग अपेक्षाकृत बेहतर मान रहे हैं। वहीं असली चिंता सबलगढ़ और दिमनी जैसी सीटें हैं, जहां या तो विधायक की पकड़ कमजोर है या फिर सरकार की छवि कमजोर दिख रही है।

प्राथमिकताएं

  • सबलगढ़: विधायक की फील्ड मौजूदगी और जनसंपर्क बढ़ाना
  • दिमनी: घोषणाओं को जमीन पर दिखने वाले काम में बदलना
  • सुमावली: विधायक की मजबूत साख को सरकारी योजनाओं की डिलीवरी से जोड़ना
  • मुरैना सीट: सेवा मॉडल को बाकी सीटों में दोहराना
जिला कुल मिलाकर स्थिर है, लेकिन असली खेल सुधार के इन अंतरालों को भरने में छिपा है।

भिंड जिले का ओवरऑल रिव्यू

भिंड जिले में कुल 5 विधानसभा सीटें हैं। इनमें कांग्रेस के पास 2 और बीजेपी के पास 3 सीटें हैं।

औसत आंकड़ों की बात करें तो विधायक संतुष्टि 40.9%, सरकार 34.5% और कांग्रेस सक्रियता 34.7% है। यानी पूरा जिला संभाग औसत से थोड़ा नीचे और दबाव में दिख रहा है।

यहां तस्वीर दो बिल्कुल अलग छोरों में बंटी हुई है। एक तरफ गोहद (एससी) सीट है, जहां विधायक केशव देसाई जाटव को 48.1% संतुष्टि मिली है और माहौल काफी मजबूत है।

दूसरी तरफ भिंड सीट है, जहां बीजेपी विधायक नरेंद्र सिंह कुशवाह को सिर्फ 33.9% संतुष्टि मिली है और सरकार की रेटिंग भी 29.4% तक गिर गई है। इसी सीट पर कांग्रेस की सक्रियता 44.0% है, जो सबसे ज्यादा है। यानी यहीं पर असंतोष और विपक्ष दोनों सबसे ज्यादा सक्रिय दिख रहे हैं।

वहीं लहार (बीजेपी) में कांग्रेस की सक्रियता सिर्फ 23.3% है, जो पूरे जिले में सबसे कम है।

रुझान

भिंड सीट जिला का सबसे संवेदनशील केंद्र बनती दिख रही है, जहां जनता की नाराजगी और विपक्ष की सक्रियता दोनों एक साथ ज्यादा हैं। इसके उलट लहार में विपक्ष कमजोर स्थिति में है, जो सत्ता पक्ष के लिए अवसर बनाता है।

प्राथमिकताएं

  • भिंड सीट: शहरी सेवाओं में तुरंत सुधार और नियमित जनसुनवाई
  • अटेर: विधायक की जमीन पर उपस्थिति और संपर्क बढ़ाना
  • लहार: कमजोर विपक्षी माहौल का फायदा उठाकर रुकी हुई परियोजनाओं को तेजी से पूरा करना
कुल मिलाकर भिंड जिला स्थिर नहीं, बल्कि “दो ध्रुवों” में बंटा हुआ जिला दिख रहा है, जहां सुधार की रफ्तार ही असली दिशा तय करेगी।

श्योपुर जिले का ओवरऑल रिव्यू

श्योपुर जिले में कुल 2 विधानसभा सीटें हैं और दोनों ही कांग्रेस के पास हैं।

औसत आंकड़े देखें तो विधायक संतुष्टि 46.9%, सरकार 38.5% और कांग्रेस सक्रियता 37.1% है। यानी यह जिला संभाग के मुकाबले अपेक्षाकृत बेहतर और संतुलित स्थिति में दिख रहा है।

यहां दोनों सीटों की तस्वीर लगभग एक जैसी है—विजयपुर (मुकेश मल्होत्रा) और श्योपुर (बाबू जंडेल) दोनों के आंकड़े काफी करीब हैं। इससे साफ है कि जिले में जनता की सोच और राजनीतिक माहौल काफी स्थिर और एकसमान बना हुआ है।

रुझान

आदिवासी बहुल इस जिले में विधायक और सरकार दोनों के प्रति धारणा फिलहाल सकारात्मक है। किसी भी सीट पर बड़ा असंतोष या टकराव जैसी स्थिति नहीं दिखती, लेकिन सभी संकेतक अभी भी 50% के स्तर से नीचे हैं, यानी सुधार की गुंजाइश बनी हुई है।

प्राथमिकताएं

  • पेयजल और सड़क व्यवस्था को मजबूत करना
  • स्वास्थ्य और पोषण सेवाओं की निरंतरता बनाए रखना
  • दूरस्थ गांवों तक सरकारी योजनाओं की पहुंच बढ़ाना
कुल मिलाकर श्योपुर जिला शांत और स्थिर स्थिति में है, लेकिन यही स्थिरता आगे बढ़कर मजबूत प्रदर्शन में बदली जाए—यही असली चुनौती है।

FAQ

  1. सवाल: चंबल संभाग के द सूत्र सर्वे में सबसे ज्यादा असंतोष कहां मिला?
    जवाब: चंबल संभाग सर्वे में भिंड सीट पर सबसे ज्यादा असंतोष दर्ज हुआ। यहां विधायक संतुष्टि केवल 33.9% और सरकार संतुष्टि 29.4% रही, जो पूरे संभाग में सबसे कम है।
  2. सवाल: चंबल संभाग सर्वे में किस विधायक को सबसे ज्यादा जनसमर्थन मिला?
    जवाब: सुमावली से बीजेपी के विधायक ऐंदल सिंह कंसाना को 48.3% विधायक संतुष्टि के साथ पूरे संभाग में सबसे ऊपर रखा गया है। कांग्रेस की तरफ से गोहद (एससी) के केशव देसाई जाटव 48.1% के साथ दूसरे स्थान पर हैं। दोनों के आंकड़े बहुत करीब हैं और दोनों ही दल टॉप दो में हैं।
  3. सवाल: चंबल संभाग सर्वे में बीजेपी और कांग्रेस में से कौन आगे है?
    जवाब: कांग्रेस-अधिकृत 7 सीटों पर विधायक संतुष्टि का औसत 45.0% है जबकि बीजेपी की 6 सीटों पर 41.8%। सरकार संतुष्टि में भी कांग्रेस की सीटें (38.3%) बीजेपी की सीटों (33.6%) से आगे हैं। लेकिन यह अंतर कुछ मजबूत व्यक्तिगत प्रदर्शन वाली सीटों की वजह से है। कम सीटों की संख्या के चलते इसे निर्णायक दलीय रुझान नहीं माना जा सकता।

ये खबरें भी पढ़ें...

मध्यावधि 2026 : चंबल संभाग के 13 विधायकों में किसे मिला जनता का भरोसा?

मध्यावधि 2026: ग्वालियर संभाग में न बीजेपी आगे, न कांग्रेस मजबूत, स्विंग सीटों का गढ़ बना

मध्यावधि 2026: सागर संभाग में विधायक से खुश, सरकार से नाराज जनता

मध्यावधि 2026 - thesootr Survey : हमने समझी 3.90 करोड़ लोगों की नब्ज

एमपी कांग्रेस | एमपी बीजेपी | मोहन सरकार के ढाई साल | द सूत्र मध्यावधि 2026 | चंबल संभाग द सूत्र सर्वे

Tags:
  • एमपी कांग्रेस
  • मोहन यादव सरकार
  • एमपी बीजेपी
  • मुरैना
  • Chambal
  • श्योपुर
  • thesootr Survey
  • मध्यावधि 2026
  • द सूत्र मध्यावधि 2026
  • मोहन सरकार के ढाई साल
  • चंबल संभाग द सूत्र सर्वे
गूगल पर द सूत्र चुनें ! Add as a preferredsource on Google
छत्तीसगढ़ कांग्रेस का कलेक्ट्रेट घेराव, पुलिस से झूमाझटकी, भूपेश बघेल बोले ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दें

By Arun Tiwari

छत्तीसगढ़ कांग्रेस का कलेक्ट्रेट घेराव, पुलिस से झूमाझटकी, भूपेश बघेल बोले ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दें
मध्य प्रदेश में 1 अक्टूबर से राशन दुकानें बंद, राशन विक्रेता संघ ने 5 मांगों पर दी चेतावनी

By Sandeep Kumar

मध्य प्रदेश में 1 अक्टूबर से राशन दुकानें बंद, राशन विक्रेता संघ ने 5 मांगों पर दी चेतावनी
IAS आशीष टिकरिहा को जनसंपर्क संचालक का अतिरिक्त प्रभार, वेयर हाउसिंग कॉरपोरेशन के प्रबंध संचालक की जिम्मेदारी भी रहेगी

By VINAY VERMA

IAS आशीष टिकरिहा को जनसंपर्क संचालक का अतिरिक्त प्रभार, वेयर हाउसिंग कॉरपोरेशन के प्रबंध संचालक की जिम्मेदारी भी रहेगी
राजस्थान हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, तलाक के बाद पासपोर्ट पर पिता के नाम की कोई जरूरत नहीं

By Ashish Bhardwaj

राजस्थान हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, तलाक के बाद पासपोर्ट पर पिता के नाम की कोई जरूरत नहीं
पाटन चुनाव याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा निर्देश, भूपेश बघेल की आपत्ति पर पहले छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट करेगा सुनवाई

By Arun Tiwari

पाटन चुनाव याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा निर्देश, भूपेश बघेल की आपत्ति पर पहले छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट करेगा सुनवाई
भोपाल की सेज यूनिवर्सिटी में छात्रों का हंगामा: हॉस्टल मेस के खाने में कीड़े मिलने का आरोप, अब खाद्य विभाग करेगा जांच

By Jitendra Shrivastava

भोपाल की सेज यूनिवर्सिटी में छात्रों का हंगामा: हॉस्टल मेस के खाने में कीड़े मिलने का आरोप, अब खाद्य विभाग करेगा जांच
UPI एमडीआर पर सुप्रीम कोर्ट का रोक से इनकार: 15 अक्टूबर से दुकानदारों को देना होगा 0.4 फीसदी चार्ज

By Sanjay Dhiman

UPI एमडीआर पर सुप्रीम कोर्ट का रोक से इनकार: 15 अक्टूबर से दुकानदारों को देना होगा 0.4 फीसदी चार्ज